'नानी के नुस्खों' ने दिलाया नोबेल

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तू यूयू पहली चीनी महिला हैं जिन्हें मलेरिया-रोधी दवा बनाने में मदद के लिए नोबेल पुरस्कार दिया गया है. 84 वर्षीय ये महिला इस सम्मान तक विशुद्ध पारंपरिक रास्ते से पहुंची हैं.

उन्हें मेडिसिन के लिए नोबेल पुरस्कार मिला है लेकिन उनके पास न तो मेडिकल की डिग्री है और न ही पीएचडी.

तू यूयू ने बीजिंग में औषधि विज्ञान के एक स्कूल में पढ़ाई की थी. इसके बाद जल्द ही वह चीनी पारंपरिक औषधियों की अकादमी में शोधकर्ता हो गईं.

चीन में उन्हें 'तीन नहीं' वाली विजेता कहा जाता है. उनके पास कोई मेडिकल डिग्री नहीं है, उनके पास डॉक्टरेट नहीं है और उन्होंने कभी विदेश में काम नहीं किया.

गुप्त शोध

तू यूयू ने मलेरिया पर शोध तब शुरू किया जब उन्हें एक अति-गुप्त सरकारी इकाई, 'मिशन 523' में नियुक्त किया गया.

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साल 1967 में साम्यवादी नेता माओ ज़ेडोंग ने तय किया कि मलेरिया का तुरंत इलाज तलाशना देश की ज़रूरत बन गई है.

उस समय मच्छरों से फैलने वाला मलेरिया उत्तरी वियतनाम के जंगलों में अमरीका से लड़ रहे चीनी सैनिकों को बड़ी संख्या में शिकार बना रहा था. इस बीमारी से लड़ने के लिए ही गुप्त शोध इकाई बनाई गई थी.

दो साल बाद तू यूयू को मिशन 123 की नई प्रमुख बना दिया गया. उन्हें दक्षिणी चीन के द्वीप हैनान यह अध्ययन करने के लिए भेजा गया कि मलेरिया इंसानी स्वास्थ्य को किस तरह नुक़सान पहुंचा रहा है.

वह छह महीने तक वहीं रहीं जबकि उनकी चार साल की बेटी एक स्थानीय नर्सरी में थी.

चीन की सांस्कृतिक क्रांति के चरम के दौरान उनके पति को देश के ग्रामीण इलाक़ों में काम करने के लिए भेज दिया गया था.

खुद पर परीक्षण

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नोबेल पुरस्कार जीतने वाली दवा बनाने में तू यूयू को प्राचीन चीनी लेखों से प्रेरणा मिली. मिशन 523 ने मलेरिया से लड़ने के लिए ऐतिहासिक तरीके ढूंढने के लिए पुरानी किताबों का ढेर लगा दिया.

जब उन्होंने मलेरिया रोधी दवा के लिए शोध किया तब तक दुनियाभर में 2,40,000 मिश्रणों का पहले ही परीक्षण किया जा चुका था लेकिन सफलता नहीं मिली थी.

अंततः उनके दल को एक तत्व- स्वीट वर्मवुड के बारे में एक संदर्भ मिला. इसे 400 ईस्वी में चीन में मलेरिया के इलाज के लिए इस्तेमाल किया जाता था.

शोध दल ने वर्मवुड में से एक यौगिक आर्टेम्सिनिन को अलग कर लिया जो मलेरिया के सहायक परजीवियों के ख़िलाफ़ काम करता था.

दल ने इस यौगिक के अर्क पर परीक्षण किए लेकिन इससे कोई फ़ायदा नहीं मिला और फिर तू यूयू ने एक बार फिर मूल प्राचीन लेख को पढ़ा.

एक बार और ठीक से पढ़ने के बाद उन्होंने दवा तैयार करने के तरीके को थोड़ा बदल दिया और अर्क को उबलने की सीमा से पहले तक गर्म किया.

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दवा के चूहों और बंदरों पर आशाजनक परिणाम आने के बाद उन्होंने सबसे पहले इंसान के रूप में इसे खुद पर परखा ताकि यह तय हो जाए कि वह सुरक्षित है.

चीनी मज़दूरों पर इसके क्लीनिकल ट्रायल शुरू होने के बाद उन्होंने चीनी मीडिया को बताया, "शोध दल की प्रमुख होने के नाते यह मेरी ज़िम्मेदारी थी."

सख़्त और हठी महिला

तू यूयू को चीन में एक 'विनम्र' महिला के रूप में जाना जाता है. उनका शोध वर्ष 1977 में बेनामी प्रकाशित हुआ था और दशकों तक उन्हें मिशन 523 में उनके शोध के लिए बहुत कम पहचान मिली.

साल 2009 में तू की एक आत्मकथा प्रकाशित हुई जिसमें उनके वैज्ञानिक करियर पर बात की गई थी.

हालांकि इसके बाद तुरंत ही उन पर चर्चा के केंद्र में आने और अपने साथियों के योगदान की उपेक्षा करने के आरोप लगाए गए.

कुछ लोगों ने कहा कि तू यूयू के मिशन 523 में आने से पहले ही दो शोधकर्ताओं ने स्वीट वर्मवुड के यौगिक की पहचान कर ली थी.

हालांकि कथित रूप से यूयू वही व्यक्ति थीं जिन्होंने प्राचीन लेख का अध्ययन कर दवा के लिए इस यौगिक का अर्क निकालने का सबसे अच्छा तरीका निकाला.

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किसी भी सूरत में तू यूयू को उनके जुनून और परिश्रम के लिए हमेशा याद किया गया.

उनकी एक पूर्व सहयोगी, लिएंडा लीस कहती हैं कि तू "एकांतप्रिय और बिल्कुल सीधी थीं. अगर वह किसी बात से सहमत नहीं हैं तो वह सीधे कह देंगी."

उनकी एक और सहयोगी फ़्यूमिंग लियाओ, जिन्होंने तू यूयू के साथ 40 साल से भी ज़्यादा काम किया है, वह उन्हें एक "सख़्त और हठी महिला" बताती हैं.

इतनी हठी तो हैं ही कि दशकों तक प्राचीन लेखों को पढ़ती रहें और उन्हें आधुनिक वैज्ञानिक तरीकों में ढाल करें. इनके परिणामों ने लाखों जीवन बचाए हैं.

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