आईएस का ईरान में पैर जमा पाना मुश्किल

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ईरान की साइबर पुलिस सेवा के प्रमुख ने घोषणा की है कि उसने चरमपंथी संगठन इस्लामिक स्टेट के समर्थन में कथित तौर पर वेबसाइट चला रहे कई लोगों को गिरफ़्तार किया है.

ये गिरफ़्तारियां ईरान की उस घोषणा के कुछ हफ्तों बाद हुई हैं, जिसमें ईरान ने कहा था कि उसने आईएस के लिए लड़ाके भर्ती करने वाले एक गुट को खत्म कर दिया है.

सीरिया और इराक़ में सुन्नी विद्रोहियों के खिलाफ़ लड़ाई में ईरान भी शामिल है. ईरान के अधिकारियों का कहना है कि वे आईएस के ख़तरे को गंभीरता से लेते हैं, ख़ासकर पेरिस पर बड़े हमले के बाद.

यही नहीं, इस तरह के संभावित हमलों से निपटने के लिए ईरान ने तैयारी भी की है.

इस तरह की चिंताओं के बावजूद इस्लामिक स्टेट का ईरान में सुन्नियों के बीच पैर जमा पाना मुश्किल लगता है. करीब आठ करोड़ की आबादी वाले शिया बहुल ईरान में सुन्नियों की तादाद 5 से 10 प्रतिशत है.

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ईरान के खुफ़िया विभाग के मंत्री महमूद अलावी ने कहा कि पेरिस हमले ईरान के लिए ‘गंभीर चेतावनी’ हैं. उन्होंने बताया कि उनके मंत्रालय ने हाल ही में 10 ‘आतंकवादी गुटों’ का पता लगाया है.

इस बीच, सैन्य सुरक्षा बलों के कमांडर ब्रिगेडियर जनरल अहमद रेज़ा पुरदस्तान ने ईरान पर संभावित हमले के लिए आईएस को दी गई चेतावनी दोहराई है. उन्होंने कहा कि इराक़ में आईएस ईरान की सीमा से 40 किलोमीटर दूर भी होगा तो ईरान की सेना ज़ोरदार कार्रवाई करेगी.

ईरान के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने ये भी बताया कि हाल ही में इराक़ से लगे सुन्नी बहुल करमनशाह प्रांत में आईएस से जुड़े एक ग्रुप को गिरफ्तार किया गया.

7 दिसंबर को साइबर पुलिस के प्रमुख कमाल हादिनफ़र ने कहा कि कथित तौर पर आईएस के समर्थन में वेबसाइट चलाने के मामले में 53 लोगों को गिरफ़्तार किया गया है.

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यही नहीं, ईरान ने नवंबर में ही अफ़ग़ानिस्तान से लगती पूर्वोत्तर सीमा पर एक ड्रिल भी की थी, इसका मक़सद आईएस के संभावित हमले से निपटने की तैयारियों को अंज़ाम देना था.

ईरान की समाचार एजेंसी मेहर ने ग्रेटर तेहरान के पुलिस प्रमुख हुसैन साजेदिनिया के हवाले से कहा, “किसी भी संभावित हमले से निपटने के लिए पुलिस तेहरान में ड्रिल कर रही है. इसमें विशेष सेवा बल की टुकड़ियां, बचाव दल, बमनिरोधक दस्ता, सादे कपड़ों में तैनात पुरुष और महिला पुलिस शामिल हैं.”

सीरिया और इराक़ में ईरान की सैन्य उपस्थिति के बावजूद चरमपंथी संगठन आईएस ने ईरान में अभी तक तक कोई हमला नहीं किया है. ईरान की सुरक्षा मामलों के जानकार मेहदी तलाती ने हाल ही में बीबीसी की फारसी सेवा से बातचीत में कहा कि आईएस के सदस्यों के लिए ईरान के भीतर घुसपैठ करना मुश्किल है और इसकी वजह है ईरान में बहुस्तरीय सुरक्षा.

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आईएस की विचारधारा मुख्यरूप से ‘सलाफ़ी जिहाद’ पर आधारित है. सुन्नी कट्टरपंथी इस विचारधारा के तहत सामुदायिक भावना पर सबसे अधिक जोर देते हैं. शियाओं के प्रति इस्लामिक स्टेट चरमपंथियों में गहरे तक बैठी घृणा भी एक वजह है कि ईरान में आईएस की राह आसान नहीं है.

तो क्या आईएस की नज़र ईरान के सुन्नियों पर है?

आईएस अब तक ईरान के सुन्नियों की भर्ती नहीं कर सका है, यहाँ तक उन्हें भी अपने साथ नहीं जोड़ सका है जो कि अल्पसंख्यकों के लिए ईरान की भेदभावपूर्ण नीति से ख़फ़ा हैं.

सिस्तान बलुचेस्तान में सरकारी सेनाओं से लड़ने वाले ईरानी सुन्नी चरमपंथी संगठन जैश अल अद्ल और अंसार अल फ़ुऱक़ान ने भी आईएस से जुड़ने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई है.

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लेबर न्यूज़ एजेंसी ने मंत्री अलावी के हवाले से कहा, “सुन्नी उलेमाओं के साथ हमारे बेहतर समन्वय का नतीजा है कि हम युवाओं को आईएस से जुड़ने से रोक सके हैं.”

इराक़ सीमा से लगते पश्चिमी ईरान के प्रांत मे रहने वाले सुन्नी कुर्दों को भी आईएस से किसी तरह की सहानुभूति नहीं है. इसके विपरीत सीरिया और इराक़ में कुर्दों पर हुए अत्याचार से इस समुदाय में आईएस का विरोध और मुखर हुआ है.

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