बीबीसी, आईएस, लैपटॉप और पुलिस

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बीबीसी के कार्यक्रम न्यूज़नाइट के संपादक इयान काट्ज़ ने बीबीसी के पत्रकार सिकंदर किरमानी के लैपटॉप को चरमपंथी क़ानून के तहत ज़ब्त किए जाने पर चिंता जताई है.

बीबीसी ने इस बात की पुष्टि की है कि सिकंदर किरमानी ने जज के आदेश के बाद अपना लैपटॉप पुलिस को सौंपा.

ब्रितानी पुलिस ने भी कहा है कि अगस्त में हुई सुनवाई के बाद लैपटॉप को जब्त किया गया था, जिसे वापस कर दिया गया है.

किरमानी और सीरिया में इस्लामिक स्टेट (आईएस) के चरमपंथी के रूप में अपनी पहचान बताते वाले एक व्यक्ति के बीच संदेशों के आदान-प्रदान के कारण यह कार्रवाई की गई.

ब्रिटेन में साल 2000 में लागू हुए आतंकवाद निरोधक क़ानून के तहत पुलिस को चरमपंथ से जुड़ी कार्रवाई की जांच के दौरान सूचनाओं को जब्त करने का क़ानूनी अधिकार है.

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काट्ज का कहना है कि पुलिस ने पत्रकार और उसके सूत्र के बीच हुए सूचनाओं के आदान-प्रदान को हासिल करने के लिए इस क़ानून का इस्तेमाल किया, यह आईएस की रिपोर्टिंग के दौरान परेशानी पैदा कर सकता है.

काट्ज ने कहा, "हालांकि हम पुलिस की किसी भी जांच में कोई बाधा नहीं पहुंचाएंगे. लेकिन हम चिंतित हैं कि पत्रकार और उसके सूत्रों के बीच हुई बातचीत को हासिल करने के लिए पुलिस द्वारा आतंकवाद क़ानून का इस्तेमाल पत्रकारों के लिए जनहित के इस गंभीर मुद्दे की रिपोर्टिंग में समस्या पैदा करेगा."

वहीं, टेम्स वैली पुलिस का कहना है कि जिस मामले की जांच अभी जारी है, इसलिए उस पर प्रतिक्रिया देना उचित नहीं होगा.

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पुलिस का कहना है, ''बीबीसी अगस्त में हुई सुनवाई में शामिल हुई थी और उसने हमारी अर्जी या अदालत के फ़ैसले का विरोध नहीं किया. पुलिस ने लैपटॉप को लौटा दिया है, जो कि अदालत के आदेश के बाद जब्त किया गया था.''

किरमानी पहले बीबीसी लंदन, चैनल 4 न्यूज़ और इस्लाम चैनल के लिए काम कर चुके हैं. वो पिछले साल ही न्यूज़नाइट के साथ जुड़े हैं.

करेंट अफेयर्स कार्यक्रम के लिए उन्होंने इस्लामिक स्टेट से जुड़े होने का दावा करने वाले बहुत से लोगों का इंटरव्यू लिया है. इनमें 18 साल का ऑस्ट्रेलियाई युवक जैक बिलार्दी भी शामिल है, जिसकी तस्वीर आईएस लड़ाकों के साथ पिछले साल दिसंबर में ऑनलाइन हुई थी.

बीबीसी के एक प्रवक्ता ने कहा, ''अपने संवाददाताओं की सूचनाओं और सामग्री की सुरक्षा के लिए बीबीसी जो भी कर सकती है, करती है और सिकंदर किरमानी मामले में विशेषज्ञों से क़ानूनी राय ली गई है.''

प्रवक्ता ने कहा, ''हमने अदालत में टेम्स वैली पुलिस की अर्जी का विरोध इसलिए नहीं किया, क्योंकि यह क़ानून कोई ऐसा आधार नहीं देता, जिससे इसका विरोध किया जा सके.''

प्रवक्ता ने कहा, ''यह बात बहुत परेशान करने वाली है कि यह क़ानून मीडिया को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बचाव का अवसर नहीं देता है.''

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