'तालिबान नेता मंसूर की मौत के सबूत नहीं'

  • 8 दिसंबर 2015
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अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ़ ग़नी ने कहा है कि तालिबान नेता मुल्ला अख़्तर मंसूर के मारे जाने का कोई सबूत नहीं है.

ग़नी ने यह बात तालिबान की ओर से मुल्ला अख़्तर मंसूर के नाम से जारी एक ऑडियो टेप के बाद कही है.

ग़नी ने सोमवार को पत्रकारों को बताया, "मंसूर के मारे जाने का कोई सबूत नहीं है. और इस घटना का सावधानीपूर्वक विश्लेषण होना चाहिए."

उनका इशारा उस गोलीबारी की ओर था जो पिछले मंगलवार को पाकिस्तानी शहर क्वेटा के सुदूरवर्ती इलाक़े में हुई थी.

गोलीबारी के बाद शनिवार को तालिबान ने एक ऑडियो टेप जारी किया. इसे मुल्ला मंसूर का टेप बताय जा रहा है. इसमें वो यह कह रहे हैं कि गोलीबारी की ख़बर 'निराधार' है.

टेप में कहा गया है, "मुठभेड़ के दौरान मेरी मौत की ख़बर अफ़वाह है. साथियो, ये रिपोर्ट झूठी है और इसमें कोई शक नहीं कि ये दुश्मनों का प्रचार है."

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Image caption अफ़ग़ान राष्ट्रपति के सामने देश के सुरक्षा हालात सबसे बड़ी चुनौती है

मौजूदा ऑडियो टेप में जो आवाज़ है, वो पिछली बार मंसूर की ओर से जारी किए गए रिकॉर्डिंग से मिलती-जुलती है. लेकिन अभी भी इसकी प्रमाणिकता को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं.

टेप में जिस शख़्स की आवाज़ है, वह ज़ोर देकर कह रहा है कि वह अफ़ग़ानिस्तान में 'इस्लामिक सरकार' की स्थापना के लिए तालिबान का संघर्ष जारी रखेगा.

पहले आई ख़बरों में कहा गया था कि क्वेटा में हुई मुठभेड़ में चार तालिबान बंदूकधारियों के साथ मंसूर की भी मौत हो गई है.

तालिबान की ओर से इस साल पुष्टि की गई कि 2013 में मुल्ला उमर की मौत हो चुकी है, इसके बाद जुलाई में मुल्ला मंसूर अख़्तर को अफ़गान तालिबान का नेता घोषित किया गया. इसके बाद तालिबान में फूट की भी ख़बरें आई थीं.

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