‘मोदी एक क़दम को तैयार तो पाक दो बढ़ाता है’

  • 17 जनवरी 2016
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Image caption प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले महीने अचानक लाहौर का दौरा कर सबको को हैरान कर दिया था

पठानकोट हमले की पृष्ठभूमि में भारत और पाकिस्तान की विदेश सचिव स्तरीय वार्ता टलने के बावजूद दोनों देशों के बीच बने सकारात्मक माहौल की पाकिस्तानी उर्दू मीडिया में ख़ूब चर्चा है.

‘जंग’ लिखता है कि प्रतिबंधित संगठन जैश-ए-मोहम्मद के दफ़्तरों पर छापे और उसके कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिए जाने से भारत को ये संदेश गया कि पाकिस्तान अपनी सरज़मीन को पड़ोसी मुल्क के ख़िलाफ़ दहशतगर्दी के लिए इस्तेमाल नहीं होने देगा.

अख़बार लिखता है कि ये पहला मौक़ा है जब दोनों देशों ने एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप की बजाय मिल कर तहक़ीक़ात करने का फ़ैसला किया है.

अख़बार को उम्मीद है कि इन सब क़दमों से दोनों देशों के बीच ख़ुशगवार फ़िज़ा तैयार होगी जिसमें भारत और पाकिस्तान बातचीत के ज़रिए कश्मीर समेत सभी मुद्दों का स्थायी हल तलाश सकते हैं.

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‘नवा-ए-वक़्त’ लिखता है कि दोस्ती के लिए मोदी एक क़दम बढ़ाने को तैयार होते हैं तो पाकिस्तान दो क़दम बढ़ाता है.

अख़बार कहता है कि प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ की तरफ़ से छह सदस्यों वाली कमेटी का गठन पठानकोट हमलों के मुजरिमों तक पहुंचने की कोशिश है.

अख़बार की ये भी टिप्पणी है कि अगर जैश-ए-मोहम्मद वाक़ई पठानकोट हमले में शामिल है तो भारतीय सेना के अंदर के लोगों के सहयोग के बिना ऐसी कार्रवाई मुमकिन नहीं है.

अख़बार की राय है कि पाकिस्तान के बेहद सकारात्मक रवैये और साहसी क़दमों के बाद अब दोनों देशों के बीच संबंधों की बहाली और बेहतरी की गेंद भारत के पाले में है.

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वहीं 'रोज़नामा पाकिस्तान' ने दिल्ली में पाकिस्तान एयरलाइंस के दफ़्तर पर हमले की ख़बर पर संपादकीय लिखा है.

अख़बार कहता है कि पीआईए के दफ़्तर पर ढाई दर्जन लोगों ने हमला किया लेकिन पुलिस कुछ नहीं कर सकी, और अभी तक सिर्फ़ एक ही व्यक्ति को गिरफ़्तार किया गया है.

इस घटना पर अख़बार की राय है कि जहां दोनों देशों की सरकारें संबंधों की बहाली के लिए संयम से काम ले रही हैं, वहीं नॉन स्टेट एक्टर्स ने अपना काम शुरू कर दिया है.

'एक्सप्रेस' ने लिखा है कि भारत में पाकिस्तानी इमारतों और कर्मचारियों की सुरक्षा वहां की सरकार की ज़िम्मेदारी है, लेकिन अफ़सोस से कहना पड़ता है कि वो इसे बख़ूबी नहीं निभा रही है.

अख़बार कहता है कि कुछ विश्लेषक कह रहे हैं कि पाकिस्तान तो दहशतगर्दों पर कार्रवाई कर रहा है लेकिन भारत पाकिस्तानियों को नुक़सान पहुंचाने वालों को खुली छूट दे रहा है.

बहरहाल अख़बार कहता है कि रिश्तों में बेहतरी का जो सिलसिला शुरू किया गया है, वो हर हाल में जारी रहना चाहिए.

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Image caption पाकिस्तान में पोलियो की दवा पिलाने वाली टीमें कई बार निशाना बनाई जा चुकी हैं

‘दुनिया’ ने अपने संपादकीय में क्वेटा में एक पोलियो सेंटर पर आत्मघाती हमले पर ज़िक्र किया है जिसमें 11 सुरक्षाकर्मियों समेत कुल 15 लोग मारे गए.

अख़बार कहता है कि दहशतगर्द अब भी मौक़ा मिलने पर इंसानी ख़ून से हाथ रंगने से बाज़ नहीं आ रहे हैं और वो हर उस संस्था और व्यक्ति को ख़त्म करना चाहते हैं जो इंसानी भलाई में लगा है.

एक तरफ अख़बार ने दहशतगर्दी के ख़ात्मे पर ज़ोर दिया है तो दूसरी तरफ़ भी यह लिखा है कि अगर पाकिस्तान में पोलियो पर पूरी तरह नियंत्रण नहीं हो सका तो दूसरे देशों में पाकिस्तानियों के जाने पर पूरी तरह रोक लग सकती है.

रुख़ भारत का करें तो 'हिंदुस्तान एक्सप्रेस' ने पठानकोट हमले के सिलसिले में पाकिस्तान में हुई कार्रवाई को अमरीकी दबाव का नतीजा बताया है.

अख़बार लिखता है कि पाकिस्तान आम तौर पर दहशतगर्द संगठनों पर नकेल कसने की भारत की मांगों को नज़र अंदाज़ करता रहा है लेकिन अमरीकी दबाव को नज़र अंदाज़ करना हमेशा उसके लिए मुश्किल होता है.

अख़बार कहता है कि अमरीकी दबाव का ही नतीजा है कि पाकिस्तान ने पठानकोट हमले से जुड़े दस्तावेज़ों को उस तरह बेबुनियाद साबित करने की कोशिश नहीं की जैसा मुंबई और अन्य हमलों के सिलसिले में वो करता रहा है.

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इस सिलसिले में अमरीकी राष्ट्रपति ओबामा का ज़िक्र करते हुए अख़बार ने लिखा है कि उन्होंने अपने कार्यकाल के आख़िरी स्टेट ऑफ़ द यूनियन भाषण में दहशतगर्दी पर चिंता जताई और पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान और दक्षिण एशियाई देशों की तरफ़ उंगली उठाई.

वहीं 'रोज़नामा ख़बरें' लिखता है कि मोदी का लाहौर दौरा, पठानकोट हमले पर अप्रत्याशित संयम, पाकिस्तान की तरफ़ से सकारात्मक संकेत, भारत की तरफ़ से सबूत देने पर दहशतगर्दों पर शिकंजा, जैश-ए-मोहम्मद के दफ़्तरों पर छापे और उन्हें सील करना, कई दहशतगर्दों को हिरासत में लेकर छानबीन, ये सब ऐसे क़दम हैं जिनसे पता चलता है कि अब अमन और वार्ता का सफ़र रुकने वाला नहीं है.

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