शून्य से 50 डिग्री नीचे बेपरवाह चलती ज़िंदगी

  • 25 जनवरी 2016
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उत्तर भारत इन दिनों सर्दी से ठिठुर रहा है. आम लोगों का जन जीवन प्रभावित हुआ है.

हज़ारों मील दूर अमरीका में भारी बर्फ़बारी से 11 राज्यों में आपतकाल की स्थिति पैदा हो गई और कई लोगों की मौत भी हो गई है.

इन हालात में ऐसे शहर के बारे में जानकर हैरानी होगी जहाँ अमूममन तापमान शून्य से 50 डिग्री नीचे तक चला जाता हो, लेकिन शहर की रफ़्तार धीमी नहीं पड़ती है.

शहर की रफ़्तार, भागमभाग और औद्योगीकरण का अंदाज़ा इससे लगाया जा सकता है कि ये दुनिया का सातवां सबसे प्रदूषित शहर है.

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ये शहर है नॉरलिस्क, जो रूस का अद्यौगिक शहर है. यह सुदूर उत्तर पूर्व में बसा शहर है, एकदम आर्कटिक सर्किल के ऊपर बसा हुआ.

यह शहर मुख्य रूप से निकल, तांबा और पलैडियम की खदानों के लिए दुनिया भर में मशहूर है. लिहाजा खनन और इन खनिजों को तराशने के उद्योग यहां बड़े पैमाने पर हैं.

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जनवरी-फरवरी के महीने में यहां का तापमान शून्य से 45-50 डिग्री नीचे तक चला जाता है और यहां रहना ख़ासा मुश्किल होता है. इसके बावजूद यहां नौकरी करने के लिए रूस के दूसरे हिस्सों से लोग आते रहते हैं.

मोटे तौर पर यहां की आबादी पौने दो लाख के आसपास है. इसी शहर की ख़ूबसूरत तस्वीरों को अपने कैमरे में क़ैद किया है फ़ोटोग्राफ़र इलिना चेरनाश्वो ने.

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इस शहर की उनकी तस्वीरों की एक प्रदर्शनी न्यूयार्क सिटी के हाफ़किंग स्टूडियो में ‘डेज़ ऑफ़ नाइट – नाइट्स ऑफ़ डे’ नाम से चल रही है.

इस शहर की फोटोग्राफ़ी करते हुए उन्होंने इसे समझने के लिए स्थानीय युवती डैन डैमोन से भी बातचीत की है.

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सवाल ये है कि इन मुश्किल हालात में, इतनी ठंड में घर से बाहर कैसे निकलते हैं लोग?

डैन बताती हैं, “हम लोग ठंड में ख़ूब बाहर निकलते हैं, बस हमें अच्छी गुणवत्ता वाले ऊनी कपड़े पहनने होते हैं.”

डैन इस शहर की ख़ासियतों के बारे में बताती हैं, “सोवियत संघ के जमाने ये शहर आर्थिक रूप में काफी संपन्न था, लोग यहां की सपन्नता को देखते हुए यहां आते थे. बेहतरीन स्कूल, शानदार अस्पताल, रहने के लिए प्राकृतिक जगहें, ये सब मौजूद थे."

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वो आगे बताती हैं, "आज भी कमोबेश हालात वैसे ही हैं. लोग यहां बेहतर क्वालिटी ऑफ़ लाइफ़ के कारण चले आते हैं.”

डैन ये भी बताती हैं कि यहां से कुछ लोग रिटायर होने के बाद एकाध साल के लिए दूसरी जगहों पर गए लेकिन आख़िर में यहीं लौट आए.

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