कराची की सड़कों पर महविश की मोटरबाइक का जलवा

  • 17 जनवरी 2016
प्लेबैक आपके उपकरण पर नहीं हो पा रहा

पाकिस्तान में जहां औरतों को गाड़ी चलाते हुए देखना दुर्लभ बात है वहीं कराची में एक महिला ऐसी भी हैं जो मर्दों की परवाह किए बिना फ़र्राटे से मोटरसाइकिल चलाती हैं.

नाम है महविश इख़लाक़. वो काम पर जाने के लिए पिछले तीन साल से मोटरसाइकिल का इस्तेमाल कर रही हैं.

उन्हें इस बात की परवाह नहीं होती कि लोग क्या कहते हैं. वह विधवा हैं और अपनी जीविका ख़ुद चलाती हैं.

वो हर दिन बाइक से अपने काम पर जाती हैं और किसी भी तरह के सामाजिक वर्जनाओं की परवाह नहीं करती हैं.

इन सभी परेशानियों पर बीबीसी से बातचीत में महविश कहती हैं:-

मुझे मेरे पति ने बाइक चलाना सिखाया है. वो मेरे पीछे बैठे होते थे और मैं उनके आगे बैठी होती थी.

मुझे वो बाइक चलाते वक़्त जींस, टीशर्ट और हेलमेट पहनने को कहते थे. वो कहते थे कि पूरी तरह से सहज होकर चलाओ. किसी की फ़िक्र ना करो.

उस वक़्त मैं शौक़िया तौर पर बाइक चलाती थी. मुझे उस वक़्त यह नहीं पता था कि मेरे पति की मौत के बाद बाइक चलाना मेरी ज़रूरत बन जाएगी.

बाइक चलाते वक़्त विशेष तौर पर लड़कियों को तो सुरक्षा का पूरा ख़्याल रखना चाहिए.

अगर मुझे ससुराल या शॉपिंग सेंटर या कहीं भी जाना हो तो आसानी से मैं बाइक पर चली जाती हूं.

कुछ लोगों की यह धारणा हो सकती है कि लड़कियों को बाइक नहीं चलानी चाहिए लेकिन आजकल जो हालात हैं उसमें किसी को भी किसी चीज़ से पीछे नहीं हटना चाहिए.

सड़कों पर, बसों में जहां कहीं भी औरतें बैठी होती हैं वे मुझे देखकर हंसती हैं. वे मुझे एक हसरत भरी निगाहों से देखती हैं.

तब मुझे अहसास होता है कि काश वे भी मेरी तरह बाइक चला रही होतीं.

मैं एक अकाउंट अफ़सर हूं लेकिन लड़कों के साथ वेल्डिंग करना, मशीन चलाना वग़ैरह का काम करना मैं शौक़िया तौर पर करती रहती हूं.

यहां सबसे बड़ी समस्या यह है कि यहां पर ट्रैक नहीं है. और अगर ट्रैक होते हैं भी तो वे हेवी बाइक वाले या ट्रेल वाले होते हैं.

इससे होता यह है कि वे आपस में रेस लगा रहे होते हैं. कोई रेसिंग ट्रैक नहीं फिर भी रेस लगा रहे होते हैं.

इस चक्कर में दुर्घटना भी होती है. इसलिए मैं सरकार से कहना चाहूंगी कि उन्हें अलग ट्रैक दे ताकि आम आदमी भी ट्रैक पर आसानी से जा सके.

कम उम्र के लड़के जब मुझे बाइक चलाता हुआ देखते हैं तो आगे से बिलिंग करना शुरू कर देते हैं, जिग-जैग चलाना शुरू कर देते हैं और रेस लगाने को कहते हैं.

जो मुझे बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता है. मुझे इस रेस लगाने की बात से सख़्त नफ़रत है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

संबंधित समाचार