तस्वीरों मेेंः स्वात, चेचेन्या व ग़ज़ा का जनजीवन

कार्मिनेक अवार्ड

कार्मिनेक फ़ोटोजर्नलिज़्म अवार्ड जीतने वाले छह फ़ोटोग्राफ़रों की तस्वीरों की एक प्रदर्शनी लंदन में शुरू हो रही है.

इन तस्वीरों में मुगाबे के नेतृत्व में ज़िम्बाब्वे, चेचेन गणराज्य और ग़ज़ा में लोगों की ज़िंदगी और ईरान के मध्यवर्ग की तस्वीरें हैं.

कार्मिनेक फ़ाउंडेशन ने साल 2009 में कार्मिनेक फ़ोटोजर्नलिज़्म अवार्ड की शुरुआत की थी. अवार्ड का उद्देश्य फ़ोटो पत्रकारिता और नए फ़ोटोग्राफ़रों को प्रोत्साहित करना है.

फ़ाउंडेनशन की ओर से पहली आर्थिक सहायता काई वीडेनहोफ़र को ग़ज़ा जाने के लिए मिली. संघर्ष के केंद्र रहे ग़ज़ा में अक्सर ही मानवाधिकार उल्लंघन और अभिव्यक्ति की आज़ादी के मामले उठते रहते हैं.

इमेज कॉपीरइट Massimo Berruti

सम्मान पाने वाले दूसरे फ़ोटोग्राफ़र हैं पाकिस्तान के मासिमो बेरुती. उन्होंने स्वात घाटी में लंबे समय तक काम किया और लश्कर की रोज़मर्रा की ज़िंदगी से जुड़े हलचल को कैमरे में क़ैद किया.

क़बीलाई लड़ाकों का संगठन लश्कर खुद को तालिबान के ख़िलाफ़ पहले मोर्चे पर देखता है.

इस तस्वीर में लश्कर के सदस्य एक क़बीलाई बुज़ुर्ग अहमद ख़ान के घर में रात की गश्त की तैयारी कर रहे हैं. अहमद ख़ान की तस्वीर दीवार पर दिख रही है.

तीसरे पत्रकार हैं रोबिन हैमंड. उन्होंने साल 2011 में ये देखने के लिए ज़िम्बाब्वे का दौरा किया कि मुगाबे के नेतृत्व में वहां का जन जीवन कैसा है.

हैमंड लिखते हैं, “ऑपरेशन मुराम्बाट्सविना के दौरान बुलावायो में सैकड़ों लोग बेघर हो गये थे. उन्हें ऐसी जगह विस्थापित किया गया जहां पानी और बिजली की सुविधा भी नहीं थी. यह अस्थायी व्यवस्था थी लेकिन सात साल बाद भी वे वहीं पर थे. भारी गंदगी और भीड़-भाड़ से भरी यहां की इमारतें राजनीतिक हिंसा का केंद्र बन गईं.”

डेविड मोंटीलियोन कार्मिनेक फ़ोटोजर्नलिज़्म अवार्ड जीतने वाले चौथे फ़ोटोग्राफ़र हैं. उन्होंने चेचेन्या में काम किया.

चेचेन्या में उन्होंने दक्षिणी रशियन रिपब्लिक ऑफ़ चेचेन्या के आम लोगों के जीवन पर केंद्रित इतालवी प्रोजेक्ट 'स्पैसिबो' में सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक हालात को तस्वीरों में उतारा.

इस तस्वीर में “14 साल की राडा बस में अपनी बहन की बनाई एक शादी वाली ड्रेस को पहन कर देख रही है. वहां चेचेन प्रत्यर्पण पर बनी एक फ़िल्म की शूटिंग का रिहर्सल चल रहा था.”

ईरानी फ़ोटजर्नलिस्ट और पांचवें कार्मिनेक पुरस्कार विजेता नेवशा तावाकोलियन का काम ईरान में मध्यवर्ग के युवाओं पर केंद्रित है.

नेवशा को मध्यवर्ग के उन युवाओं ने आकर्षित किया जो तेजी से आधुनिक होते समाज और क्रांतिकारी इस्लामिक विचारधारा के बीच सामंजस्य बैठाने की कोशिश कर रहे हैं.

तावाकोलियन के फ़ोटोग्राफ़ दिसम्बर 2013 से अप्रैल 2014 के बीच खींचे गए हैं. सुरक्षा कारणों से उनकी पहचान गोपनीय रखी गई है.

इस साल का पुरस्कार क्रिस्टोफ़ी जिन को दिया गया है जिन्होंने गियाना के भूक्षेत्र को जानने-समझने के लिए पांच महीने गुजारे.

कार्मिनेक फ़ाउंडेशन के मुताबिक़, “उनकी फ़ोटोग्राफ़ी विरोधाभासों से भरी धरती पर जीवन की वास्तविकता दिखाती है. यह मुख्यधारा के प्रेस में आने वाले कैरिकेचर से काफ़ी अलग है.”

‘कार्मिनेक फ़ोटोजर्नलिज़्म अवार्डः ए रेट्रोस्पेक्टिव’ लंदन में साची गैलेरी में 18 नवंबर से 13 दिसम्बर 2015 के बीच दिखाई जा रही है.

(सभी तस्वीरें संबंधित फ़ोटोग्राफ़रों के सौजन्य से)

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