इंडिया गेट पर 'मोहब्बत के दंगे'

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देश में बढ़ रही कथित असहिष्णुता का मोहब्बत से जवाब देने के लिए दिल्ली के इंडिया गेट पर सोशल मीडिया के ज़रिए संपर्क में आए कुछ लोग इकट्ठा हुए.

अपनी मुलाक़ात को इन्होंने नाम दिया 'मोहब्बत के दंगे'.

अमरीका में रह रहे भारतीय मूल के अवि डांडिया ने क़रीब दो महीने पहले फ़ेसबुक पर एक वीडियो पोस्ट किया था.

उस वीडियो में उन्होंने गोरखपुर से भाजपा सांसद योगी आदित्यनाथ को जवाब दिया था, जो फ़ेसबुक पर वॉयरल हो गया था.

तब अवि डांडिया को फ़ेसबुक पर कम ही लोग जानते थे लेकिन उनकी 'मोहब्बत की बात' लोगों को पसंद आई और धीरे-धीरे लाखों तक उनकी बात पहुँचने लगी.

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अवि डांडिया कहते हैं, "अगर लोग नफ़रत फैलाने के लिए दंगे कर सकते हैं और ख़ून बहा सकते हैं तो हम मोहब्बत फैलाने के लिए मोहब्बत का दंगा कर सकते हैं और ख़ुशी के रंग बहा सकते हैं."

वे कहते हैं, "मैंने अमरीका में रहते हुए भारत में फैलाई जा रही असहिष्णुता को महसूस किया और जाना कि इससे देश के आर्थिक और सामाजिक विकास पर कितना असर हो सकता है. मैंने कुछ नहीं किया सिर्फ़ प्यार की बातें की और लोग साथ आते गए."

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शुक्रवार को देश विदेश से आए क़रीब 150 भारतीय इंडिया गेट पर जुटे. रफ़ीक अहमद क़तर से इसमें शामिल होने दिल्ली पहुँचे. वो कहते हैं, "हम फ़ेसबुक से बाहर ये बताना चाहते थे कि हिंदू-मुसलमान आपस में प्यार करते हैं. हमें वास्तविक दुनिया में गले मिलना ज़रूरी है."

यहां इकट्ठा हुए लोगों ने असहिष्णुता के ख़िलाफ़ एक हस्ताक्षर अभियान भी चलाया.

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कार्यक्रम में शामिल रहे वसीम अकरम त्यागी कहते हैं, "देश में होने वाली कोई भी सांप्रदायिक घटना, कोई भी विवादित बयान सिर्फ़ देश की सीमाओं तक नहीं रहता बल्कि वैश्वीकरण के दौर में वह घटना या टिप्पणी पूरी दुनिया में फैल जाती है. जिससे यह संदेश जाता है कि भारत का अनेकता में एकता वाला ढांचा जर्जर हालत में है. उसी एकता और गंगी जमुनी तहज़ीब को बचाने के लिए लोगों का खुलकर साथ आना ज़रूरी हो गया है."

त्यागी कहते हैं कि जो लोग सांप्रदायिक रास्तों पर गए हैं उन्हें यह समझाने की ज़रूरत है कि नफ़रतों से किसी का भला नहीं हुआ और न होने वाला है, लोगों के दिमाग में बैठ चुके सांप्रदायिक ‘डर’ को निकालने की ज़रूरत है.

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