सोमाली समुद्री डाकुओं को भी भाता है बॉलीवुड

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भारत-अफ़्रीका फ़ोरम का सम्मेलन हाल ही में दिल्ली में हुआ, जहां व्यापार और निवेश एजेंडे में सबसे ऊपर थे.

हालांकि इस बात से बहुत कम लोग वाक़िफ़ होंगे कि राजस्थान से लगभग दोगुने आकार वाले अफ़्रीकी देश सोमालिया में बॉलीवुड की फ़िल्मों की काफ़ी डिमांड रहती है.

‘अफ़्रीकी क्षेत्र का सींग’ कहे जाने वाले इस देश में भारतीय फ़िल्में बहुत लोकप्रिय हैं और जिन भी घरों में टीवी है वो कम से कम एक ऐसा भारतीय चैनल ज़रूर सब्सक्राइब कराते हैं, जो बॉलीवुड फ़िल्में प्रसारित करते हैं.

इन फ़िल्मों की लोकप्रियता केवल सोमालिया में ही नहीं बल्कि पड़ोसी देश कीनिया और इथोपिया में रहने वाले सोमालियों के बीच भी उतनी ही है.

साल 2011 में भारतीय नेवी द्वारा पकड़े गए सोमाली समुद्री डाकुओं में से एक का बयान भी बॉलीवुड के प्रति प्रेम को उजागर करता है.

उस समय एनडीटीवी ने एक समुद्री डाकू के हवाले से कहा था, “मैं इंडिया और बॉलीवुड को प्यार करता हूँ. मैंने टेलीविज़न में इंडिया को देखा है और तभी से मैं इसे प्यार करने लगा हूँ. मैं हर भारतीय शहर को देखना चाहता हूँ.”

इन डाकुओं के पास से हथियारों के अलावा जो कुछ बरामद हुआ उनमें बॉलीवुड फ़िल्मों की डीवीडी भी थीं.

लंदन के यूनिवर्सल टीवी जैसे लोकप्रिय सोमाली टीवी चैनल अक्सर भारतीय धारावाहिकों का प्रसारण करते हैं जैसे ‘क़सम से’, ‘क़ुबूल है’.

इन फ़िल्मों की डबिंग सोमाली में की जाती है इसलिए दर्शकों को कहानी समझने में दिक्कत नहीं आती.

सोमाली दर्शकों को लक्ष्य करते हुए इलाक़े के सिनेमा हॉल और मूवी स्टोर विशेष रूप से भारतीय फ़िल्में दिखाते हैं या बेचते हैं.

इन फ़िल्मों की लोकप्रियता ने सोमालियों के बीच फ़िल्मी गानों को भी लोकप्रिय बनाया है. इस तरह के गाने अक्सर यहां घर पर या किसी शादी ब्याह के मौके पर बजाए जाते हैं.

देश में चरमपंथी इस्लामी ग्रुप अल शबाब के उदय के पहले ऊत्तर पूर्व में कीनिया की सीमा से लगे मांदेरा क़स्बे के नौजवान सोमालिया के बूलो हावो में हिंदी फ़िल्में देखने के लिए सीमा पार कर जाते थे.

असल में मुसलमान मौलवियों और स्थानीय प्रशासन ने सिनेमा हालों पर प्रतिबंध लगा दिया था क्योंकि उन्हें लगता था कि स्कूली बच्चे पढ़ाई छोड़ कर फ़िल्में देखते हैं.

अल शबाब के क़ब्जे वाले इलाक़े में सिनेमाहॉल बंद पड़े हुए हैं क्योंकि अलक़ायदा से जुड़ा यह संगठन पॉप संस्कृति को ग़ैर इस्लामी मानता है.

साल 2006 में यूनियन ऑफ़ इस्लामिक कोर्ट्स के रूप में जब अल शबाब का उभार हो रहा था तो उसने अपने कब्ज़े वाले मध्य और दक्षिणी सोमालिया में कई लोगों को सार्वजनिक रूप से भारतीय फ़िल्में देखते हुए गिरफ़्तार किया था.

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पिछले साल अल शबाब ने अपने क़ब्ज़े वाले इलाके में स्मार्ट फ़ोन के इस्तेमाल और बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया था. इसके पीछे एक कारण लोगों को फ़िल्में और गाने डाउनलोड कर देखने से रोकना भी था.

सोमाली लोग बॉलीवुड गॉसिप पढ़ने के लिए अब वेबसाइटों और ब्लॉगों की ओर रुख़ कर रहे हैं. भारतीय फ़िल्मों के बारे में ख़बरें और सूचनाएं देने वाली कुछ लोकप्रिय वेबसाइटों में नीदरलैंड्स की फ़गारे डॉट कॉम और रासिये डॉट कॉम शुमार हैं.

कुछ साल पहले सोमालीनेट फ़ोरम पर एक बहस चलाई गई थी कि क्या सोमाली महिलाओं को भारतीय फ़िल्में देखनी देनी चाहिए.

आलोचकों का कहना था कि इन्हें देखकर वो भी अपने पति से वैसा ही बर्ताव करने की मांग करने लगेंगी जैसा बॉलीवुड के हीरो फ़िल्मों में अपनी पार्टनर के साथ करते हैं.

यहां छात्रों में बॉलीवुड का असर देखा जा सकता है. लड़कियों को काजोल और प्रियंका जैसे नाम भी दिए जाते हैं जबकि कई लड़कों के नाम करन और अर्जुन मिल जाते हैं.

सोमाली लोगों के बीच शाहरुख़ ख़ान, अक्षय कुमार और सलमान ख़ान सबसे लोकप्रिय भारतीय अभिनेता हैं.

लेकिन यहां हर एक्टर का ज़िक्र उसके असली नाम से नहीं किया जाता है. उदाहरण के लिए अक्षय कुमार का ज़िक्र राज सिप्पी द्वारा 1992 में निर्देशित फ़िल्म 'मिस्टर बॉन्ड' के क़िरदार के नाम से किया जाता है.

अमिताभ बच्चन यहां ‘अली धीर’ यानी 'लंबा अली' के नाम से मशहूर हैं क्योंकि बच्चन नाम का उच्चारण थोड़ा कठिन है और अली एक लोकप्रिय सोमाली नाम है.

हॉलीवुड और नाइजीरिया के नॉलीवुड से अलग भारतीय फ़िल्में यहां इसलिए लोकप्रिय हैं क्योंकि भारतीयों और सोमालियों की संस्कृतियों में काफ़ी समानता है.

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अधिकांश कहानियों की पटकथा प्रेम, पारिवारिक रिश्ते और पारिवारिक शादी के इर्द गिर्द घूमते हैं, जो सोमाली दर्शकों को अपनी ओर खींचते हैं.

भारतीय महिलाओं का पहनावा साड़ी, सोमाली गरबा सार से काफी मिलता जुलता है. दोनों ही समाजों में महिलाएं सार्वजनिक रूप से किस नहीं करतीं.

इसी तरह संयुक्त परिवार भी एक ऐसी चीज है जिसे सोमाली थोड़ा अपने क़रीब पाते हैं.

हालांकि बॉलीवुड लोकप्रियता के बावजूद कुछ ही भारतीय, हिंद महासागार के दो छोरों पर रहने वाले इन दोनों समाजों के बीच सांस्कृतिक समानता से परिचित हैं.

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