आख़िर सॉफ़्टवेयर से हार गया इंसान

गूगल के आर्टिफ़िशियल इंटेलीजेंस प्रोग्राम ने बोर्ड गेम गो के यूरोपीय विजेता को हरा दिया है.

चीनी खेल गो को कंप्यूटरों के लिए शतरंज से ज़्यादा मुश्किल खेल माना जाता था क्योंकि गो खेलने के कई तरीक़े हो सकते हैं. इसी वजह से यह कंप्यूटरों के लिए सबसे मुश्किल खेलों की आखिरी श्रेणी में था.

गूगल के प्रोजेक्ट डीप माइंड की डिवीज़न का कहना है कि उसके सॉफ़्टवेयर ने अपने इंसानी प्रतिद्वंद्वी को ज़ीरो के मुक़ाबले पांच खेलों से हरा दिया.

डीप माइंड के चीफ़ एक्ज़ीक्यूटिव डेमिस हैसाबिस ने कहा है कि उनका एल्फ़ा गो सॉफ़्टवेयर तीन चरणों की प्रक्रिया में खेला जिसमें उसने ऐसी तीन करोड़ चालों का विश्लेषण किया, जो इंसान खेल सकता है.

एक विशेषज्ञ के मुताबिक़ यह आर्टिफ़िशियल इंटेलीजेंस यानी कृत्रिम बुद्धिमत्ता के लिए एक बड़ी कामयाबी है और इसके दूरगामी परिणाम होंगे.

बीते साल अक्टूबर में डीप माइंड प्रोजेक्ट ने यूरोप के शीर्ष खिलाड़ी फ़ैन हुई को लंदन कार्यालय बुलाया था, जहां सभी खेलों में आर्टिफ़िशियल इंटेलीजेंस ने उन पर जीत दर्ज की.

अब डीप माइंड का इरादा सिओल में मार्च में विश्व के शीर्ष गो खिलाड़ी ली सेडॉल के ख़िलाफ़ एल्फ़ा गो सॉफ़्टवेयर को उतारने का है.

हैसाबिस कहते हैं, "यह सीखता है कि अमूमन गेम में कैसे तरीक़े प्रचलित हैं. क्या कुछ अच्छा है और क्या कुछ बुरा है. अगर अाप पसंद करते हैं, तो यह प्रोग्राम गो के सहज हिस्से को सीख जाता है.''

उनका कहना है कि यह ख़ुद में लाखों बार के विभिन्न संस्करण खेलता है और हर बार बढ़त के साथ बेहतर होता जाता है. यह अपनी गलतियों से भी सीखता है.

इसका अंतिम चरण मॉन्टे कार्लो ट्री सर्च कहलाता है जो वास्तव में योजना बनाने का चरण है. जब इसके पास पूरी जानकारी मौजूद होती है तो वह लंबी अवधि की योजना बना सकता है.

गूगल के इस सिस्टम ने प्रतिद्वंदी गो प्लेईंग आर्टिफ़िशियल इंटेलीजेंस के ख़िलाफ़ ही 500 मैचों में 499 जीत लिए हैं.

हैसाबिस के मुताबिक़ उनके लिए बोर्ड खेलों में गो चुनौतियों का शिखर है.

क्या है गो खेल

कहते हैं कि प्राचीन चीन में गो नाम का यह खेला जाता था.

इसमें एक ग्रिड पर काले और सफ़ेद पत्थरों के साथ खिलाड़ी खेलते थे. इसमें खिलाड़ी अपने विरोधी खिलाड़ी के पत्थर के टुकड़े को अपने रंग के टुकड़े से घेरकर अपनी स्थिति मज़बूत बनाते थे.

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हालांकि इसके नियम शतरंज से सरल हैं पर इसमें खिलाड़ियों के पास शतरंज की 20 चालों के मुक़ाबले 200 चालों का विकल्प होता है.

डीप माइंड की टीम की मानें तो किसी गो खिलाड़ी के पास पूरे ब्रह्मांड में जितने परमाणु हैं, उससे कहीं ज़्यादा खेलने के संभावित मौक़े होते हैं.

दूसरे यह तय करना बेहद मुश्किल होता है कि कौन जीत रहा है और ज़्यादातर शीर्ष खिलाड़ी अपने ज्ञान, सहज वृत्ति या इंस्टिंक्ट पर भरोसा करते हैं.

फ़ेसबुक भी पीछे नहीं

कैंब्रिज विश्वविद्यालय के प्रो. जूबिन ने कहा कि इसका इस्तेमाल चिकित्सकों को उपचार की योजनाएं बनाने और इंसान को निर्णय लेने में मदद लेने के लिए किया जा सकता है.

उनका कहना है कि फ़ेसबुक ने भी आर्टिफ़िशियल इंटेलीजेंस में कुछ शानदार परिणाम पाए हैं, पर मुझे लगता है कि गूगल ने इस विशेष रूप से महत्वपूर्ण चुनौती में उन्हें हराया है.

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इस उपलब्धि को विज्ञान पत्रिका नेचर में सॉफ़्टवेयर में प्रयोग विस्तृत तकनीक के साथ छापने की घोषणा की गई थी.

इससे पहले फ़ेसबुक के सीईओ ने बताया था कि उनका खुद का एआई प्रोजेक्ट गो पर इंसानों को हराने के काफ़ी नज़दीक पहुँच चुका है.

लेकिन जिस शोध का उन्होंने हवाला दिया है उसमें उनके सॉफ़्टवेयर को उन्नत शौकिया होने का दर्जा दिया गया है न कि पेशेवर स्तर के खिलाड़ी का.

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