पाकिस्तान से वापस आएगी भारत की 'गीता'

  • 15 अक्तूबर 2015
गीता

भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा है कि पाकिस्तान में सालों से रह रही भारतीय लड़की गीता के परिवार का पता चल गया है वो जल्द भारत लौटेंगी.

एक ट्वीट संदेश में सुषमा स्वराज ने कहा, “गीता जल्द ही भारत आएगी. हमने उसके परिवार को ढूँढ लिया है. वो परिवारवालों को डीएनए टेस्ट के बाद सौंप दी जाएगी.”

मूक और बधिर गीता दस सालों पहले पाकिस्तान के बॉर्डर गार्ड्स को मिली थी और तब से वहीं रह रही है.

पाकिस्तान स्थित भारत का उच्चायुक्त लगातार गीता के संपर्क में था. इस बीच भारत मे कुछ परिवारों ने गीता को अपनी ‘बेटी’ बताया था.

सुषमा स्वराज के निर्देश पर अगस्त में पाकिस्तान में भारत के उच्चायुक्त टीसीए राघवन और उनकी पत्नी ने कराची में गीता से मुलाक़ात भी की थी.

इमेज कॉपीरइट Other

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने प्रेस कॉफ्रेंस में कहा है कि परिवार की पहचान पर गीता का वापस लाना निर्भर नहीं है. गीता भारत की बेटी है. अगर उनके परिवार की पहचान नहीं हो पाती है तब भी उन्हें भारत वापस लाया जाएगा.

उन्होंने बताया कि गीता के पास जो तस्वीर मौजूद है उस परिवार से डीएनए मैच कराने के बाद ही उन्हें परिवार के हवाले किया जाएगा. गीता के परिवार के नहीं मिलने की हालत में हमने दिल्ली और इंदौर में दो संस्थाए चिह्नित की है जिन्हें गीता की देखभाल की जिम्मेवारी दी जाएगी.

पाकिस्तान के कराची में रहने वाली गीता की कहानी सलमान ख़ान की फ़िल्म बजरंगी भाईजान की मुन्नी की कहानी से मिलती-जुलती है.

बजरंगी भाईजान और गीता

इमेज कॉपीरइट spice

फ़िल्म के सुपरहिट होने के बाद गीता एक बार फ़िर चर्चा में आईं थीं.

पिछले 10 साल से अधिक समय से पाकिस्तान में रह रही गीता न ही बोल सकती हैं और न ही सुन सकती हैं.

भारतीय बताई जाने वाली गीता की कहानी कुछ साल पहले पाकिस्तानी मीडिया में सुर्खियों में रही थी लेकिन किसी ने उसपर ध्यान नहीं दिया.

गीता साल 2003-04 में पाकिस्तानी बॉर्डर गॉर्ड्स को लाहौर के पास मिली थी. वो इसे ईधी यतीमखाना लाए. तब इसकी उम्र क़रीब 11 साल रही होगी.

पाकिस्तान की बॉर्डर अथॉरिटी ने इस बच्ची को ईधी फ़ाउंडेशन को सौंपा था.

ये मामला पहले भी पाकिस्तानी अख़बारों में उठा था, लेकिन उस समय भारतीय उच्चायोग से कोई मिलने नहीं आया.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

संबंधित समाचार