आपका मल जलाएगा, आपके घर का चूल्हा

इंसानी मल से बना कोयला

एक तरफ जहां दुनियाभर के नेता जलवायु परिवर्तन पर जवाब ढ़ूढ़ने में लगे हैं, अफ्रीका के घाना में इंसानी मल से कोयला बनाया जा रहा है जिससे पेड़ों की कटाई की समस्या को सुलझाने में मदद मिल सकती है.

घाना की राजधानी अक्क्रा विश्व के सबसे अधिक प्रदूषित शहरों में गिना जाता है.

इससे पहले, मल मूत्र समेत शहर का सैकड़ों ट्रक मलबा लैवंडर हिल पर जमा किया जाता था और समुद्र में फेंक दिया जाता था.

लेकिन संस्था 'स्लैमसन घाना' की कोशिशों से समस्या के हल के लिए इंसान के मल से ईंधन बनाने की शुरूआत की गई है.

'स्लैमसन घाना' के सैंपसन साइबू कहते हैं, "हम 40 ट्रक मैल लेते हैं और इससे कोयला बनाते हैं जिससे चूल्हा जलाया जा सकता है. लेकिन हमें उम्मीद है कि एक दिन हम पूरे शहर का कूड़ा रिसाइकल कर सकेंगे."

स्लैमसन घाना के संस्थापक फ्रैडरिक सन्नेसन बताते हैं कि मल से पानी और सूखे हिस्से को अलग किया जाता है. इसके बाद इस मल को सुखा कर एक बैरल में भर कर जलाया जाता है.

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इसे पाउडर बना कर इससे कोयले के ब्लॉक बनाए जाते हैं.

इस कोयले को इस्तेमाल करने वालों का कहना है कि ''यह जल्दी जलता है और इस पर खाना अच्छा बनता है. इसलिए इंसानी मल से बने होने करे बावजूद मुझे इसके इस्तेमाल में कोई दिक्क़त नहीं.''

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