यूरोप अब और शरणार्थियों को नहीं ले सकता

  • 25 नवंबर 2015
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फ्रांस के प्रधानमंत्री ने कहा है कि यूरोपीय देश अब और शरणार्थियों को अपने देश में आने की इजाज़त नहीं दे सकते.

जर्मनी के सबसे बड़े अख़बार ज़्यूड दॉएचे त्साइटुंग ने प्रधानमंत्री मैनुअल वाल्स के हवाले से कहा है कि यूरोपीय संघ की सीमा पर सख़्त पहरेदारी की जाएगी.

पेरिस में 13 नवंबर को हुए हमले के बाद यूरोप का सीमा नियंत्रण नए सिरे से जांच के दायरे में आ गए हैं.

यूरोपीय आयोग के प्रमुख ज्यां-क्लाड जंकर ने कहा कि शेनेगन समझौता "आशिंक रूप से निष्क्रिय" समझौता है.

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यूरोपीय संघ के कई देशों ने पासपोर्ट-मुक्त आवाजाही की शेनेगन व्यवस्था के बावजूद हाल के कुछ हफ़्तों में अपनी सीमाओं पर पाबंदी लगा दी है. इस बीच सीरिया और इराक़ से लाखों की संख्या में शरणार्थियों का आना जारी है.

पेरिस पर इस्लामिक स्टेट के हमले में शामिल आत्मघाती हमलावरों में से एक के मृत शरीर के पास जाली सीरियाई पासपोर्ट पाए जाने के बाद कुछ देशों ने नए प्रतिबंध लगाए हैं.

प्रधानमंत्री वाल्स ने ज्यूड दॉएचे त्साइटिंग को बताया कि यूरोप ने अपनी ताक़त प्रवासी संकट के कारण पहले ही सीमा से कहीं अधिक बढ़ा रखी है.

वे कहते हैं, "अब हम और शरणार्थियों को यूरोप में जगह नहीं दे सकते. ये संभव नहीं है." साथ ही में उन्होंने ये भी कहा कि यूरोप की बाहरी सीमाओं पर सख़्त नियंत्रण की ज़रूरत है.

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इस बीच समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक़ जर्मन चांसलर एंगेला मर्केल ने कोटा के आधार पर शरण चाहने वालों को फिर से वितरित किए जाने के विवादास्पद योजना के महत्व पर बल दिया है.

मर्केल का कहना है कि शेनेगन समझौते का भविष्य स्थानांतरण योजना से तय होगा.

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