पाकिस्तान जाकर 'अमरीका में छा गए मोदी'

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अमरीका की मुख्यधारा मीडिया ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ से मिलने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छोटी-सी लाहौर यात्रा की प्रशंसा की है.

अफ़गानिस्तान में क़ाबुल से दिल्ली लौटते समय शरीफ़ से मिलने के उनके फ़ैसले को दोनों दक्षिण एशियाई देशों के बीच सुधरते रिश्ते की तरह देखा जा रहा है.

मोदी के इस आश्चर्यजनक क़दम के बारे में वॉल स्ट्रीट जर्नल का कहना है- इससे दोनों देशों के बीच समझौते की कोशिशों को बल मिलेगा. शिकागो ट्रिब्यून ने इसे 'दोनों देशों के बीच सुलह की संभावना' बताया है.

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टाइम मैगज़ीन ने कहा कि 26 मई 2014 से सत्ता में आने के बाद से यह 'मोदी का सबसे बड़ा कूटनीतिक क़दम' है.

मई में मोदी ने सभी दक्षिण एशियाई नेताओं को शपथग्रहण समारोह में आने का न्यौता दिया था.

जाने माने पब्लिक रेडियो का कहना है 'यह पिछले एक दशक में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली पाकिस्तान यात्रा है? यह दोनों पड़ोसियों के बीच सुधरे रिश्ते का इशारा हो सकती है.'

लॉस एंजेलेस टाइम्स के अनुसार अपनी लाहौर यात्रा से 'लंबे समय से तनावग्रस्त रिश्तों में मोदी ने नई जान फूंक दी है.'

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न्यूयार्क टाइम्स ने मोदी की अचानक पाकिस्तान यात्रा के महत्व को अधिक तवज्जो न देते हुए कहा कि अतीत में मोदी अपनी नीति बदलते रहे हैं. अख़बार ने मोदी की यात्रा को 'एक कूटनीतिक नाच' कहा है.

नरेंद्र मोदी ने ट्विटर के ज़रिए लाहौर जा कर शरीफ़ से मिलने की बात दुनिया को बताई थी.

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अमरीका के प्रमुश थिंक टैंक, काउंसिल ऑफ़ फॉरेन रिलेशन्स के अध्यक्ष रिचर्ड एन हैस ने कहा 'अप्रत्याशित क़दम है लेकिन हम इसका स्वागत करते हैं.'

पाकिस्तान के विपक्षी पीपुल्स पार्टी के नेता, बिलावल भुट्टो ज़रदारी ने भी मोदी का कुछ घंटे के लिए लाहौर आने का स्वागत किया. उन्होंने ट्विटर पर लिखा 'लगातार बातचीत करते रहना ही दोनों देशों से बीच रुके पड़े मुद्दों का समाधान करने का रास्ता है.'

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