फ़ोक्सवैगन कंपनी को भारत सरकार का नोटिस

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भारत ने कहा है कि वो जर्मन कार निर्माता कंपनी फ़ोक्सवैगन को नोटिस जारी करेगा क्योंकि उनकी कारों के कार्बन उत्सर्जन लेवेल की जांच में भारी कमियां पाई गईं हैं.

जांच एजेंसी एआईएआई ने कंपनी की डीज़ल मोडल जेटा, ऑक्टेविया, ऑडी ए4 और ऑडी ए6 की जांच में गड़बड़ी पाई.

भारतीय उद्योग मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव अंबुज शर्मा ने इसकी जानकारी देते हुए कहा, ''एआरएआई की जांच में लैब की तुलना में सड़क पर उत्सर्जन लेवेल में काफ़ी अंतर पाया गया है. हमलोग आज ही फ़ोक्सवैगन कंपनी को नोटिस जारी कर रहे हैं.''

अंबुज शर्मा के अनुसार कंपनी को नोटिस का जवाब देने के लिए 15 से 21 दिन का समय दिया जाएगा.

एआरएआई की निदेशक रश्मि उर्धवारेशे ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि फ़ोक्सवैगन कंपनी से जवाब आने के बाद ही अगली कार्रवाई के बारे में फ़ैसला किया जाएगा.

अमरीका और दूसरे कई देशों में फ़ोक्सवैगन कारों के उत्सर्जन स्कैंडल की बात सामने आने के बाद भारत सरकार ने भी भारत में फ़ोक्सवैगन कारों की जांच के आदेश दिए थे.

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अंबुज शर्मा के अनुसार अगर वो कुछ ग़लत करते हुए पाए गए तो कंपनी को आपराधिक जांच, जुर्माना और गाड़ियों की वापसी का सामना करना होगा.

इस बीच जर्मनी की कार निर्माता कंपनी फ़ोक्सवैगन ने कहा है कि उत्सर्जन स्कैंडल की बात सामने आने पर शुरू की गई आंतरिक जांच में कंपनी की 8 लाख से ज़्यादा गाड़ियों में ख़ामी पाई गई है.

फ़ोक्सवैगन ने अनुमान लगाया है कि इन गाड़ियों को वापस मंगाने और उन्हें ठीक करने की कुल लागत क़रीब दो अरब यूरो ख़र्च हो सकती है.

सितंबर में फ़ोक्सवैगन के शेयर की क़ीमतों में भारी गिरावट देखी गई थी जब कंपनी ने यह स्वीकार किया था कि दुनिया भर में कंपनी के क़रीब 1.1 करोड़ कारों में प्रदूषण स्तर को कम करके दिखाने वाला सॉफ़्टवेयर लगा है.

सोमवार को फ़ोक्सवैगन ने अमरीकी नियामक के उन दावों को ख़ारिज किया कि कंपनी के कुछ कुछ लक्ज़री ब्रांडों में भी प्रदूषण स्तर की जांच को धोखा देने वाला सॉफ़्टवेयर लगा है.

अमरीकी पर्यावरण सुरक्षा एजेंसी (ईपीए) ने कहा था कि छह सिलिंडर और तीन लीटर इंजन वाली कम से कम 10 हज़ार गाड़ियों में ख़ामी है जिनमें पोर्शे और ऑडी जैसी गाड़ियां भी शामिल हैं.

ईपीए ने हाल में यह कहा था कि फ़ोक्सवैगन की गाड़ियां ग़लत उत्सर्जन आंकड़े देती हैं.

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