अमरीकाः 72 साल के क़ैदी को मौत की सज़ा

  • 4 फरवरी 2016
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Image caption 72 साल के ब्रैंडन ऐस्टर जोंस को इंजेक्शन के ज़रिए मौत की सज़ा दी गई.

अमरीका के राज्य जॉर्जिया ने मौत की सज़ा के सबसे पुराने फ़ैसले पर तामील करते हुए एक 72 साल के क़ैदी को मृत्युदंड दिया है.

36 साल पहले एक डकैती के दौरान एक दुकान के मैनेजर की हत्या के अपराध में ब्रैंडन एस्टर जोंस को मौत की सज़ा सुनाई गई थी.

जोंस के वकील ने अाख़िरी वक़्त सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की, जिससे उन्हें सज़ा देने में कई घंटे की देरी हो गई.

1976 से अब तक जॉर्जिया में 60 लोगों को मौत की सज़ा दी गई है और अभी दर्जनों लोगों को मृत्युदंड दिया जाना है.

जैक्सन की एक जेल में जोंस को बुधवार सुबह ज़हर के इंजेक्शन के ज़रिए मौत की सज़ा दी गई.

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Image caption वकील डैनियल कोल्बर ने जेल के बाहर मृत्युदंड के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया.

जोंस और एक अन्य व्यक्ति वैन रूज़वेल्ट सोलोमन को 1979 में एक डकैती के दौरान एक स्टोर मैनेजर की हत्या के अपराध में मौत की सज़ा सुनाई गई थी.

सोलोमन को 1985 में मृत्युदंड दे दिया गया था.

जोंस के समर्थकों की दलील थी कि उसने स्टोर मैनेजर को गोली मारने से इनकार किया था और अदालत ने उसके मानसिक तौर पर बीमार होने या बचपन में यौन शोषण का शिकार होने के सुबूतों पर विचार नहीं किया.

उन्हें सज़ा देने से पहले डेथ पेनल्टी इन्फ़ॉर्मेशन सेंटर ने एक बयान जारी किया, जिसमें कहा गया कि जोंस "के 73 वर्ष पूरा होने में सिर्फ़ दो हफ़्ते बाक़ी थे." उनका केस "मृत्युदंड की अनुरूपता और इसके भेदभावपूर्ण इस्तेमाल पर सवाल उठाता है."

1989 में एक जज ने जोंस की मौत की सज़ा पलट दी थी. उनका कहना था कि जूरी सदस्यों में से एक कमरे में बाइबल लेकर गया था, जो अनुचित है और इससे जूरी सदस्यों के फ़ैसले पर असर पड़ा होगा.

1997 में जोंस को अदालत ने एक बार फिर मौत की सज़ा सुनाई.

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