ब्रह्माण्ड की 11 अद्भुत आकाशगंगाएँ देखिए

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पृथ्वी से दूर स्थित अलग-अलग आकाशगंगाओं की रोशनी हम तक लाखों, करोड़ों साल में पहुँचती है. इसीलिए जब हम रात में आसमान को देखते हैं तो हम दरअसल समय की गहराई में झांक रहे होते हैं.

नासा की शक्तिशाली हब्बल टेलिस्कोप ने अंतरिक्ष की कई आकाशगंगाओं की तस्वीरों को लेने का अद्भुत काम किया है.

कई आकाशगंगाएं इतनी दूर हैं कि उनका प्रकाश हम तक पहुँचने में लाखों साल का समय लेता है. इससे ज़ाहिर है कि हम उस आकाशगंगा को लाखों साल पहले की अवस्था में देख रहे होते हैं.

अगर कोई आकाशगंगा एक करोड़ प्रकाश वर्ष दूर है तो हम उसे एक करोड़ साल पहले की अवस्था में देखते हैं, यह पृथ्वी पर मानव प्रजाति के अभ्युदय से पहले का समय है.

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पिनव्हील गैलक्सी का ही उदाहरण देखिए, इसे मेसियर 101 भी कहते हैं. यह पृथ्वी से 2.5 करोड़ प्रकाश वर्ष की दूरी पर स्थित है. यह तस्वीर इस आकाशगंगा की सबसे ज़्यादा डीटेल्ड तस्वीर है और इसे हब्बल टेलिस्कोप ने लिया है.

इस आकाशगंगा के एक कोने पर स्थित तारे की दूरी दूसरे कोने पर स्थित तारे से 1.7 लाख प्रकाश वर्ष है. इससे ज़ाहिर है कि यह हमारी आकाशगंगा के दोगुने आकार की है. ये भी माना जाता है कि इसमें करीब एक ख़रब तारे मौजूद हैं.

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इससे कुछ ही दूर सोमब्रेरो गैलेक्सी है, जिसे एम 104 भी कहते हैं. यह करीब 2.8 करोड़ प्रकाश वर्ष की दूरी पर स्थित है. इस आकाशगंगा का फैलाव करीब 50 हज़ार प्रकाश वर्ष है और इसका आकार 800 अरब सूर्यों के आकार जितना है.

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ये दोनों सर्पिल आकार की आकाशगंगाएं हैं, इन्हें एंटेने आकाशगंगा भी कहते हैं. ये एक समय में एक दूसरे से अलग हो गई थीं, लेकिन बाद में एक दूसरे को गुरुत्व से खींचने लगीं. इन दोनों के बीच ये 'संवाद' सैकड़ों, लाखों साल पहले शुरू हुआ था. ये पृथ्वी से 4.5 करोड़ प्रकाश वर्ष दूर हैं और आपस में टकराने वाली आकाशगंगाओं में सबसे नजदीक हैं.

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यह सर्पिली आकार की आकाशगंगा (एनजीसी 6503) ब्रह्मांड के एक काफ़ी बड़े खाली से दिखने वाले क्षेत्र में स्थित हैं. इसे उस क्षेत्र का 'शून्य' भी कहते हैं और ये पृथ्वी से 1.8 करोड़ प्रकाशवर्ष दूर है. ये तारा-विहीन अंधकार के 15 करोड़ प्रकाशवर्ष तक फैले क्षेत्र में इकलौती मालूम आकाशगंगा है.

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यहां दो आकाशगंगा एक गुलाब की शक्ल में टकराती हुई दिखाई देती हैं. इसकी रोशनी हम लोगों तक 20 करोड़ प्रकाशवर्ष में पहुंचती है. इन्हें सामूहिक तौर पर एआरपी 273 कहते हैं. दायीं ओर की आकाशगंगा थोड़ी बड़ी है, इसे यूजीसी 1810 कहते हैं. सर्पिल आकार की होने की वजह ये है इसकी साझेदार आकाश गंगा गैलेक्सी यूसीसी 1813. इसमें चमकीला नीला डॉट ये बताता है कि युवा तारे काफी तेज रोशनी के साथ जल रहे हैं.

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आकाशगंगा एम106 से बड़ी मात्रा में गैस निकलती है. माना जाता है कि ये गैसें इस आकाशगंगा के केंद्र में स्थित बड़े ब्लैक होल में गिर जाती हैं. एम 106 हमसे 2.3 करोड़ प्रकाशवर्ष दूर है.

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इसे बौना आकाशगंगा कहते हैं, आई ज़्विकी 18. यह हमारी आकाशगंगा मिल्की वे से भी छोटी है. यह 5.9 करोड़ प्रकाशवर्ष दूर है.

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यह दक्षिणी पिनव्हील गैलेक्सी एम 83 का क्लोज़-अप है. इस आकाशगंगा में मिल्की वे की तुलना में तेजी से तारे बनते हैं. इसमें लाल रंग वाले तारे नए हैं जबकि कुछ तारे कुछ लाख साल पुराने. एम83 हमसे 1.5 करोड़ प्रकाशवर्ष की दूरी पर स्थित है.

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सक्रिय आकाशगंगा एम 82 की यह कॉम्प्रीहेंसिव तस्वीर है, जो अलग अलग टेलिस्कोप से ली गई तस्वीरों को मिलाकर बनी है. अलग अलग टेलिस्कोप हैं- हब्बल, चंद्रा एक्स रे ऑब्जरवेटरी और स्पिटज़र स्पेस टेलिस्कोप. यह पृथ्वी से 1.15 करोड़ प्रकाशवर्ष दूर है. ये हमारे मिल्की वे से सबसे नज़दीकी आकाशगंगा है.

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यह आकाशगंगा है एनएचसी 1275. इसके केंद्र में बड़ा ब्लैक होल है. इस ब्लैक होल के चलते इससे काफी शक्तिशाली एक्स-रे निकलती हैं, जिन्हें अब हम 23 करोड़ साल बाद देख पा रहे हैं.

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यह अंतरिक्ष की सबसे घनी आकाशगंगा है. एम60-यूसीडी1 नामक आकाशगंगा का वजन हमारे सूर्य से 20 करोड़ गुना ज़्यादा है और यह पृथ्वी से करीब 5.4 करोड़ प्रकाश वर्ष दूर है.

अंग्रेज़ी में मूल लेख यहां पढ़ें, जो बीबीसी अर्थ पर उपलब्ध है.

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