'जो मारी गई, वो कुछ दिनों में मां बनने वाली थी'

  • 10 मार्च 2016
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अब सारे दिन एक जैसे लगते हैं. विद्रोह ने मेरी उम्मीदें और सपने जगा दिए. मैं अपना देश छोड़ने और कहीं और एक बेहतर ज़िंदगी गुज़ारने के सपने देखने लगा.... लेकिन अब ऐसा संभव नहीं था.

बहरहाल, मेरे देश को मेरी ज़रूरत है... मैं उसे पुकारते हुए सुनता, जैसे एक मां बेटे को पुकारती है.

यह सुबह-सुबह की बात थी जब लड़ाकू विमानों के शोर ने मुझे जगा दिया.... मैं धमाकों की आवाज़ें सुन सकता था और मेरे पड़ोस के बच्चों के रोने की भी.

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यह कड़वी सच्चाई का सामने आना था. मेरे भाई और मैं बाहर देखने गए कि क्या हो रहा है. हमारा एक पड़ोसी पागलों की तरह भाग रहा था. वह सबसे पूछ रहा था कि क्या किसी ने उसके बेटे को देखा है.

"वह ब्रेड ख़रीदने गया था."

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हमारे पास मौजूद लोगों ने कहा कि बमों ने नईम गोल चक्कर के पास अबू मोहम्मद के घर को निशाना बनाया है. जितनी तेज़ी से हो सकता था हम वहां भागे ताकि क्षत-विक्षत लाशों को ढूंढ सकें. उनमें से एक लाश गर्भवती महिला की थी. पड़ोसियों ने बताया कि वह कुछ ही दिन में बच्चे को जन्म देने वाली थी.

फिर लड़ाकू विमानों का शोर तेज़ हो गया. एक हमारे ऊपर ही था. हम सब तितर-बितर हो गए. यह एक सफ़ेद जहाज़ था, वैसा ही जिसने कुछ दिन पहले हमला किया था.... एक रूसी विमान.

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जब जहाज़ चले गए तो मैं उठा और उस दुकान की तरफ़ बढ़ा, जहां मैं काम करता था. मेरे बॉस ने, जो चुपचाप चाय सुड़क रहे थे, मुझे एक थकी हुई मुस्कान के साथ देखा. यह बहुत अजीब था, वह सामान्यतः चाय के साथ सिगरेट पीते थे.

लेकिन आईएस ने धूम्रपान पर प्रतिबंध लगा दिया है. सिगरेट की गंध आने पर वह सिगरेट पीनेवाले को सबसे सामने अपमानित करते, फिर पीटते, जैसे कि वह कोई अपराधी हो.

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जब हम लोग बात कर रहे थे, तभी दो आदमी काग़ज़ लिए अगली दुकान के दरवाज़े पर पहुंचे. कुछ सेकेंड बाद वह हमारे दरवाज़े पर आए. उन्होंने एक भी शब्द कहे बग़ैर जाने से पहले हम दोनों को एक काग़ज़ का टुकड़ा दिया.

यह आईएस का एक आदेश था, जिसमें दुकानों पर सभी टेलीविजनों पर प्रतिबंध लगाने को कहा गया था. हमारे पास उन्हें हटाने के लिए एक हफ़्ता था. ऐसा लगता था कि यह पर्याप्त नहीं था कि हम लोग बाहरी दुनिया से बात न कर पाएं. अब वह हमें इसे देखना भी नहीं देना चाहते थे.

कुछ देर बाद एक दोस्त दुकान में आया. हमने उसे तबसे नहीं देखा था जब एक महीने पहले आईएस ने उसे चौथी बार गिरफ़्तार किया था.

मैं चिल्लाया, "तुम ज़िंदा हो? हमने सोचा कि तुम मर गए हो!"

उसके चेहरे पर कमज़ोर मुस्कान के साथ हंसी आई. उसने मुझे बताया कि पिछली बार उसे इसलिए गिरफ़्तार किया गया था क्योंकि उसकी पैंट बहुत लंबी थी. आईएस की ज़िद है कि यह टखने से ऊपर होनी चाहिए. जो भी इस नियम का उल्लंघन करता है उसे लंबा समय शरिया अदालत में गुज़ारना होगा.

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फिर मेरा मोबाइल बज गया, यह मेरी मां थी. उसने घर के लिए कुछ परचून का सामान लाने को कहा. लेकिन आजकल मैं बहुत ज़्यादा कुछ ले नहीं सकता. टमाटर अब 400 सीरियाई पाउंड से ज़्यादा हैं और चावल करीब 500 पाउंड के! बहुत ख़राब हालत है.

वापस लौटते हुए मैं बहुत सारे बहाने सोच रहा था कि मैं खाने का सामान इतना कम लेकर क्यों आया. लेकिन मुझे इसकी ज़रूरत नहीं पड़ी. ज़्यादातर अभिभावकों की तरह मेरी मां भी यह देखकर ही ख़ुश थी कि मैं गिरफ़्तार नहीं हुआ या मारा नहीं गया.... मैं फिर सुरक्षित घर आ गया हूं.

(अल-शरकिया 24 के एक्टिविस्ट आइएस की कथित राजधानी रक्का में रह रहे हैं. अल-शरकिया 24 आइएस के कब्ज़े वाले स्थानों के हालात के बारे में दुनिया को बताने के लिए काम कर रहे समूहों में से एक है. यह स्टोरी बीबीसी संवाददाता माइक थॉमसन से इस एक्टिविस्ट की लंबी बातचीत पर आधारित है. इस डायरी का चौथा पन्ना शुक्रवार को पढ़िए.)

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