'स्वतंत्र विचारों वाली किताबें छापने से डर लगता है'

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Image caption बांग्लादेशी-अमरीकी ब्लॉगर अभिजीत रॉय

बांग्लादेश की राजधानी ढाका में ब्लॉगर अभिजीत राय की हत्या के एक साल बाद उनके पिता अजय राय का मानना है कि हत्याकांड की जांच में कोई ख़ास प्रगति नहीं हुई है.

बीते साल संदिग्ध इस्लामिस्ट चरमपंथियों ने बांग्लादेशी-अमरीकी ब्लॉगर अभिजीत रॉय की उस समय हत्या कर दी थी, जब वे एक पुस्तक मेले से लौट रहे थे.

उस हमले में उनकी पत्नी रफ़ीदा बानो अहमद बुरी तरह घायल हुई थीं.

पेशे से अध्यापक अजय राय अब भी अपने बेटे की हत्या के लिए इंसाफ़ का इंतज़ार कर रहे हैं.

उन्होंने बीबीसी से कहा, "अभिजीत के हत्यारों को सज़ा देने के मामले में मुझे कोई प्रगति नज़र नहीं आती. एक पिता के रूप में इंसाफ़ पाने की मेरी उम्मीद कम होती जा रही है. क्या मुझे कभी इंसाफ़ मिलेगा भी? ऐसा लगता है कि पुलिस इस हत्या की जांच करना ही नहीं चाहती."

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बडे पैमाने पर सामाजिक कार्यकर्ताओं और दूसरे धर्मनिरपेक्ष लोगों ने पूरे बांग्लादेश में इसका ज़बरदस्त विरोध किया था.

धर्मनिरपेक्ष और ख़ुद को नास्तिक कहने वाले छह ब्लॉगर और प्रकाशक अब तक मारे जा चुके हैं. अभिजीत इनमें एक थे.

इस साल पुस्तक मेले के आयोजकों ने लेखकों और प्रकाशकों को सलाह दी है कि वे ऐसी किताबें मेले में न रखें, जिनसे लोगों की 'धार्मिक भावनाएं आहत' होती हों.

बांग्लादेश में बीते 40 साल से 'एकुशे फ़्रेबुआरी' (इक्कीस फरवरी) पुस्तक मेले का आयोजन होता आ रहा है. इससे लेखकों और प्रकाशकों की अभिव्यक्ति की आज़ादी को बल मिल रहा है.

लेकिन धर्मनिरपेक्ष लेखकों और ब्लॉगरों की सिलसिलेवार हत्या के बाद इस साल कुछ प्रकाशक घबराए हुए हैं.

एक प्रकाशक ने बीबीसी से कहा, "हमें ऐसी किताबें प्रकाशित करने में डर लग रहा है, जो स्वतंत्र सोच को बढ़ावा देती हैं. हम ऐसी किताबें नहीं छाप रहे हैं, जो धार्मिक रूप से संवेदनशील हो सकती हैं. यह बहुत मुश्किल समय है."

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जाने-माने धर्मनिरपेक्ष लेखक मुंतसिर मामून को भी मौत की धमकियां मिली हैं. वे कभी कभी ही घर से बाहर निकलते हैं.

वे कहते हैं, "मेरा परिवार नहीं चाहता कि मैं स्वतंत्र रूप से कहीं घूमूं, क्योंकि मुझे मौत की धमकियां कई बार मिल चुकी हैं. एक लेखक के रूप में मेरी नैतिक ज़िम्मेदारी है कि मैं वही लिखूं जिस पर मुझे विश्वास है."

दूसरी ओर, कट्टरपंथी इस्लामिस्ट गुट नास्तिक लेखकों के लिए मौत की सज़ा की मांग करते हुए लामबंद हो चुके हैं.

ब्लॉगरों-प्रकाशकों की हत्या के लिए तो किसी को सज़ा नहीं ही मिली, पर सरकार ने लेखकों को यह सलाह ज़रूर दी है कि धर्म, खासकर इस्लाम, पर लिखते हुए थोड़ा सावधान रहें.

बांग्लादेश के सूचना मंत्री हसनुल हक़ ईनू कहते हैं कि उनकी सरकार धर्मनिरपेक्षता में यकीन करती है, लेकिन धार्मिक रूप से संवेदनशील लेखन की अनुमति नहीं दे सकती.

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हक़ कहते हैं, "अभिजीत रॉय और अन्य ब्लॉगरों के हत्यारों को बख़्शा नहीं जाएगा. हम अभी तक उन्हें पकड़ नहीं पाए हैं. इसमें कुछ समय लग रहा है लेकिन इंसाफ़ किया जाएगा."

उधर पुस्तक मेले में शामिल कई लेखकों को लगता है कि बांग्लादेश में धर्मनिरपेक्ष विचारों के लिए जगह कम हो रही है.

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