'मेड इन चाइना,' नया लग्ज़री लेबल?

इमेज कॉपीरइट Getty

चीन के अमीर उपभोक्ता हाल फिलहाल तक लग्ज़री उत्पादों के लिए पश्चिमी देशों पर निर्भर थे. लेकिन अब ये बदल रहा है.

इसकी वजह हैं चीन में ही बन रहे लग्ज़री उत्पाद. चीन के लोगों की जरूरत और मिज़ाज को ध्यान में रख कर बने ये उत्पाद धीरे धीरे दुनिया में अपनी जगह बना रहे हैं.

चीन के सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 2010 में चीन में कॉस्मेटिक का बाज़ार 89 अरब युआन का था जो 2013 में बढ़कर 162.5 अरब युआन (26.5 अरब डॉलर) का हो गया है.

प्रॉक्टर एंड गैंबल और लॉरियल जैसे ब्रांड अभी भी इस बाज़ार पर काबिज हैं लेकिन हर साल स्थानीय उत्पादों के सामने इनकी हिस्सेदारी कम होती जा रही है.

आर्थिक जगत के रुझान बताने वाली अंतरराष्ट्रीय कंपनी बेन एंड को की लग्ज़री रिपोर्ट के मुताबिक ब्रांडेड उत्पादों में रुझान रखने वाले चीनी लोगों में चीनी उत्पादों के प्रति झुकाव बढ़ रहा है.

इस रिपोर्ट के लिए हुए सर्वे में 44 फ़ीसदी लोगों ने कहा है कि वे अगले तीन सालों में चीन ब्रांड का सामान इस्तेमाल करना चाहेंगे.

हालांकि ऐसे उत्पादों की बाज़ार में हिस्सेदारी अभी कम है, लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक 'मेड इन चाइना' नए लग्ज़री लेबल के तौर नया ट्रेंड बना रहा है.

चीनी अमीर लोगों के वॉडरोब में लुई वितां और गूची जैसे मल्टीनेशनल ब्रांड के कपड़े मिलेंगे लेकिन चीन में बन रहे 'उमा वैंग' और 'माशा मा' के कपड़ों की बिक्री भी बढ़ी है.

नए ट्रेंड के कारण क्या हैं?

  • पसंद में बदलाव: पहला बदलाव तो है कि अमीर चीनी उपभोक्ताओं की पसंद में बदलाव आया है.
    इमेज कॉपीरइट Getty
  • ग्लोबल स्तर की गुणवत्ता: दूसरी अहम बात ये हुई है कि चीनी उत्पादों की गुणवत्ता का स्तर भी बढ़ा है. चीनी निर्माताओं ने मेड इन चाइना के सस्ते और कम टिकाऊ उत्पादों की जगह ग्लोबल स्तर की गुणवत्ता वाले उत्पाद बनाने शुरू किए हैं.
  • चाइनीज़ ड्रीम और राष्ट्रवाद: इसके अलावा राष्ट्रपति शी जिनपिंग के चाइनीज़ ड्रीम के कल्पना को लोगों का साथ मिला है.

चीनी होने का गर्व

पेरिस फैशन एंड डिज़ाइन स्कूल आईएफए के शंघाई ब्रांच के अकादमिक डायरेक्टर ज्यां बेपटिस्ट अंद्रियानी कहते हैं, "चीनी ब्रांड अब अपनी पारंपरिक छवि से मुक्त हो रहे हैं."

द हरबोरिस्ट, ये मिंगज़ी, बाओ बाओ वैन जैसे ब्रांड चीन के अलावा दुनिया भर के बाज़ारों में जगह बना रहे हैं.

कंसल्टिंग फर्म चाइना मार्केट रिसर्च ग्रुप के संस्थापक और द एंड ऑफ़ कापीकैट चाइना के लेखक शॉन रीन कहते हैं, "पहले लोगों में चीनी उत्पाद को लेकर एक शर्म का भाव देखा जाता था, अब वैसा नहीं रहा है. चीनी ब्रांड के लिए ये उपयुक्त समय है. लोग चीनी जीवनशैली से प्रभावित होना चाहते हैं."

उदहारण के लिए चीन की उत्कृष्ट फ़ैशन डिज़ाइनर गू पे के नए संग्रह को देखिए. पिछले दशक तक उनके कपड़ों से यूरोपीय झलक मिलती थी लेकिन अब उनके लाल रंगों के डिज़ाइन से चीनी झलक मिलती है.

रेड कारपेट इवेंट्स के लिए स्थानीय वीवीआईपी लोगों के लिए कपड़े तैयार करने वाली पे मानती हैं कि 2008 से ये बदलाव शुरू हुआ. वे कहती हैं, "तब मुझे चीनी होने पर गर्व महसूस हुआ था."

