'पेरिस में भारत रोड़ा अटकाने वालों में नहीं'

  • 7 दिसंबर 2015
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भारत के केंद्रीय वन और पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर का कहना है कि भारत पेरिस वार्ता में रोड़ा अटकाने वालों में से नहीं, बल्कि रास्ता सुझाने वालों में है.

जावड़ेकर ने बीबीसी से कहा, "हम यह चाहते हैं कि पेरिस में कोई समझौता हो. पूरी दुनिया इस बात को समझे कि जलवायु परिवर्तन से पैदा हुए संकट से निजात कैसे मिलेगी."

उन्होंने कहा "लोग जब चेन्नई में बाढ़, उत्तराखंड की त्रासदी, जम्मू कश्मीर की बाढ़ देखते हैं तब जाकर उन्हें समझ में आता है कि यह बदले हुए मौमस का परिणाम है. हमें इन परेशानियों से बचना है. इसलिए हम बहुत ही सकारात्मक रूख लेकर वार्ता में शामिल हो रहे हैं. हालांकि कुछ लोग हमपर बेवजह दिक़्क़त पैदा करने का आरोप लगा रहे हैं. लेकिन मैं यह कहना चाहूंगा कि हम रोड़ा अटकाने वाले नहीं, बल्कि रास्ता सुझाने वाले लोग हैं."

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जावड़ेकर का कहना है कि धरती पर पैदा हुए सभी लोगों का इस पर बराबर हक़ है.

उन्होंने कहा, "भारत के 127 करोड़ नागरिकों के विकास का मार्ग प्रशस्त होना चाहिए. उस पर बेवजह किसी तरह का बंधन नहीं लगाना चाहिए. हम सबको मिलकर एक ऐसा रास्ता निकालना है, जिससे दुनिया का यह संकट ख़त्म हो. इसमें तकनीक और विज्ञान के क्षेत्र में हुए विकास का प्रयोग किया जाएगा. जलवायु संकट से निपटने के लिए दुनिया के 180 देशों ने लक्ष्य तय किए हैं. यह किसी क्रांति जैसा ही है."

भारत के विकास पर ज़ोर देते हुए उन्होंने कहा, "भारत दुनिया को यह समझाने की कोशिश कर रहा है कि अगर उसका विकास नहीं होगा और विकासशील देश आगे नहीं बढ़ेंगे तो दुनिया आगे कैसे बढ़ेगी. बाज़ार का विकास कैसे होगा. व्यापार कैसे बढ़ेगा. हम लोगों को हरियाली के रास्ते पर चलना है, उसे अपनाना है. लेकिन इसके लिए भी विकास होना भी जरूरी है, वह भी बराबरी के आधार पर. महत्वपूर्ण बात यह है कि विकास से दुनिया की अर्थव्यवस्था मज़बूत होती है."

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उन्होंने कहा, "भारत अपने पैरों पर खड़ा है. लेकिन हम छोटे-छोटे द्वीपों जैसे अविकसित देशों के लिए लड़ रहे हैं. हम सभी विकासशील देशों के लिए लड़ रहे हैं. हम पूरी दुनिया के लिए लड़ रहे हैं. हम जलवायु परिवर्तन से पैदा हुए संकट से निजात पाने के लिए लड़ रहे हैं."

इन दिनों पेरिस में चल रहे जलवायु सम्मेलन में जलवायु संकट से निपटने के लिए वार्ता में शामिल देशों ने समझौते का ब्लू प्रिंट तैयार किया है.

संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने विस्तृत समझौते पर जल्द ही सहमति बनने की उम्मीद जताई है.

(केंद्रीय वन और पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर से बीबीसी संवाददाता वात्सल्य राय से हुई बातचीत पर आधारित)

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