मौत के बदले आठ साल क़ैद और 800 कोड़े

  • 3 फरवरी 2016
इमेज कॉपीरइट AP

सऊदी अरब में एक अदालत ने इस्लाम को न मानने का दोषी पाए गए एक फ़लस्तीनी कवि की फांसी की सज़ा को बदल दिया है.

फ़लस्तीनी कवि अशरफ़ फ़याज़ की फांसी की सज़ा को आठ साल की क़ैद में बदल दिया गया है.

लेकिन उन्हें 800 कोड़े मारने और कविता नहीं लिखने का भी आदेश दिया गया है. हालांकि वो अपने उपर लगाए गए आरोपों को मानने से इंकार करते हैं.

सऊदी अरब में पैदा हुए अशरफ़ फ़याज़ फ़लस्तीनी शरणार्थी परिवार से हैं.

फ़याज़ के वकील अब्दुल रहमान अल-लहीम ने कहा कि अदालत के आदेशानुसार उनके मुवक्किल को सरकारी मीडिया में एक माफ़ीनामा देना होगा.

वकील के अनुसार 800 कोड़ों की सज़ा उन्हें 16 बार में दी जानी है.

लेकिन वकील अल-लहीम ने कहा कि वो इस नए फ़ैसले के ख़िलाफ़ भी अपील करेंगे और अशरफ़ फ़याज़ की रिहाई की मांग करेंगे.

मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल के अनुसार एक सऊदी नागरिक ने फ़याज़ पर नास्तिकता का प्रचार करने और ईश-निंदा को बढ़ावा देने का आरोप लगाया था जिसके कारण उन्हें अगस्त 2013 में गिरफ़्तार किया गया था.

अशरफ़ फ़याज़ को दूसरे ही दिन रिहा कर दिया गया था लेकिन जनवरी 2014 में उन्हें दोबारा गिरफ़्तार किया गया और फिर उनपर अपना धर्म त्याग देने का केस दर्ज किया गया.

इमेज कॉपीरइट Reuters

2008 में फ़याज़ की कवित संग्रह छपी जिनमें कथित तौर पर धर्म को चुनौती दी गई थी और नास्तिक विचारधारा का प्रचार किया गया था.

35 साल के फ़याज़ पर सऊदी साइबर क़ानून के उल्लंघन का भी इलज़ाम था क्योंकि उन्होंने अपने मोबाइल फ़ोन से महिलाओं की तस्वीर ली थी और फिर उन्हें अपने मोबाइल में सेव किया था.

अप्रैल 2014 में एक अदालत ने साइबर क़ानून के तहत चार साल क़ैद और 800 कोड़ों की सज़ा सुनाई थी. अदालत ने उनके माफ़ीनामे को स्वीकार करते हुए धर्म त्यागने के आरोप को ख़ारिज कर दिया था.

लेकिन फिर अपील कोर्ट ने उनके केस को निचली अदालत में भेजा जिसने नवंबर 2015 में उन्हें मौत की सज़ा सुनाई.

जनवरी 2016 में दुनिया भर के सैकड़ों लेखकों ने उनके समर्थन में बयान दिया था.

बर्लिन के इंटरनेशनल लिटरेचर फ़ेस्टिवल ने अमरीका और ब्रिटेन की सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की थी और ये भी मांग की थी कि संयुक्त राष्ट्र संघ ह्यूमन राइट्स काउंसिल से सऊदी अरब को निलंबित करे.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार