ये रेडियो 'इस्लामिक स्टेट' है!

अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान के सीमावर्ती इलाक़े के किसी अज्ञात स्थान से इस्लामिक स्टेट नया रेडियो स्टेशन चला रहा है लेकिन हवाई हमलों या सिग्नल जाम से बचने के बावजूद यह ज़्यादा असरदार नहीं दिखता.

ज़्यादातर अफ़गानों की पहुंच इस रेडियो के प्रसारणों तक है, जिस पर 'ख़िलाफ़त की आवाज़' की अपील की जाती है. आईएस ने दो हफ़्ते पहले ही रेडियो शुरू किया है.

लगता है कि यह रेडियो किसी वाहन में रखकर चलाया जा रहा है ताकि हमलों से बचने के लिए इसकी जगह बार-बार बदली जा सके. मगर घूमते रहते से इस रेडियो प्रसारण की पहुंच इसकी क्षमता से ज़्यादा बड़े इलाक़े तक हो गई है.

इस रेडियो के असर के रास्ते में सिग्नल जाम और अफ़गान-पाकिस्तान क्षेत्र का बीहड़ इलाक़ा है जो एफ़एम प्रसारण की दूसरी बड़ी बाधा है.

'ख़िलाफ़त की आवाज़' पश्तो भाषा में शाम के समय एक से दो घंटे तक चलता है. इसके दैनिक कार्यक्रम में इंटरव्यू, आईएस का संदेश और जेहादी गीत शामिल होते हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक़ इस प्रसारण के पीछे आईएस की छवि बेहतर बनाने की कोशिश भी है. इस संगठन की क्रूरता और बाक़ी गतिविधियां अफ़गानिस्तान की परंपरा और विश्वासों के ख़िलाफ़ है. जिसकी वजह से हज़ारों लोगों को इलाक़े छोड़कर जाना पड़ा है.

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आईएस के एक रेडियो कार्यक्रम के प्रचार में कहा जाता है, "अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति के महल और पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में काला झंडा फहराया जाएगा."

संभावना यह भी है कि आईएस के पास कई मोबाइल रेडियो ट्रांसमीटर भी हैं, जो बिना तार के ही सूचना सामग्री साझा करते हैं.

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अफ़गानिस्तान में 200 से ज़्यादा रेडियो स्टेशन हैं. इनमें से ज़्यादातर अलग-अलग ज़िलों से चलते हैं.

तालिबान ने अनियमित तौर पर कई बार दूरदराज़ के इलाक़ों में रेडियो प्रसारण किया है, लेकिन लगता है कि पकड़े जाने के डर और लोगों की कम रुचि की वजह से उसने इसे बंद कर दिया है.

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माना जाता है कि स्वात घाटी में पाकिस्तान तालिबान के एक नेता मुल्लाह फ़ज़लुल्लाह अभी भी एक रेडियो सेवा चलाते हैं. इसे 'मुल्लाह रेडियो' के नाम से जाना जाता है और इस पर विद्रोही नेताओं के भाषण और संदेश प्रसारित होते हैं.

हवाई हमलों के बावजूद रेडियो प्रसारण शुरू करना बताता है कि यहां पांव मज़बूत करने का आईएस का हौसला बुलंद है.

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