आईएस का मीडिया सेटअप कितना दमदार है?

  • 17 जनवरी 2016
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कई भाषाओं में चलने वाले रेडियो स्टेशन और पत्रिकाओं के अलावा रोज़ जारी होने वाले वीडियो और फोटो दर्शाते हैं कि इस्लामिक स्टेट पूरी तरह पेशेवराना अंदाज़ में अपनी मीडिया मुहिम चला रहा है. यह उसके पूर्ण रूप से अलग राज्य के दावे को बल देता है.

ये चरमपंथी समूह अपनी गतिविधियों से सुर्खियां बटोरता रहा है. एक से एक दिल दहलाने वाले वीडियो, जो प्रॉडक्शन के लिहाज से भी उच्च गुणवत्ता वाले होते हैं, उनके जरिए इस्लामिक स्टेट चर्चा में बना रहता है.

मीडिया मैनेजमेंट के ज़रिए इस्लामिक स्टेट अपने शासन और सैन्य क्षमता के बारे में बताता रहता है जिससे नए लड़ाकों की भर्ती में उसे मदद मिलती है.

ये संगठन इसके ज़रिए अपने नुकसान और कुछ हद तक हार से भी लोगों का ध्यान हटाने की कोशिश करता है.

इस्लामिक स्टेट ने अपनी मीडिया गतिविधियों को 2014 के मध्य में ज़मीनी कब्ज़े के बाद बढ़ाया और कई भाषाओं में प्रकाशन और प्रसारण शुरू किए ताकि उनकी पहुंच सही मायने में ग्लोबल हो सके.

आईएस के रेडियो स्टेशन का नाम अल-बायान है, जो इराक और सीरिया में प्रसारण करता है. यह इस्लामिक स्टेट की ताक़त को प्रदर्शित करने का मंच भी है.

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इस्लामिक स्टेट के टेलीविजन प्रसारण की कोशिशों को अब तक कामयाबी नहीं मिली है, लेकिन संगठन के समर्थकों ने इंटरनेट टीवी चैनल शुरू किया है.

अल बायान व्यवस्थित रूप से अपने रोज़ाना प्रसारित होने वाले न्यूज़ बुलेटिन को छह भाषाओं में ऑनलाइन पेश करता है. ये भाषाएं हैं- अरबी, अंग्रेजी, फ्रेंच, रूसी, तुर्की और कुर्द. इसके अलावा इस्लामिक स्टेट के प्रसारक इंडोनेशियाई, वीगर और बाल्कान्स बोलियों का भी इस्तेमाल करते हैं.

इसके साथ ही फ्रेंच, रूसी और तुर्की भाषाओं में ऐसी पत्रिकाएं प्रकाशित होती हैं, जो पहली नज़र में ही अपनी साज सज्जा से आकर्षित करती हैं.

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इस्लामिक स्टेट की प्रमुख पत्रिका है अंग्रेजी की 'दबिक' है. इसके जुलाई, 2014 के पहले अंक में ही ख़लीफ़ा की वापसी का दावा किया गया था. इसके अलावा अरबी भाषा में साप्ताहिक पत्रिका अल नाबा भी ऑनलाइन प्रकाशित होती है.

इन सबसे से अलग, आईएस रोज़ाना वीडियो और तस्वीरें प्रकाशित करता है, जिनके ज़रिए आईएस यह दिखाने की कोशिश करता है कि राज्य में उसके पूर्ण नियंत्रण में उसका शासन चल रहा है.

इसके जरिए इस्लामिक स्टेट नए लड़ाकों को आकर्षित भी करता है.

हाई-प्रोफाइल वीडियो भी कई भाषाओं में पेश किए जाते हैं. इसमें निर्माण की गुणवत्ता का पूरा ख़्याल रखा जाता है. चाहे वो ऑडियो विज़ुअल इफेक्ट की बात हो या फिर हॉलीवुड स्टाइल के एक्शन हों, इन सबका इस्तेमाल युवाओं का ध्यान खींचने के लिए किया जाता है.

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अंतरराष्ट्रीय सुर्खियां बटोरने के लिए, आईएस के लड़ाके नए तरीके अपना रहे हैं- गला काटने वाले जघन्य वीडियो के साथ प्रयोग कर रहे हैं और इन सबको काफ़ी नाटकीयता के साथ किया जा रहा है. इसमें पश्चिमी फ़िल्मों के मारधाड़ वाले दृश्यों का भी इस्तेमाल किया जाता है, ताकि वीडियो प्रभावी बन सके.

आईएस की नई रणनीति के मुताबिक एक ही विषय पर कई वीडियो प्रसारित किए जा रहे हैं. यह किसी संदेश को प्रसारित करने के लिए मीडिया मुहिम के नाम पर किया जाता है.

इसमें यूरोप पहुंचने वाले शरणार्थी, नवंबर 2015 के पेरिस हमले और फ़लस्तीनी इलाक़ों में इसराइली लोगों को घायल करने जैसी ख़बरें को भी शामिल किया गया है.

आईएस के मीडिया अभियान की सबसे ख़ास बात ये है कि यह घटनाओं पर तेजी से प्रतिक्रिया देता है और मध्य पूर्व के देशों के सरकारी मीडिया से बेहतर प्रसारण करता है.

इसके अलावा आईएस सोशल मीडिया का इस्तेमाल भी प्रभावशाली ढंग से करता है. समूह के संदेशों को प्रसारित करने के लिए ऑनलाइन समर्थकों का एक नेटवर्क भी काम करता है.

हालांकि ट्विटर और अन्य प्लेटफॉर्म पर आईएस से संबंधित एकाउंट पर शिकंजा कसा जा रहा है, लेकिन समूह की सामाग्री हमेशा आती रही है.

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इसके अलावा समूह मैसेजिंग ऐप टेलीग्राम का इस्तेमाल भी अपने प्रोपेगैंडा के लिए करता है.

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