आतंकवाद से निपटने के लिए साथ आना होगा: मोदी

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भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रितानी संसद को संबोधित करते हुए कहा कि उनका ब्रिटेन दौरा दोनों देशों के बीच आपसी सहयोग बढ़ाने के लिए एक बड़ा अवसर है.

मोदी भारत के पहले प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने ब्रिटेन की संसद को संबोधित किया है.

उन्होंने कहा कि इस समय ज़रूरत इस बात की है कि दोनों देश दुनिया में वैश्विक भागीदारी की एक मिसाल बनें.

मोदी और ब्रितानी प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने कहा कि दोनों देशों की कंपनियों ने नौ अरब पाउंड यानी लगभग नौ सौ अरब रूपए के समझौते करने की घोषणा की है.

तीन दिनों के ब्रितानी दौरे पर गए मोदी ने कहा कि भारत और ब्रिटेन का रिश्ता बहुत महत्वपूर्ण है.

मोदी ने कहा कि भारत ब्रिटेन को यूरोपीय संघ का प्रवेश द्वार समझता है.

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दोनों नेताओं ने कहा कि वित्त, रक्षा, परमाणु ऊर्जा और जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर दोनों देशों के बीच आपसी सहयोग बढ़ेगा.

मोदी ने कहा कि भारत दुनिया के लिए आशा और अवसर का एक नया चमकता बिंदु है. उन्होंने कहा कि इसका कारण सिर्फ़ संख्या नहीं है बल्कि क़ानून, नीति, संस्थाओं और कार्यशैली में सुधार के लिए उठाए गए ठोस क़दम हैं.

मोदी ने कहा कि उनकी सरकार का नारा 'सबका साथ सबका विकास' पूरे राष्ट्र का एक सपना है जिसमें हर नागरिक के लिए भागीदारी और समृद्धि शामिल है.

आतंकवाद और चरमपंथ को एक वैश्विक ताक़त बताते हुए मोदी ने कहा कि इस चुनौती से निपटने के लिए दुनिया को एक साथ मिलकर काम करना होगा.

मोदी ने कहा कि जिन देशों में आतंकवाद की समस्या सबसे ज़्यादा है वहां इसके ख़िलाफ़ एक सामाजिक आंदोलन शुरू करने की ज़रूरत है और धर्म और आतंकवाद को एक दूसरे से अलग करना चाहिए.

मोदी ने कहा कि भारत और ब्रिटेन की संस्कृतियों में काफ़ी समानता है.

उनका कहना था, ''हम लॉर्ड्स और ईडन गार्डंस की पिचों को लेकर बहस करते हैं. हमें लंदन का भांगड़ा रैप ख़ूब भाता है, जैसे आपको भारत के अंग्रेज़ी नॉवेल पसंद हैं. भारत में हर युवा फ़ुटबॉलर (बेंड इट लाइक बेकहम) बेकहम जैसा बनना चाहता है.''

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संसद के बाहर लगी महात्मा गांधी की मूर्ति के बारे में पूछे गए एक सवाल का हवाला देते हुए मोदी ने कहा कि ब्रिटेन के लोग इतने समझदार थे कि वे महात्मा गांधी की महानता को समझते हैं और भारतीय इतने उदार हैं कि वो गांधी की विरासत को ब्रिटेन के साथ साझा करने के लिए तैयार हैं.

हालांकि संसद के बाहर सैकड़ों लोगों ने मोदी के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया और नारे लगाए. इन लोगों में भारतीय समुदाय के भी कई लोग थे जिनका आरोप है कि मोदी सरकार भारत में अल्पसंख्यकों के साथ ठीक बर्ताव नहीं कर रही है.

प्रदर्शनकारियों में नेपाली लोग भी थे जिनका आरोप था कि भारत सरकार नेपाल में राजनीतिक बदलाव के लिए दबाव बनाने की कोशिश कर रही है.

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