1000 साल बाद गले मिले दो चर्चों के प्रमुख

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हज़ार साल में पहली बार रोमन कैथोलिक चर्च के पोप फ्रांसिस और रूसी ऑर्थोडॉक्स चर्च के प्रमुख किरिल की बैठक हुई. इसके बाद ने दुनिया के दोनों बड़े चर्चों के प्रमुखों ने ईसाईयों के बीच एकजुटता की अपील की.

एक साझा बयान में उन्होंने विश्व से मध्य पूर्व में जारी हिंसा से ईसाईयों को बचाने की अपील की.

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बयान में कहा गया है, "मध्य पूर्व और उत्तर अफ्रीका में कई देशों में समूचे परिवार, गांव और शहर में ईसा में यक़ीन रखने वाले हमारे भाई बहनों को मिटाया जा रहा है."

"उनके चर्चों को बर्बरता से लूटा और तोड़ा जा रहा है, उनकी पवित्र चीज़ों को तोड़ा जा रहा है, और उनकी इमारतों को भी नष्ट किया जा रहा है."

बयान में कहा गया है, "हमें उम्मीद है कि हमारी बैठक से ईश्वर की इच्छा के अनुसार दोबारा एकता स्थापित करने में मदद मिलेगी."

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Image caption ईराक़ के सेंट एलिजा मोनास्ट्री की मार्च 2011 और सितंबर 2014 में उपग्रह से ली गई तस्वीरें

पोप शनिवार को 5 दिन के मेक्सिको को दौरे पर पहुंचे, जहां कड़ाके की ठंड का मुक़ाबला करते हुए 3 लाख लोग उनके स्वागत के लिए मौजूद थे. मेक्सिको कैथलिक ईसाईयों की आबादी वाला विश्व का सबसे अधिक देश है.

हवाई अड्डे पर राष्ट्रपति एनरिके पेना निएटो भी पोप से मिलने पहुंचे.

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11 शताब्दी में ईसाई के पूर्वी और पश्चिमी दो धाराओं में बंटने के बाद यह रोमन कैथोलिक चर्च और रूसी ऑर्थोडॉक्स चर्च प्रमुखों की पहली मुलाक़ात है.

पोप फ्रांसिस और रूसी ऑर्थोडॉक्स चर्च प्रमुख किरिल के बीच हवाना के हवाई अड्डे पर शुक्रवार को क़रीब दो घंटे बात हुई.

बैठक के बाद चर्च प्रमुख किरिल ब्राज़ील और पाराग्वे के दौरे पर रवाना हुए.

बैठक शुरु होने से पहले पोप और किरिल ने एक दूसरे को गले लगाया और चूमा.

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रूसी चर्च प्रमुख ने कहा, "मुझे आपसे मिल कर खुशी है, प्रिय भाई".

पोप ने कहा, "आख़िरकार."

बैठक के बाद एक कांफ्रेस में रूसी चर्च प्रमुख ने बताया कि बातचीत, "ख़ुल कर" और "दोस्ताना" थी. पोप ने इसे "बहुत ईमानदार" बताया.

वर्ष 1054 में इसाई चर्च पूर्वी और पश्चिमी चर्चों में विभाजित हो गया था. अध्यात्मिक मतभेद के इतने लंबे इतिहास के बाद दोनों चर्चों में तुरंत मैत्री की उम्मीद तो नहीं की जा रही थी. लेकिन इसे अपने आप में एक अहम शुरुआत माना जा रहा है.

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Image caption पोप फ्रांसिस और पेट्रियार्क किरिल

पोप फ्रांसिस ने मध्यपूर्व में मतभेद को हल करने के राजनयिक प्रयासों में रूसी ऑर्थोडॉक्स चर्च को शामिल करने का ज़िक्र किया था.

पेट्रियार्क किरिल राष्ट्रपति पुतिन के समर्थक हैं जिन्होंने पिछले साल रोम की यात्रा की थी और उन्होंने दोनों धार्मिक नेताओं की मुलाकात निश्चित करने में भी अहम भूमिका निभाई.

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