इराक युद्ध की गलतियों पर माफी: ब्लेयर

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Image caption 2004 की इस तस्वीर में तत्कालीन ब्रितानी पीएम इराक़ में ब्रितानी सैनिकों के अड्डे पर दिख रहे हैं.

ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने 2003 में इराक़ युद्ध में शामिल होने के अपने फ़ैसले का बचाव किया है.

ब्लेयर ने युद्ध के बाद की रणनीति में हुई ख़ुफ़िया 'ग़लतियों' के लिए माफ़ी भी मांगी, लेकिन उन्होंने लड़ाई शुरू करने के अपने फैसले पर कोई अफसोस नहीं जताया है.

उन्होंने कहा कि युद्ध की वजह से तथाकथित इस्लामिक स्टेट का उदय हुआ ऐसे दावों में 'कुछ सच्चाई' है.

लेकिन उन्होंने कहा कि सद्दाम हुसैन को सत्ता से हटाने के लिए 'माफ़ी मांगना मुश्किल' है.

ब्लेयर ने कहा कि यदि ऐसा न होता तो इराक़ आज का सीरिया बन जाता.

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Image caption 2003 में इराक़ पर अमरीका और सहयोगी देशों ने हमला किया था और सद्दाम हुसैन का शासन ख़त्म कर दिया था.

अमरीकी टीवी चैनल सीएनएन से बात करते हुए ब्लेयर ने कहा कि यदि इराक़ में उनकी नीतियां नाकाम हुई हैं तो उसके बाद की नीतियां भी कामयाब नहीं हुई हैं.

उन्होंने कहा कि यदि इराक़ पर हमला नहीं किया जाता तो वहां गृह युद्ध छिड़ने का ख़तरा था.

उन्होंने कहा, "मैं इस बात के लिए माफ़ी मांगता हूँ कि जो ख़ुफ़िया जानकारियां हमें मिली थीं वो ग़लत थीं."

जब उनसे पूछा गया कि क्या इस्लामिक स्टेट के उदय की वजह इराक़ युद्ध था तो उन्होंने कहा कि इसमें कुछ तो सच्चाई है.

उन्होंने कहा कि 'ये नहीं कहा जा सकता कि हममे से जिन्होंने 2003 में सद्दाम को हटाया उनकी 2015 में जो रहा है उसके लिए कोई ज़िम्मेदारी नहीं है.'

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ब्रिटेन के इराक़ युद्ध में शामिल होने की जाँच कर रहे सर जॉन चिल्कॉट की जाँच रिपोर्ट जल्द ही सामने आ सकती है.

हालांकि इसके जारी होने की तारीख अभी तय नहीं की गई है.

छह साल पहले प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन ने ये जाँच शुरू करवाते हुए कहा था कि इसकी रिपोर्ट एक साल के भीतर आ जाएगी.

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