'विदेशी ब्रांड गोरों के लिए'

शुरुआती कामयाबी के बाद भी नए लग्ज़री ब्रांड के लिए चुनौतियां कायम हैं. ये लग्ज़री ब्रांड अब तक चीनी उपभोक्ताओं के पहले 10 पसंदीदा ब्रांड में शामिल नहीं हो पाए हैं और चीन के बाहर इन ब्रांडों को बहुत लोग जानते भी नहीं. इसके अलावा ये बाज़ार में मौजूद दूसरे ब्रांड के तुलना में महंगे भी हैं.

इमेज कॉपीरइट Getty

लेकिन बीते कुछ समय से चीन के देसी लग्ज़री ब्रांड का उत्पादन काफी बढ़ा है.

चाइना मार्केट रिसर्च समूह के शॉन रीन कहते हैं, "चीनी महिलाएं विदेशी ब्रांड को ज़्यादा पसंद नहीं करती हैं, वे उसे गोरे लोगों के लिए उपयुक्त मानती हैं."

इसके अलावा चीनी उपभोक्ताओं को अपने उत्पादों के ब्रांड बदलने में भी कोई हिचक नहीं होती. वे अलग अलग मौसम में अलग ब्रांड के उत्पादों का इस्तेमाल करती हैं. रीन कहते हैं, "चीनी कॉस्मेटिक ब्रांड खुद को एशियाई चेहरों के लिए उपयुक्त बताते हैं. इस सेगमेंट में और भी चीनी ब्रांड आएंगे."

परंपरागत डिज़ाइन पर भरोसा

ऐसा ही एक ब्रांड द हरबोरिस्ट भी है. इस महंगे कास्मेटिक ब्रांड की शुरुआत शंघाई की बड़ी फार्मेसी कंपनी जाहवा ने 1998 में की थी.

2007 में कंपनी ने विदेशों में भी शाखाएं खोली. दुनिया भर के एशियाई उपभोक्ताओं को टारगेट करके कंपनी परंपरागत चीनी हर्ब और दवाओं से अपने उत्पाद तैयार करते हैं.

इमेज कॉपीरइट Getty

इस ब्रांड की दुकान पेरिस के एवेन्यू द ओपेरा में भी स्थित है. इस ब्रांड का सबसे मशहूर उत्पाद ताई चाई मास्क है जो 55 यूरो (करीब 4000 रुपये) में मिलता है. इसकी कामयाबी के बाद जाहवा ने 2010 में शंघाई वाइव के नाम से अपने ब्रांड ने रीलांच किया.

इसके उत्पाद खासे अमीर और संपन्न लोगों के लिए हैं. इसकी 50 मिलीलीटर की परफ्यूम की कीमत 890 युआन (143 डॉलर यानी, 9000 रुपये) है.

जाहवा के रिसर्च एंड डेवलपमेट विंग के प्रमुख सुन पेइवेन ने रीलाँच के वक्त मीडिया से कहा, "चीनी कंपनी होने के नाते हैं, हमें परंपरागत चीनी दवाईओं की कहीं बेहतर समझ है."

इसके अलावा ब्रांड न्यू चाइना भी बाज़ार में तेजी से जगह बना रहा है. इसने अपना पहला स्टोर चीन के बीजिंग फैशन बाज़ार वाले इलाके सैनलिटुन में खोला है. यह अंतरराष्ट्रीय उत्पाद शेनेल और अरमानी के स्टोर से थोड़ी ही दूरी पर स्थित है.

पश्चिम की नकल नहीं

बड़े बड़े लोगों के अलावा 200 वर्ग मीटर में फैली ये दुकान प्रिंटेड सिल्क, स्टाइलिश कपड़े, जूतों और हैंड बैग (मैंडरिन पेंटिंग) भरे हुए हैं. सबमें एक बात ख़ास है- इन्हें देखकर चीनी स्टाइल का भाव महसूस होता है.

इमेज कॉपीरइट AP

फ़ैशन की दुनिया में पुख़्ता जगह नहीं बनी हो लेकिन चीनी-इंटरनेशनल ब्रांडों के संयुक्त उपक्रम मसलन मिंगजी, बाओ बाओ वान के उत्पाद बाज़ार में तेजी से जगह बना रहे हैं.

चीन का लाइफस्टाइल ब्रांड शंघाई टैंग के सीईओ राफहल ले मासने डि शेरमोंट ने कहा, "हम पश्चिमी सभ्यता की नकल करने की कोशिश नहीं कर रहे हैं. हम उपभोक्ताओं को उनकी पसंद का सामान देना चाहते हैं. एक विकल्प देना चाहते हैं."

अंग्रेज़ी में मूल लेख यहाँ पढ़ें, जो बीबीसी कैपिटल पर उपलब्ध है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार