भारत ने संयुक्त राष्ट्र में उठाया नेपाल मामला

  • 5 नवंबर 2015
यूएनएचआरसी

अंतरराष्ट्रीय पटल पर पहली बार भारत ने नेपाल मुद्दा उठाया है. संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार संगठन में भारत ने नेपाल में बढ़ती हिंसा, राजनीतिक अस्थिरता और बढ़ते भेदभाव की शिकायत की है.

जेनेवा में चल रहे यूएनएचआरसी की स्पेशल बैठक में भारत के प्रतिनिधि बी एन रेड्डी ने कहा, "अप्रैल 2015 में आए विनाशकारी भूकंप के बाद अब नेपाल के लोगों को एक और बड़े संघर्ष से गुज़रना पड़ रहा है."

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"नेपाल में राजनीतिक बदलाव और बढ़ती हिंसा से लोगों को दो-चार होना पड़ रहा है. सितंबर में आए नए संविधान के बाद से तो हालात और बदतर हुए हैं."

भारत ने नेपाल सरकार से आग्रह किया है कि वह हिंसा के मामलों की जांच करें और दोबारा ऐसी घटनाएं न हों, ये सुनिश्चित करे.

नए संविधान के विरोध में हुई हिंसा से अब तक 45 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि हज़ारों लोग घायल हुए हैं. भारत इस मामले में नेपाल की ओर से कोई राजनीतिक कदम नहीं उठाए जाने से परेशान है.

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इस बीच मधेसी विरोध के बाद भारत-नेपाल सीमा पर ट्रकों की आवाजाही बंद होने के लिए नेपाली उप-प्रधानमंत्री कमल थापा ने भारत पर बाधा पहुंचाने का आरोप लगाया है.

भारत ने नेपाल को इसके लिए ज़िम्मदार ठहराया है. थापा के मुताबिक सामान की आवाजाही रोकना बर्दाश्त नहीं की जा सकती है. साथ ही उन्होंने पूछा कि क्या नेपाल को अपना संविधान अपने मुताबिक लिखने को अधिकार नहीं है.

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