एक दंपत्ति, जिसके बच्चे 5 देशों के...

कार्ला आज़्देरियन इमेज कॉपीरइट Carla Azhderian

कैलिफ़ोर्निया में रहने वाली कार्ला आज़्देरियन के चार बच्चे हैं लेकिन 2006 में उन्होंने अपने परिवार को बढ़ाने की सोची.

तबसे लेकर अब अबतक उनके परिवार में कुल नौ बच्चे हैं. हाल ही में वो यूक्रेन में गोद लेने की प्रक्रिया पूरी करने गईं.

साल 2014 में वहां अशांति फैलने के बाद एक 11 साल के अनाथ बच्चे को बचाया गया था. वो इसी बच्चे को गोद लेना चाहती हैं.

इससे पहले वो चार अलग अलग देशों से बच्चों को गोद ले चुकी हैं.

उनका पहला विकल्प ग्वाटेमाला था क्योंकि यह नज़दीक था. लेकिन अमरीका ने यहां से गोद लेने पर पाबंदी लगा दी है. उन्होंने जिस लड़की को चुना था, वो प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही एक हिंसक घटना में मारी गई.

इमेज कॉपीरइट THINKSTOCK

इसके बाद उन्होंने इथोपिया का रुख किया और एक साल की एक बच्ची को गोद लिया. इसके बाद घाना की दो बहनों को और पोलैंड के एक 13 साल के बच्चे को गोद लिया.

फिर भी उन्हें लगा कि उनके घर में एक और सदस्य की जगह है तो उन्होंने यूक्रेन के एक और बच्चे को लाने का फैसला किया.

गोद लेने की तस्वीर का यह एक पहलू है, लेकिन दूसरा पहलू कुछ ज़्यादा चिंताजनक है, और वो है कुछ दशकों में दुनिया भर में अनाथ बच्चों को गोद लेने के मामलों में तेजी से कमी आई है.

द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद से गोद लेने के मामलों में लगातार वृद्धि होती रही है लेकिन पिछले दस सालों में दूसरे देश से अनाथ बच्चे गोद लेने के मामलों में भारी गिरावट आई है.

न्यूकैसल यूनिवर्सिटी के समाज विज्ञानी पीटर सेलमैन ने बीबीसी को बताया, “साल 2004 में गोद लेने के सर्वाधिक मामले आए और विशाल आबादी की वजह से चीन हमेशा ही मुख्य देश रहा है, लेकिन यहां भी ऐसे मामलों में दो तिहाई की कमी आई है.”

गोद लिए बच्चों के लिए नंबर एक जगह रहा है अमरीका. लेकिन यूएस स्टेट डिपार्टमेंट के मुताबिक़, अब यहां भी गोद लिए गए बच्चों के मामलों में 70 प्रतिशत की गिरावट आई है.

यूनीसेफ़ के अनुमान के मुताबिक पूरी दुनिया में बेघर बच्चों की तादाद एक करोड़ 30 लाख के क़रीब है जो बढ़ रही है.

द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद 1948 से 1969 के बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गोद लेने के कम से कम 50,000 मामले दर्ज हुए थे.

'अंडरस्टैंडिंग दि डिक्लाइन इन ट्रांसनेशनल एडॉप्शन चैनल्स' के लेखक और यूनिवर्सिटी ऑफ़ लोयोला शिकागो के जेड गैरी के अनुसार, “हथियारबंद संघर्ष के कारण बेल्जियन, पोलिश, जर्मन, ग्रीक और इटली के बच्चे प्रभावित हुए थे, इसलिए गोद लेने की पहली बाढ़ आई.”

दूसरी बढ़ोत्तरी तब देखी गई जब कोरियाई युद्ध में अमरीका सैनिकों और स्थानीय कोरियाई नागरिकों के बीच लड़ाई में बच्चे अनाथ हुए.

1990 के दशक में रूस (सोवियत संघ का टूटना) और चीन का दरवाजा खुला तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गोद लेने के मामलों में काफी बढ़ोत्तरी देखी गई.

लेकिन इस बीच चीन की वन चाइल्ड पॉलिसी के कारण यह प्रक्रिया उलटा असर दिखाने लगी.

न्यूकैसल यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट के मुताबिक़, गोद लेने के मामले 1995 में 23,000 से बढ़कर 2004 में 45,000 तक पहुंच गए थे.

