माओ के मल पर स्टालिन की नज़र

जोसेफ़ स्टालिन, माओ ज़ेदोंग

एक पूर्व सोवियत एजेंट ने कहा है कि उन्हें सबूत मिले हैं कि कम्यूनिस्ट नेता जोसेफ़ स्टालिन ने माओ त्से तुंग की जासूसी की थी. और तो और माओ के व्यक्तित्व को समझने के लिए उनके मल की परीक्षा के लिए स्टालिन ने एक गुप्त प्रयोगशाला भी बनाई थी.

गंभीरता को देंखे तो ये एक अहम राज़ था, लेकिन एक बदबूदार प्रयोग भी था.

रूसी समाचार पत्रों के मुताबिक़ साल 1940 में स्टालिन की ख़ुफ़िया पुलिस ने लोगों के मल की परीक्षा के लिए एक विशेष विभाग बनाया था.

इसका लक्ष्य था, विदेशी नेताओं के मल की जांच करना. दूसरे शब्दों में इसे मल के ज़रिए जासूसी कहा जा सकता है. लेकिन यह काफ़ी महंगा तरीक़ा था.

पूर्व सोवियत एजेंट इगोर अटामानेनको ने ये खुलासे किए हैं, वे दावा करते हैं कि रूसी ख़ुफ़िया विभाग के पुराने दस्तावेज़ों पर शोध करते वक्त उन्हें इस अलग तरह के प्रोजेक्ट की जानकारी मिली.

उन्होंने एक अख़बार को बताया, "उन दिनों रूस में ख़ुफ़िया विभाग के पास आजकल की तरह सुनने वाले यंत्र नहीं हुआ करते थे. इसलिए हमारे विशेषज्ञ व्यक्ति की सूचना निकालने के लिए सबसे महंगे तरीक़े अपनाते थे."

अटामानेनको ने कहा है कि स्टालिन के वफादार सेवक लावरेंटी बेरिया को इस गुप्त प्रयोगशाला का प्रमुख बनाया गया था.

जब मैंने अटामानेनको से संपर्क किया तो उन्होंने बताया कि रूस के वैज्ञानिक मल में क्या खोज रहे थे.

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Image caption चीन में माओ की विराट मूर्ति

उन्होंने बताया "उदाहरण के लिए यदि वे मल में अधिक मात्रा में एमीनो एसिड ट्रिप्टोफैन पाते तो वह व्य़ाख्या करते कि वह व्यक्ति शांत और मिलनसार होगा. और यदि मल में कम पोटैशियम की मात्रा पाते तो उसे डरे हुए और इंसोमीनिया से जोड़ कर देखा जाता."

अटामानेनको ने दावा किया है दिसंबर 1949 में चीन के साम्यवादी नेता माओ त्से तुंग के मास्को दौरे पर रूस के गुप्तचरों ने उनके व्यक्तित्व आंकने के लिए इस सिस्टम का प्रयोग किया था. इसके लिए कथित रूप से विशेष शौचालय को सीवर की जगह एक गुप्त बक्से से जोड़ा गया था.

10 दिनों के लिए माओ के लिए खाने के सामान और पानी का अच्छी व्यवस्था की गई थी और उनके मल को तेज़ी से परीक्षा के लिए उठा लिया जाता था.

मल के परीक्षण की जांच के बाद ही स्टालिन उनके साथ समझौते पर हस्ताक्षर करने पर राज़ी हुए थे.

पत्रकार और इतिहासकार डेविड हालबेस्टॉम के लिखे "द कोल्डेस्ट विंटर" के अनुसार-

जब माओ पहली बार मॉस्को पहुंचे उन्होंने कहा कि चीन रूस के साथ समझौता करना चाहता है लेकिन उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि उनके साथ वैसा ही व्यवहार हो जैसा अपने समान लोगों के साथ किया जाता है.

जबकि उन्हें रोज़ एक पाठ पढ़ाया जाता था. उलम के शब्दों में "वे मेहमान की की शक्ल में एक क़ैदी" की तरह थे.

इतना कि वे दीवारों पर चीखते थे और उन्हें यक़ीन था कि स्टालिन ने दीवारों पर जासूसी संत्र लगाए हैं. वे कहते थे, "मैं यहां ख़ाने और मल त्यागने के सिवा अन्य कई काम के लिए आया हूं"

रूस के सबसे पॉपुलर दैनिक अख़बार कोस्मोल्स्काया प्राव्दा के अनुसार स्टालिन के उत्तराधिकारी निकिता ख्रुस्चेव ने इस प्रोजेक्ट को ख़त्म कर प्रयोगशाला को बंद कर दिया.

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