हिटलर की आत्मकथा फिर प्रकाशित होगी

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जर्मनी के तानाशाह एडोल्फ़ हिटलर की आत्मकथा 'माइन काम्फ़' (मेरा संघर्ष) अगले महीने फिर प्रकाशित की जाएगी.

दूसरे विश्व युद्ध के बाद पहली बार माइन काम्फ़ का प्रकाशन हो रहा है. इस संस्करण में कुछ विद्वानों की टिप्पणियां भी होंगी.

म्यूनिख़ के द इंस्टीच्यूट ऑफ़ कंटेंपररी हिस्ट्री के मुताबिक़ इसकी चार हज़ार प्रतियां प्रकाशित होंगी. इसमें क़रीब 3500 टिप्पणियां होंगी.

संस्थान के निदेशक एंड्रिस विरशिंग कहते हैं कि विशेषज्ञों की ये टिप्पणियां इस किताब को लेकर बने मिथक को तोड़ेंगी.

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लेकिन संस्थान के इस क़दम का कुछ यहूदी संगठन विरोध भी कर रहे हैं. उनका मानना है कि इस किताब का पुर्नप्रकाशन नहीं होना चाहिए. 'माइन काम्फ़' हिटलर के सत्ता में आने के आठ साल पहले 1925 में प्रकाशित हुई थी.

नाज़ी जर्मनी के 1945 में हारने के बाद मित्र सेनाओं ने किताब का कॉपीराइट जर्मनी के बावेरिया राज्य को सौंप दिया था.

नफ़रत को फैलने से रोकने के उद्देश्य से इस किताब के पुर्नप्रकाशन पर अधिकारियों ने रोक लगा दी थी.

जर्मन क़ानून के मुताबिक़ कॉपीराइट 70 साल के बाद ख़त्म हो जाता है. 'माइन काम्फ़' का कॉपीराइट इस महीने ख़त्म हो रहा है. इसके बाद से प्रकाशक इस किताब का प्रकाशन कर सकते हैं.

जर्मन अधिकारियों का कहना है कि नाज़ी भावनाओं के फैलने की आशंका को देखते हुए वो इस किताब को आम लोगों की पहुंच से दूर रखने की कोशिश करेंगे.

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