पेरिस सम्मेलन से बहुत हैं उम्मीदें

  • 30 नवंबर 2015
इमेज कॉपीरइट AP

पेरिस में ग्लोबल वॉर्मिंग पर कई देशों के शीर्ष नेता चर्चा करेंगे. इस दौरान देशों में बढ़ते ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन, प्रदूषित होती नदियां, ऊर्जा की अधिक ख़पत और पानी की बचत जैसे कई मुद्दों पर चर्चा होगी.

इस बीच ऐसी ख़बरें भी आ रही है कि अमरीका कार्बन उत्सर्जन में कटौती को लेकर कोई क़ानूनी बाध्यता स्वीकार नहीं करेगा.

सम्मेलन में पहुंचने से पहले अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अपने फेसबुक पर इसे लेकर सकारात्मकता दिखाई है.

उन्होंने लिखा है कि अमरीका ने पिछले सात सालों में इस दिशा में जो सफलता हासिल की है, उसे लेकर वो काफी आश्वस्त हैं.

इमेज कॉपीरइट epa
Image caption फ्रांस के विदेश मंत्री लॉरे फाबियास

वहीं फ्रांस के विदेश मंत्री लॉरे फ़ाबियास ने उम्मीद जताई है कि यह सम्मेलन फ़ायदेमंद साबित होगा और सभी देश एक नतीजे पर पहुंच पाएंगे.

उन्होंने कहा, "हमें उन तरीकों को खोजना होगा जिससे हम ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन को कम कर सकें जिससे प्रदूषण का स्तर कम हो. अगर हम ऐसा नहीं कर पाते हैं तो हमें जलवायु परिवर्तन की मुश्किलों का सामना करना होगा."

उन्होंने आगे बताया, "इसलिए ये हमें ही तय करना होगा कि हमें इस धरती पर किस तरह से रहना है और दूसरों की किस तरह से इस विषय पर मदद करनी है."

हालांकि इस दौरान पेरिस में कई लोगों और संगठनों ने इस सम्मेलन का विरोध भी किया है. सम्मेलन से पहले दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में रविवार को रैलियां आयोजित की गईं.

इमेज कॉपीरइट AFP

इन रैलियों के माध्यम से सम्मेलन में भाग ले रहे दुनिया भर के नेताओं से मांग की गई कि वो जलवायु परिवर्तन को रोकने की दिशा में क़दम उठाएं.

इस मौक़े पर विश्व के नेताओं पर दबाव बनाने के लिए दो हज़ार से ज़्यादा आयोजन हो रहे हैं, जिनकी शुरुआत ऑस्ट्रेलिया के सिडनी से हुई. वहां दसियों हज़ार लोगों ने रैली में हिस्सा लिया.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार