गोली का रास्ता बदलने के लिए जादू-टोना

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इराक़ सरकार का कहना है कि देश में जादू-टोने का इस्तेमाल बढ़ रहा है और इसके ख़िलाफ़ अभियान चलाया गया है.

मीडिया की ख़बरों में कहा गया है कि नौकरियां पाने, वैवाहिक जीवन और यहाँ तक कि सैन्य समस्याओं के समाधान तक के लिए जादू-टोने का सहारा लिया जा रहा है.

दावा किया गया है देश में 5,000 से अधिक लोगों जादू-टोना करते हैं. इनमें से कुछ ताबीज़ और दूसरे नुस्खों के लिए हज़ारों डॉलर वसूल रहे हैं.

इराक़ के गृह मंत्रालय ने घोषणा की है कि वह इन ढोंगियों के ख़िलाफ़ सख्ती से पेश आएगा. मंत्रालय का कहना है ये लोग देश में हालात का ‘ग़लत फ़ायदा’ उठा रहे हैं.

मंत्रालय के प्रवक्ता ने इराक़ के अल-मादा न्यूज़ पोर्टल से कहा कि जादू-टोना करने पर क़ानून की धारा 248 के तहत प्रतिबंध लगाया गया है. इन्हें अनुच्छेद 46 के तहत ‘ढोंगी’ माना गया है.

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गृह मंत्रालय का कहना है कि काला जादू और जादू-टोने को तभी ख़त्म किया जा सकता है जब लोग सांस्कृतिक मूल्यों की तरफ लौटेंगे और नागरिक उन ‘धार्मिक और सामाजिक नियमों का पालन करेंगे जहाँ जादू-टोने को धोखाधड़ी की श्रेणी में रखा जाता है.’

लेकिन यहां जादू कई लोगों के सिर चढ़कर बोल रहा है. अल-अरबी अल-जदीद अख़बार का कहना है कि वरिष्ठ अधिकारी भी जादू-टोने और ताबीज़ जैसे नुस्खों को आज़मा रहे हैं.

अख़बार का कहना है कि बाज़ार में कई तरह के ‘जादुई ताबीज़’ उपलब्ध हैं. इनमें सबसे महंगा ताबीज़ 1000 डॉलर तक का है जो कथित तौर पर 'गोलियों का रास्ता बदल देता है.'

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ख़बर में कहा गया है कि ऐसे ताबीज़ सैन्य अधिकारियों और राजनेताओं में ख़ासे लोकप्रिय हैं.

काले जादू के अलावा इराक़ में कथित तौर पर बड़ी तादाद में ‘तांत्रिक’ हैं जो अपने पास जिन्न होने का दावा करते हैं.

तांत्रिक करार अल किनानी ने इराक के टेलीविजन चैनल अल सुमाइरा को बताया कि जादू टोना करने वालों और आध्यात्मिक तंत्र विद्या देने में साफ़-साफ़ अंतर है. जहाँ काले जादू में ‘शैतान को जरिया बनाया जाता है’, वहीं तंत्र विद्या ‘खुदा में यकीन और कुरान की आयतों पर आधारित है.’

जादू-टोने से देश पर नकारात्मक असर पड़ने की चिंताओं के बीच इसने कई लोगों को फ़ायदा पहुँचाया है.

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बग़दाद में जड़ी-बूटियां बेचने वाले मुदाफर अल उबायदी ने अल-अरबी अल-जदीद को बताया कि जादू-टोने के चलते उनका कारोबार तेज़ी से बढ़ा है क्योंकि तंत्र-मंत्र में कई तरह की जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल भी होता है.

उन्होंने कहा, “कभी-कभी मुझे कुछ अजीब जड़ी-बूटियों के ऑर्डर मिलते हैं. जब मैं पूछता हूं कि किस लिए, तो पता चलता है कि इन्हें तांत्रिकों ने मंगाया है.”

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Image caption इराक़ की राजधानी बग़दाद अक्सर चरमपंथियों का निशाना बनती रही है

इराक़ के एक गैर सरकारी संगठन के लिए काम कर रही सुमाया हिशाम का कहना है,"यह सही है कि मेसोपोटामिया के समय से ही यहां कालू जादू रहा है."

उनका कहना है कि लोगों के बीच इस प्राचीन ‘अंधविश्वास’ के बढ़ने की वजह ग़रीबी और शिक्षा मानकों का कमज़ोर पड़ना है.

उनका कहना है कि तांत्रिक लोगों की ‘विपत्ति, जागरूकता की कमी और भोलेपन’ का फ़ायदा उठाते हैं.

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