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किसी अन्य देश के मुकाबले चीन से आज भी सबसे अधिक बच्चों को गोद लिया जाता है.

लेकिन गोद लेन के मामलों में गिरावट क्यों आई है?

ऐसा लगता है कि इसे प्रभावित करने वाले कई वजहें हैं, जैसे आर्थिक विकास और तस्करी.

ये डर कोई नया नहीं है. साल 1993 में इस मामले पर हेग संधि हुई थी लेकिन बच्चे देने वाले अधिकांश देशों ने इसे अभी तक मंजूर नहीं किया है.

अमरीकी क़ानूनविद डेविड स्मोलिन ने भारत से दो बच्चों को गोद लिया था और बाद में पता चला कि उनका अपहरण किया गया था. इसके बाद उन्होंने गोद लेने की प्रक्रिया के स्याह पहलू पर लिखा.

इसके अलावा कई देशों में यह प्रक्रिया इतनी जटिल है, जिसका असर गोद लेने के मामलों पर पड़ रहा है.

साल 2005 में चीन के हूनान प्रांत में छह अनाथ बच्चों की तस्करी करने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश हुआ.

इसका नतीजा ये हुआ कि विदेशी अभिभावकों के लिए क़ानून और कड़े कर दिए गए जैसे 50 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को गोद लेने, समलैंगिक महिलाओं या जो बहुत मोटे हैं उनपर प्रतिबंध लगा दिए गए.

यहां तक कि बच्चों को देने वाला दूसरा सबसे बड़े देश रूस में भी कमी आई है. अब ये यूथोपिया के बाद तीसरे नंबर पर है.

हाल ही में मॉस्को ने एक बिल पास कर अमरीकियों को अपने देश में गोद लेने से प्रतिबंधित कर दिया है.

देश में लड़ाई के कारण ग्वाटेमाला में भी अनाथ बच्चों की संख्या बहुत है, अमरीकी यहां के बच्चों को 2006 तक गोद लेते रहे हैं लेकिन तस्करी के इसमें बड़े पैमाने पर अनियमितता आने के बाद अमरीका ने इस पर रोक लगा दी.

इमेज कॉपीरइट GETTY IMAGES

इसके अलावा अमरीका ने घाना, भूटान, कम्बोडिया, नेपाल और किरगिजस्तान समेत कई देशों से गोद लेने को रोक दिया.

वियतनाम ने भी पहले विदेशी अभिभावकों के लिए दरवाजे बंद कर दिए थे लेकिन बाद में इजाजत दे दी. 2010 के भूकंप के बाद हैती ने भी अपनी नीतियों को कई बार बदला.

हालांकि अफ़्रीका में हाल के दिनों में उलटा ट्रेंड रहा है.

इमेज कॉपीरइट AFP

1995 के पहले इस महाद्वीप से शायद ही बच्चों को गोद लिया जाता था लेकिन यहां से मैडोना (मलावी से) और एंजेलिना जोली (कम्बोडिया, इथोपिया और नमीबिया से) जैसी शख़्सियतों के आगे आने से इसमें सुधार हुआ है.

2000 से 2009 के बीच इथोपिया से बाहर भेजे जाने वाले बच्चों के मामलों में 600 प्रतिशत की वृद्धि हुई.

गोद लेने के मामले यूगांडा और डेमोक्रेटिक रिपब्लिक कांगो में बहुत तेजी से बढ़े.

इमेज कॉपीरइट AFP

विशेषज्ञों का मानना है कि गोद लेने के मामलों में इसलिए भी गिरावट आई है क्योंकि अब बच्चों की उम्र अधिक होती है, पहले ये अपने क़ानूनी अभिभावकों के बच्चों से छोटे हुआ करते थे.

शिशु और छोटे बच्चों को अब अपने देश में ही छत मिल जाती है और गोद देना बड़े बच्चों, खास ज़रूरत वाले बच्चों को बेहतर मौके मुहैया कराने जैसा हो गया है.

सेल्मैन के मुताबिक़, ब्राजील और चिली जैसे लातिन अमरीकी देशों में केवल खास ज़रूरतों वाले और बड़े बच्चे ही गोद लेने के लिए उपलब्ध हैं. यही हाल पूर्वी यूरोप के देशों का है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार