जानें बच्चे को विदेश में कैसे पढ़ाएं

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विदेश जाकर पढ़ने का चलन पूरी दुनिया में तेज़ी से बढ़ रहा है. एक मोटे अंदाज़े के मुताबिक़, हर साल क़रीब 43 लाख लोग, अपना देश छोड़कर किसी और देश में पढ़ने के लिए जाते हैं.

सबसे ज़्यादा विदेशी छात्र ऑस्ट्रेलिया पढ़ने जाते हैं. इसके बाद ब्रिटेन, स्विट्ज़रलैंड, न्यूज़ीलैंड और ऑस्ट्रिया का नंबर आता है. सबसे ख़ास बात ये है कि विदेश पढ़ने जाने वाले छात्रों में आधे एशियाई होते हैं.

ग्लोबल इकॉनोमी के इस दौर में मल्टीनेशनल कंपनियां ऐसे लोगों को तरजीह देती हैं, जो अलग-अलग देशों में जाकर काम कर सकें. कई भाषाएं बोलते हों, अलग क्षेत्रों के लोगों के साथ तालमेल कर सकें, अलग टाइम ज़ोन में जाकर काम कर सकें.

अमरीका के इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंटरनेशनल एजुकेशन से जुड़े डेनियल ओब्स्ट कहते हैं कि ग्लोबलाइज़ेशन के इस दौर में कामयाबी के लिए हर छात्र को विदेश में पढ़ाई करनी चाहिए. इससे वो अलग भाषा और संस्कृति वाले लोगों से तालमेल बिठाना सीखेंगे. मल्टीनेशनल कंपनियों में काम करना उनके लिए आसान होगा.

तो, अगर आप भी अपने बच्चे को विदेश भेजने की सोच रहे हैं, तो हम आपको इससे जुड़े कुछ टिप्स बताते हैं.

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विदेश में पढ़ाई के लिए सबसे ज़रूरी क्या है- सबसे ज़रूरी है आपके बच्चे के अंदर सेल्फ़ कॉन्फिडेंस होना. वो हज़ारों मील दूर होगा, अजनबियों के बीच होगा. जो दूसरी भाषा बोलते होंगे. अलग-अलग लोगों से तालमेल बिठाना, अपनी दिक़्क़तों का हल खोजना उसे आना चाहिए. क्योंकि कई बार आप चाहकर भी इतनी दूर से उसकी मदद नहीं कर पाएंगे.

तो बेटे या बेटी को विदेश भेजने से पहले ये ज़रूर तय कर लें कि आपका बच्चा, विदेश के माहौल में आत्मनिर्भर होकर, आत्मविश्वास के साथ रह सकेगा या नहीं.

जल्द तैयारी शुरू करें- अलग-अलग देशों में पढ़ाई का अलग-अलग सिस्टम होता है. वहां के सेमेस्टर अलग टाइम टेबल फ़ॉलो करते हैं. उनकी अपनी शर्तें होती हैं. ऐसे में बेहतर होगा कि जैसे ही ये ख़्याल आए कि बच्चे को पढ़ाई के लिए विदेश भेजना है, इस बारे में अच्छे से रिसर्च कर लें.

ख़ासकर अगर आपके बच्चे को पढ़ाई के लिए स्कॉलरशिप लेनी है और जहां जाना है वहां के लिए वीज़ा लेना भी ज़रूरी है तो ऐसे में पहले से तैयारी करना बहुत ज़रूरी है. इससे आपको कोर्स से जुड़ी पूरी जानकारी भी सही समय पर हो जाएगी.

कोर्स के बारे में पूरी रिसर्च करें- विदेश में पढ़ने के तमाम तरह के प्रोग्राम होते हैं. कई बार लोकल यूनिवर्सिटी भी अपने अच्छे स्टूडेंट्स को पढ़ने के लिए विदेश भेजती हैं. फिर अलग-अलग देशों में सेमेस्टर या कोर्स की मियाद भी अलग होती है.

कुछ कोर्स अंग्रेज़ी में होते हैं तो कई संस्थान एक साथ दो-दो डिग्री की पढ़ाई की इजाज़त भी देते हैं. कई जगह पढ़ाई कठिन होती है, तो कुछ जगह आसान भी. यानी, आप ख़ूब अच्छे से जांच-परख लें, देख लें कि किस देश में जाना है, कौन सा कोर्स करना और किस संस्थान में पढ़ना है, सबसे ज़्यादा फ़ायदेमंद होगा.

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अमरीका की यूनिवर्सिटी एक्सपर्ट लिन शॉनसी कहती हैं कि कई विदेशी कोर्स बेहद आसान होते हैं. इतने कि लोगों को लगेगा कि ये क्या विदेश जाकर पढ़ाई की. तो कोर्स के बारे में समझ लेना ज़रूरी होता है. IIEpassport.org, IESabroad.org, और StudyAbroad.com जैसी वेबसाइट्स से इस काम में मदद मिल सकती है.

पता कर लें कि आपके कोर्स को आगे मान्यता है या नहीं- अगर आपका बच्चा किसी शॉर्ट टर्म कोर्स के लिए विदेश जा रहा है, और अपनी बाक़ी की डिग्री लोकल यूनिवर्सिटी से ही लेगा, तो ये ज़रूर पता कर लें, कि विदेश के कोर्स के नंबर उसकी डिर्गी में जुड़ेंगे या नहीं. वर्ना, विदेश जाकर पढ़ना वक़्त की बर्बादी जैसा होगा, अगर ये लोकल यूनिवर्सिटी की डिग्री में नहीं जुड़ा.

