आईएस का अगला निशाना ताइवान?

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ताइवान आमतौर पर अंतरराष्ट्रीय मान्यता के लिए तरसता रहता है, पर कथित तौर पर इस्लामिक स्टेट की ओर से जारी एक वीडियो में ताइवान को चरमपंथी समूह के ख़िलाफ़ अमरीकी गठबंधन का सदस्य माना गया है.

इससे ताइवान पर इस्लामिक स्टेट के हमले का डर बढ़ गया है.

जबसे संयुक्त राष्ट्र ने रिपब्लिक ऑफ चाइना (ताइवान का आधिकारिक नाम) की जगह पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ़ चाइना को 1971 में मान्यता दी, तब से ताइवान के लोग ख़ुद को उपेक्षित और खारिज महसूस करते हैं.

चीन अभी भी ताइवान को अपना हिस्सा मानता है जिसका एक दिन चीन की मुख्य भूमि में विलय होना है. ताइवान संयुक्त राष्ट्र का सदस्य नहीं और उसे एक देश के रूप में मान्यता प्राप्त नहीं है.

सिर्फ़ दो दर्जन छोटे और ग़रीब देश उसकी मदद करते हैं.

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मगर इस हफ़्ते उसे जैसी मान्यता मिली है, वैसी मान्यता वह नहीं चाहता.

रिपोर्ट के मुताबिक़ इस्लामिक स्टेट के वीडियो में ताइवान के झंडे को चरमपंथी समूह के ख़िलाफ़ अमरीकी नेतृत्व वाले गठबंधन के 65 सदस्यों में से 60 सदस्यों के झंडों के साथ सूचीबद्ध किया गया है.

वीडियो में एक शख्स गठबंधन के सदस्य देशों को धमकी देते दिख रहा है.

अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने 22 नवंबर को कुआलालंपुर में आसियान बैठक के दौरान ताइवान का नाम एशिया प्रशांत क्षेत्र में इस्लामिक स्टेट के ख़िलाफ़ गठबंधन के सदस्य के रूप में लिया था.

यह वीडियो इस बयान के बाद आया है.

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ताइवान सरकार ने तुरंत कहा था कि ताइवान सीरियाई शरणार्थी कैंप में सिर्फ़ पूर्वनिर्मित घर और तंबू जैसी मानवीय सहायता दे रहा है. किसी भी तरह की फ़ौजी सहायता नहीं दी है.

मगर इससे ताइवान पर चरमपंथी हमले का डर ख़त्म नहीं हो सका.

ताइवान सरकार ने बंदरगाहों पर सुरक्षा व्यवस्था चौकस कर दी है. राष्ट्रपति मा यिंग-जीओ ने लोगों को घबराने से मना किया है.

इससे पहले इस साल इस्लामिक स्टेट से जुड़े ट्विटर अकाउंट से एक तस्वीर डाली गई थी, जिसमें ताइवान की सबसे ऊंची इमारत ताइपेई 101 को आग में जलते दिखाया गया था.

राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की ओर से माना गया था कि अंतरराष्ट्रीय समूहों द्वारा संदिग्ध चरमपंथी के रूप में सूचीबद्ध 52 लोगों ने ताइवान में घुसने की कोशिश की थी, लेकिन घुस नहीं पाए थे.

इस बात ने ताइवान की चिंता और बढ़ा दी है. यह स्पष्ट नहीं है कि ये संदिग्ध कैसे चरमपंथ से जुड़े थे.

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