अरबों फ़्लाइट्स को रास्ता दिखाने की ट्रेनिंग..

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हर साल आसमान में बेतहाशा बढ़ता ट्रैफ़िक बीते 40 साल के दौरान 10 गुना हो गया है. दुनिया भर की एयरलाइंस में यात्रा कर रहे सालाना तीन अरब यात्रियों की संख्या 2030 में बढ़कर छह अरब हो जाएगी.

ऐसे में हवाई जहाज़ों के यातायात पर नियंत्रण रखना और सुरक्षा सुनिश्चित करना बेहद चुनौतीपूर्ण है.

इस काम को एयर ट्रैफ़िक कंट्रोलर कैसे अंजाम देते हैं? सामने आ रही नई चुनौतियों का सामना करने के लिए नासा अगली जेनरेशन का एयर ट्रैफ़िक कंट्रोल सिस्टम तैयार कर रहा है.

नासा का सेंटर

साल की शुरुआत में अमरीका के मध्य पश्चिम और दक्षिण पूर्व इलाक़ों में तूफ़ानी हवाओं के चलते सैकड़ों उड़ानों को रद्द करना पड़ा था.

ऐसे में इन विमानों को बदले हुए कार्यक्रम के मुताबिक़ उड़ने की इजाज़त देना और हज़ारों लोगों को उनकी तय जगह तक पहुंचाने की व्यवस्था करना कोई आसान काम नहीं है.

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इसके लिए अत्याधुनिक तकनीक और प्रशिक्षित कंट्रोलर चाहिए होते हैं.

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कैलिफ़ोर्निया का नासा एम्स रिचर्स सेंटर ऐसा केंद्र है जहां एयर ट्रैफ़िक कंट्रोलर को ट्रेनिंग दी जाती है. यहां 360 डिग्री एयर ट्रैफ़िक कंट्रोल सिखाया जाता है.

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इस सेंटर में 12 विशाल प्रोजेक्टर के ज़रिए एयर ट्रैफ़िक कंट्रोल करने वालों को अलग अलग परिस्थितियों में ट्रेनिंग दी जाती है.

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सेंटर के चीफ़ इंजीनियर बिमल एपोंसो कहते हैं, "वास्तविक परिस्थितियों में ऐसी ट्रेनिंग देना संभव नहीं है, काफ़ी ख़र्चीला भी होगा. लेकिन हम यहां सिम्यूलेटर और कंप्यूटर ग्राफ़िक्स के ज़रिए विभिन्न परिस्थितियों में एयर ट्रैफ़िक कंट्रोल करने की ट्रेनिंग देते हैं."

अत्याधुनिक ट्रेनिंग

सेंटर की एक ख़ासियत ये भी है कि यहां साफ़ मौसम में, ख़राब मौसम में, एयर ट्रैफ़िक कंट्रोल करने के तरीक़े सिखाए जाते हैं. कंप्यूटर स्क्रीन पर मौसम की परिस्थितियों को ख़ुद से एडजस्ट किया जा सकता है.

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इसी सेंटर में बैठकर आप हीथ्रो इंटरनेशनल एयरपोर्ट या फिर शिकागो के एयरपोर्ट या फिर नई दिल्ली के एयरपोर्ट की स्थितियों को पैदा कर सकते हैं और उनके मुताबिक़ एयर ट्रैफ़िक कंट्रोल करना सीख सकते हैं.

इस सेंटर के वैज्ञानिक और इंजीनियर हवाई यातायात पर बढ़ रही भीड़ को देखते हुए अब अगले जेनरेशन के एयर ट्रैफ़िक सिस्टम को तैयार करने की योजना पर काम कर रहे हैं.

अंग्रेज़ी में मूल लेख यहां पढ़ें, जो बीबीसी फ़्यूचर पर उपलब्ध है.

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