पाकिस्तान में छाया 'बायकॉट धर्मशाला'

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हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह पाकिस्तान में सोशल मीडिया पर छाए हैं और धर्मशाला में मैच के बहिष्कार की अपीलें हो रही हैं.

वीरभद्र भी धर्मशाला में टी-20 वर्ल्ड के तहत भारत-पाक मैच का विरोध करने वालों में शामिल हैं. पाकिस्तान में कई यूज़र्स वीरभद्र के बयान को 'नफरत फैलाने वाला बयान' बता रहे हैं.

पठानकोट एयरबेस में पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कुछ पूर्व सैनिक इस मैच का विरोध कर रहे हैं और मुख्यमंत्री वीरभद्र भी मैच न कराने के लिए केंद्र सरकार को कह चुके हैं.

वीरभद्र ने क्रिकेटरों को सुरक्षा देने की बात तो मानी लेकिन यह भी कहा कि पुलिस पूर्व सैनिकों को नहीं रोकेगी और उन पर लाठीचार्ज भी नहीं होगा.

पाकिस्तान के पूर्व कप्तान और तहरीक-ए-इंसाफ़ पार्टी के प्रमुख इमरान ख़ान ने इस मैच का बहिष्कार करने की मांग की है.

इमरान ख़ान ने कहा, "हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री का बयान ग़ैरज़िम्मेदाराना और मेजबानी और आयोजन के मानकों के पूरी तरह ख़िलाफ़ है."

1992 में अपनी कप्तानी में पाकिस्तान को विश्व कप जिताने वाले इमरान ने कहा, "मुख्यमंत्री का बयान साफ़ तौर पर नफ़रत को बढ़ावा देता है. ऐसे हालात में, मैं नहीं समझता कि पाकिस्तान टीम को हिमाचल प्रदेश में खेलना चाहिए."

इमरान ख़ान के बयान के बाद पाकिस्तान में ट्विटर पर #BoycottDharamsalaT20 ट्रेंड करने लगा.

एक यूज़र आयशा बलोच ने ट्वीट किया, "अगर भारत पाकिस्तान क्रिकेट टीम को सुरक्षा नहीं दे सकता, तो पाकिस्तान को मेहमान नहीं बनना चाहिए."

एक अन्य यूज़र फ़रहान विर्क ने लिखा, "यदि भारत सरकार कट्टरपंथियों को क़ाबू नहीं कर सकती, तो खेलने का कोई तुक नहीं है."

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हसन नियाज़ी ने पोस्ट किया, "पाकिस्तान को विश्व कप का बहिष्कार कर देना चाहिए."

यही नहीं, पाकिस्तान के अंग्रेज़ी दैनिक 'द नेशन' ने भी संपादकीय में वीरभद्र की टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया जताई है.

अख़बार लिखता है, "आईसीसी इस मसले पर अपनी आंखें बंद कर सकता है, लेकिन पाकिस्तान की भागीदारी वाले अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटो के लिए भारत जोखिम भरा स्थान बनता जा रहा है- शायद अगली बार एक 'तटस्थ' मैदान ज़्यादा उपयुक्त हो."

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