विदेश में पढ़ने का ख़र्च भी जान लें- विदेश में पढ़ाई महंगी पड़ती है. अगर आप अपनी लोकल यूनिवर्सिटी के किसी प्रोग्राम के तहत जा रहे हैं, तो आपको लोकल यूनिवर्सिटी की फ़ीस देनी होगी. साथ ही विदेश में पढ़ने का ख़र्च भी उठाना होगा.

फिर वहां रहने खाने का जो ख़र्च होगा, सो अलग. अलग-अलग देशों की करेंसी से आपके देश की करेंसी का एक्सचेंज रेट भी पता कर लें. इसका असर भी पढ़ाई के ख़र्च पर पड़ता है.

वैसे, ज़रूरी नहीं कि विदेश में पढ़ाई ख़र्चीली ही हो. कई बार ये सस्ती भी बैठती है. अब जैसे अमरीका का उदाहरण लें. वहां से बहुत से बच्चे, पढ़ने के लिए यूरोप जा रहे हैं. क्योंकि अमरीका के मुक़ाबले यूरोप में पढ़ाई सस्ती है. साथ ही इस बात की दिक़्क़त भी नहीं कि अलग भाषा में पढ़ना होगा. जर्मनी जैसे देश भी अंग्रेज़ी में कोर्स ऑफ़र करते हैं.

कई बार लोकल यूनिवर्सिटी के कोर्स की अवधि के लिहाज़ से भी, विदेश में पढ़ना सस्ता होता है. जैसे, ब्रिटेन की कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से आप एक साल में एमबीए की डिग्री ले सकते हैं.

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इसका ख़र्च बैठेगा क़रीब 70 हज़ार डॉलर यानी लगभग 47 लाख रुपए. लेकिन अगर आप यही डिग्री अमरीका की हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से लेंगे, तो एक तो कोर्स दो साल में पूरा होगा, और सालाना ख़र्च 70 हज़ार डॉलर के क़रीब ही होगा. फिर आपका एक साल भी ज़्यादा लगेगा.

हां, अगर आप लंदन में रहकर पढ़ते हैं, तो आपका रहने खाने का ख़र्च ज़्यादा आएगा. इसके मुक़ाबले मैनचेस्टर में पढ़ाई सस्ती होगी.

बच्चे का हेल्थ इंश्योरेंस ज़रूर कराएं- आपके साथ रहने पर, आपके बच्चे को आपके हेल्थ इंश्योरेंस का फ़ायदा मिलेगा. लेकिन, विदेश में पढ़ाई भी उसमें कवर होगी या नहीं, ये ज़रूर पता कर लें.

कई लोकल यूनिवर्सिटी, अपने छात्रों को विदेश भेजते वक़्त उनका हेल्थ इन्शोरेंस कराती हैं. वैसे कम्पास बेनेफिट्स ग्रुप और एचटीएच ट्रैवेल इंश्योरेंस जैसी कंपनियां, ख़ास विदेश पढ़ने जाने वालों के लिए हेल्थ इंश्योरेंस देती हैं.

बच्चे को मानसिक रूप से तैयार करें- विदेशी यूनिवर्सिटी में पढ़ना, काफ़ी चुनौतीपूर्ण है. आपका बच्चा आपसे दूर, दूसरे देश में होगा, अजनबियों के बीच होगा, लोग दूसरी भाषा बोलेंगे, तो बच्चे को ऐसी चुनौतियों का सामना करना सिखाएं, ताकि विदेश में पढ़ाई के दौरान उसे परेशानी न हो.

बहुत से बच्चे तो विदेश ऐसे पढ़ने जाते हैं, जैसे कि छुट्टियों में विदेश घूमने जा रहे हों. ऐसा सोचना पैसे और वक़्त दोनों की बर्बादी होगी. इस बारे में अपने बच्चे को ज़रूर समझाएं.

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तकनीक का फ़ायदा उठाएं- संचार क्रांति के इस दौर में किसी से भी कहीं पर भी, किसी भी वक़्त जुड़ना आसान है. तो विदेश पढ़ने गए अपने बच्चे से आप जुड़े रहें. इससे उसे घर से दूरी नहीं महसूस होगी. आप उससे वीडियो चैट कर सकते हैं. कॉल करना और मैसेज के ज़रिए बातचीत करना भी बेहद आसान है.

बच्चे को स्थानीय लोगों से घुलने मिलने के लिए कहें- विदेश में पढ़ाई के वक़्त लोगों को होम सिकनेस हो सकती है. ऐसे में वो बार-बार वीडियो चैट के ज़रिए आपसे ही बात करने की कोशिश करेंगे.

मगर बेहतर होगा कि आप अपने बच्चों को समझाएं कि वो स्थानीय लोगों से घुले मिले. वहां की भाषा-संस्कृति, खान-पान के बारे में जाने समझे, सीखे. इससे उसे ग्लोबल सिटिज़न बनने में आसानी होगी. ऐसा करके वो तेज़ी से कामयाबी की सीढ़ियां चढ़ सकता है.

उम्मीद है कि बच्चों को विदेश में पढ़ाने के बारे में ये टिप्स आपके काम आएंगे...तो...फ़टाफ़ट शुरू कीजिए रिसर्च...

अंग्रेज़ी में मूल लेख यहां पढ़ें, जो बीबीसी कैपिटल पर उपलब्ध है.

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