अलग कैसे है कैलिफ़ोर्निया गोलीकांड

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कैलिफ़ोर्निया के सैन बर्नारडिनो में हुए हमले को कई लोग पहले हुए सामूहिक गोलीकांडों से अलग मान रहे हैं.

पहली बात, कई हमलावरों की मौजूदगी. अब तक ज़्यादातर हमले किसी एक हमलावर ने अंजाम दिए. कोलोराडो, रोज़बर्ग, चैटेनूगा, चार्ल्सटन जैसे हमलों में सभी हमलावर पुरुष थे और अकेले थे.

इस बार दो संदिग्ध हैं – सैयद रिज़वान फ़ारूक और उनकी सहयोगी तशफ़ीन मलिक. फ़ारूक अमरीकी थे जबकि मलिक की पहचान पाकिस्तानी बताई गई है. दोनों पुलिस मुठभेड़ में मारे गए. तीसरे संदिग्ध को पुलिस ने भागते हुए पकड़ा. हालांकि पुलिस ने स्पष्ट नहीं किया है कि वह भी वारदात का हिस्सा था.

अमरीका में ऐसे गोलीकांडों पर नज़र रखने वाली वेबसाइट शूटिंग ट्रैकर के मुताबिक़, पिछले एक साल में सामूहिक गोलीकांडों में सिर्फ़ आठ में एक से ज़्यादा हमलावर शामिल रहे हैं.

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दूसरी बात, महिला हमलावर होना. ऐसी घटनाओं में महिलाओं का शामिल होना दुर्लभ है क्योंकि 98 फ़ीसदी वारदात पुरुषों ने की हैं. पिछले एक साल में यह पहली वारदात है जिसमें महिला शामिल रही है.

आख़िरी घटना जिसमें महिला शामिल थी, वह थी अमांदा मिलर जिस पर लास वेगास के गोलीकांड में अपने पति जेराड की मदद करने का आरोप था.

अमूमन कम महिलाओं के पास बंदूक़ है. प्यू रिसर्च सेंटर के मुताबिक़ 38% पुरुष बंदूक़धारी हैं तो ऐसी महिलाएं सिर्फ़ 31% हैं.

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तीसरी बात, हमला योजनाबद्ध था. हमलावर दो बड़ी बंदूक़ें और दो सेमी ऑटोमेटिक हैंडगन लाए थे और हमले के वक़्त सैन्य लिबास में थे. पुलिस को घटनास्थल से कई विस्फोटक मिले. यही नहीं हमले से पहले हमलावरों ने अपने छह माह का बच्चा अपने रिश्तेदारों के पास छोड़ दिया था.

हालांकि हमले की वजह नामालूम है पर सैन बर्नारडिनो के पुलिस प्रमुख के मुताबिक़ ‘कुछ न कुछ योजना ज़रूर थी.’ एफ़बीआई ने वारदात के आतंकवादी घटना होने से इनकार भी नहीं किया है.

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चौथी बात, मौक़े से भागने की कोशिश. अभी तक के गोलीकांडों में हमलावरों ने भागने की कोशिश नहीं की थी बल्कि अक्सर वो ख़ुद को गोली मार लेते थे. एफ़बीआई के मुताबिक़ 2000 से 2013 के बीच ऐसा 40 फ़ीसदी हमलावरों ने किया और इनमें से 80 फ़ीसदी ने यह घटनास्थल पर किया.

मगर फ़ारूक और मलिक ने भागने की कोशिश की.

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पांचवीं बात, विस्फोटक. बताया गया है कि इस वारदात में घटनास्थल पर तीन विस्फोटक उपकरण मिले. इससे लगता है कि हमला योजनाबद्ध था. इसकी तुलना बोस्टन हमले से की गई है जिसमें बंदूक़ों के साथ विस्फोटक इस्तेमाल किए गए थे.

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