पाक के पास हैं भारत से निपटने के लिए परमाणु हथियार?

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पाकिस्तान ने पहली बार सार्वजनिक रूप से यह बात मानी है कि उसने पड़ोसी देश भारत के अचानक हमला करने की स्थिति से निपटने के लिए कम क्षमता वाले परमाणु हथियार बना रखे हैं.

पाकिस्तान के पास कई सालों से परमाणु हथियार मौजूद हैं लेकिन माना जा रहा है कि पहली बार उसने सार्वजनिक रूप से इसके बारे में बताया है.

विदेश सचिव एज़ाज़ चौधरी ने वाशिंगटन में एक प्रेस वार्ता के दौरान यह बात बताई.

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सार्वजनिक रूप से ये बात तब उजागर की गई जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ वाशिंगटन में अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा से मिलने वाले थे.

समझा जा रहा था कि दोनों राजनेता अन्य मुद्दों के साथ पाकिस्तान परमाणु कार्यक्रम पर भी बात करने वाले थे.

कई लोग एजाज़ चौधरी के इस बयान को संभावित भारतीय आक्रमण के हालत में पाकिस्तान के इरादे को साफ करता पहला आधिकारिक बयान मान रहे हैं.

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लाहौर के परमाणु भौतिकविद् और स्वतंत्र सुरक्षा विश्लेषक परवेज़ हूडभॉय का कहना है, "सच्चाई तो यह है कि पाकिस्तान छोटे परमाणु हथियार बना रहा था, यह बात पूरी दुनिया उस दिन से जानती थी जिस दिन से पाकिस्तान ने अपना मिसाइल कार्यक्रम शुरू किया था."

विशेषज्ञों का मानना है कि 2011 में 60 किलोमीटर की दूरी तक हमला करने में सक्षम परमाणु क्षमता वाली नस्र मिसाइल का परीक्षण इस बात का इशारा था कि पाकिस्तान जंग में इस्तेमाल आने वाले छोटे परमाणु हथियार बना रहा है.

लाहौर में रहने वाले सुरक्षा मुद्दों के विशेषज्ञ हसन असकरी रिज़वी इस बात का अंदेशा जताते हैं कि पाकिस्तान ने इतने छोटे परमाणु हथियार भी बनाए हो सकते हैं जो एक ख़ास तरह की डिजाइन की गई बंदूक़ से चलाई जा सकें.

चिंता की बात

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हूडभॉय इस बात की ओर ध्यान दिलाते है कि जंग के मैदान में इस्तेमाल होने वाले यह छोटे परमाणु हथियार बड़े परमाणु हथियारों से ज्यादा ख़तरनाक हो सकते हैं.

इन्हें जंग के मैदान में कई जगहों पर रखा जा सकता है और निशाने के नज़दीक ले जाकर फायरिंग की जा सकती है.

पश्चिमी ताकतों के लिए चिंता की बात यह है कि पाकिस्तान ने 1998 से परमाणु संबंधित अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बावजूद ये परमाणु हथियार विकसित किए हैं.

माना जा रहा है कि पाकिस्तान ने यह परमाणु तकनीक चीन से हासिल की है.

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ऐसी संभावनाएँ है कि अमरीका पाकिस्तान को न्यूक्लियर सप्लायर ग्रूप की सदस्यता की पेशकश शोध और तकनीक के इस्तेमाल के मद्देनज़र दे सकता है और बदले में पाकिस्तान से परमाणु हथियारों और मिसाइल कार्यक्रम को नियंत्रित करने की मांग कर सकता है.

पाकिस्तान में जहां यह माना जाता है कि लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकारें सुरक्षा और विदेश नीति पर सेना के दबाव में रहती है. वहां इन संभावनाओं को इस चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है कि अमरीका परमाणु कार्यक्रमों पर नियंत्रण के लिए नवाज़ शरीफ पर दबाव बनाने की कोशिश करेगा.

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असकरी रिज़वी का मानना है कि पाकिस्तान के विदेश सचिव के बयान के पीछे दो कारण हो सकते हैं.

उनका कहना है, "एक तो यह लगता है कि वे पाकिस्तान की जनता के सामने यह सुनिश्चित करना चाह रहे हों कि परमाणु मुद्दे पर कोई 'न्रम रूख' नहीं अपनाया" जाएगा.

"दूसरा यह हो सकता है कि वे आधिकारिक रूप से भारत को यह संदेश देना चाह रहे हो कि कभी भी भारत ने पाकिस्तान में कोई गड़बड़ी फैलाने की कोशिश की तो भारत क्या उम्मीद कर सकता है."

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