लड़ाई के दर्द से मुक्त हुआ होम्स

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सीरिया का होम्स शहर अब भले ही सरकार के नियंत्रण में आ गया हो लेकिन वर्ष 2011 से दिसंबर 2015 तक इस शहर ने भीषण लड़ाई झेली है.

वर्ष 2011 में विद्रोहियों के कब्जे में आने के बाद से इस शहर को एक तरह से क्रांति की राजधानी कहा जाने लगा था.

वर्ष 2011 से विद्रोहियों के शहर पर कब्जा जमाने से लेकर उसे छोड़ने तक स्थानीय लोगों ने क्या कुछ बर्दाश्त किया, बीबीसी ने इस बारे में तमाम ख़बरें सारी दुनिया में पहुंचाई.

नवंबर 2011 में बीबीसी संवाददाता पॉल वुड इंटर ने होम्स का दौरा किया था. उस समय सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल असद के खिलाफ होम्स में जमकर प्रदर्शन हो रहे थे.

विद्रोहियों को भरोसा था कि यदि उन्हें बाहर से समर्थन मिले तो वह जीत जाएंगे. साल 2012 में हालात ऐसे हो गए थे कि होम्स से रह-रहकर गोलियों की आवाज सुनाई देती थी. तब भी पॉल एक बार फिर इसी शहर में थे.

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पॉल के मुताबिक उन्हें एक परिवार ने बताया कि वो नरसंहार के गवाह हैं.

बीबीसी संवाददाता लीस डूसेट ने भी साल 2012 में होम्स का आंखो देखा हाल बताया था.

उनके मुताबिक जब वह एक घर में पहुंची तो देखा वहां लोगों को गोली मारी गई थी. किचन में खून फैला हुआ था.

लेकिन सरकारी सेना ने विद्रोहियों के गढ़ में अपनी घेराबंदी जारी रखी और धीरे-धीरे उन्हें अपने कब्जे में वापस लेना शुरु कर दिया.

लोगों की जिंदगी धीरे-धीरे पटरी पर लौटने लगी थी. लीस ने वर्ष 2014 में फिर इस शहर का मिजाज़ जानने की कोशिश की.

उन्होंने संगीतकार आम्टेड मंसूर ने बात की जो लड़ाई शुरु होने के बाद अपनी दुकान और घर छोड़कर शहर से बाहर चले गए थे. वह लौटे लेकिन लंबे समय के लिए नहीं.

मंसूर को लगता है कि यहां अब उनका कोई भविष्य नहीं है और वह अमरीका जाना चाहते हैं.

दिसंबर 2015 में विद्रोहियों ने अपने कब्जे के अंतिम जिले होम्स शहर को भी छोड़ दिया है और अब यह शहर सरकार के हाथों में आ गया है.

लीस दिसंबर 2015 में एक बार फिर होम्स पहुंची. विद्रोहियों को होम्स से बाहर विद्रोहियों के नियंत्रण वाले क्षेत्र इदलिब की ओर भेजा जा रहा है.

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