सौर ऊर्जा खपाने का अनोखा तरीक़ा

  • 12 दिसंबर 2015
इटली, बोलोनिया, सौर ऊर्जा

इटली में सौर ऊर्जा के लिए सरकारी प्रोत्साहन के ख़ात्मे के बाद उत्पादकों को इसे बनाए रखने के लिए नए तरीक़े अपनाने पड़ रहे हैं.

बोलोनिया में एक सब्ज़ी और फल बाज़ार में यूरोप की सबसे बड़ी सौर छत है और यह सौर ऊर्जा से इलेक्ट्रिक कारों को चार्ज करती है.

बोलोनिया की लाल छतों पर जब सुबह सूरज की रोशनी पड़ती है तो समझ में आ जाता है कि क्यों इटली सौर ऊर्जा का सिरमौर है. 2014 में इसकी कुल ऊर्जा का आठ प्रतिशत सौर ऊर्जा से आया था, जो किसी भी देश से अधिक है.

यह इसलिए भी एक उपलब्धि है क्योंकि चिह्नित ऐतिहासिक इमारतों पर सौर ऊर्जा पैनल लगाना संभव नहीं. पर जैसे ही आप शहर के केंद्र से बाहर निकलते हैं आपको सौर ऊर्जा के इस्तेमाल की चाहत नज़र आने लगती है.

बोलोनिया का सब्ज़ी और फल बाज़ार इटली का तीसरा सबसे बड़ा फल-सब्ज़ी बाज़ार है. इसकी छत पर करीब 45,000 सौर पैनल लगे हैं, जो क़रीब 14 फ़ुटबॉल मैदानों के बराबर इलाक़े में फैले हैं. इसे यूरोप की सबसे बड़ी सौर छत कहा जाता है.

छत के नीचे 2019 विक्रेता सब्ज़ियां और फल बेचते हैं. यह बाज़ार यहां उत्पादित होने वाली 16 गीगावॉट प्रति घंटा ऊर्जा का एक छोटा सा हिस्सा ही इस्तेमाल करता है. बाक़ी राष्ट्रीय ग्रिड को जाती है.

सवाल यह है कि सौर ऊर्जा पर मिलने वाली भारी प्रोत्साहन राशि ख़त्म होने और बिजली की विशेष दाम पर सरकारी ख़रीद बंद होने के बाद सौर ऊर्जा उत्पादक अपना व्यवसाय चलाए रखने के लिए क्या करेंगे?

बाज़ार केंद्र के एंड्रिया सेग्रे कहते हैं, "आपको कुछ हटकर सोचना होगा क्योंकि प्रोत्साहन पैकेज हमेशा नहीं चल सकते. दुर्भाग्य से हमारे देश में उनका असर पूरी उत्पादन श्रृंखला पर नहीं पड़ा था. जब हम सौर पैनल ख़रीदना चाहते थे तब सभी उत्पादकों के पास इतने नहीं थे कि हमारी ज़रूरत पूरी हो सके."

प्रोत्साहन पैकेज ख़त्म होने के बाद इस केंद्र जैसे सौर ऊर्जा उत्पादकों के के सामने संकट यह है कि या तो वह बिजली को सस्ती बाज़ार दर पर बेचें या उसका संग्रहण करें, जो न आसान है और न सस्ता.

इसके विकल्प के रूप में अब यहां उत्पादित होने वाली सौर ऊर्जा के इस्तेमाल के लिए इलेक्ट्रिक डिलीवरी वैन का प्रयोग किया जा रहा है जो सब्ज़ियों और फलों को स्थानीय ख़रीदारों तक पहुंचाती हैं.

चूंकि इन इलेक्ट्रिक वैनों पर कंजेशन चार्ज नहीं लगता इसलिए यह ग्राहकों के लिए भी सस्ती पड़ती हैं. इसके अलावा इसमें ध्वनि प्रदूषण भी नहीं होता और यह मध्ययुगीन शहर के संकरे रास्तों से आसानी से निकल भी जाती हैं.

इस परियोजना की सफलता से नगर निगम को शहर में बिजली के चार्जिंग स्टेशन लगाने की प्रेरणा भी मिल सकती है, भले ही वह बिजली किसी भी तरीके से पैदा की गई हो और इससे इलेक्ट्रिक वाहनों के बाज़ार को भी प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है.

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