'शांति सेना पर लगाम लगाने की ज़रूरत'

  • 11 मार्च 2016
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संकट ग्रस्त इलाकों में शांति कायम करने के लिए संयुक्त राष्ट्र के शांति सैनिकों की तैनाती होती है, लेकिन कई बार इन सैनिकों स्थानीय लोगों का शोषण और यौन उत्पीड़न तक करने के आरोप लगते हैं.

इस समस्या से निपटने के लिए सुरक्षा परिषद में संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बान की मून ने कड़े कदम उठाने पर जोर दिया.

उन्होंने कहा, "शांति सैनिकों के यौन उत्पीड़न और शोषण पर निर्याणक और कड़े कदम उठाने ही होंगे. मैं सदस्य देशों के साथ मिल कर इस आपराधिक कृत्य से निपटने के लिए काम करूंगा ताकि जिन लोगों का भरोसा हम पर है. उन्हें यकीन दिलाया जाए कि ये संस्था संकट में घिरे लोगों के लिए उम्मीद की किरण है."

संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने कहा कि उस टुकड़ी को ही निकाल दिए जाए जिसके सैनिकों पर बार बार यौन उत्पीड़न और शोषण के इल्जाम लगते हों.

संयुक्त राष्ट्र ने शांति सैनिकों पर लगने वाले यौन उत्पीड़न और खास कर बच्चों के यौन उत्पीड़न के आरोपों से निपटने के लिए एक प्रस्ताव का मसौदा तैयार किया है.

इस प्रस्ताव को बान की मून का पूरा समर्थन प्राप्त है.

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मून का मानना है कि जब यौन उत्पीड़न और शोषण वहीं लोग करने लगे जो बचाने के लिए तैनात किए गए हैं तो इससे स्थानीय लोग और प्रताड़ित होते हैं और पहले से ही मुश्किलों में घिरे समुदाय को न जाने क्या- क्या झेलना पड़ता है.

इससे संयुक्त राष्ट्र पर उनका भरोसा टूटता है, जिन मूल्यों को लेकर संयुक्त राष्ट्र चलता है. उनसे धोखा होता है और संयुक्त राष्ट्र शांति सेना और समूचे संयुक्त राष्ट्र की विश्वसीनीयता तार तार होती है.

समाचार एजेंसी एपी के अनुसार अमरीका ने कहा है कि शुक्रवार को इस बारे में गए प्रस्ताव पर सुरक्षा परिषद में मतदान होना चाहिए.

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संयुक्त राष्ट्र में अमरीकी राजदूत समांता पावर ने कहा कि यौन अपराधों और खास कर बच्चों के खिलाफ होने वाले यौन अपराधों को रोकने के लिए बहुत जरूरी है.

हालांकि रूस, मिस्र और सेनेगल ने इस प्रस्ताव का विरोध किया. उनका कहना है कि ये पूरी टुकड़ी को सजा देने के बराबर होगा जबकि सज़ा सिर्फ दोषी सैनिक को मिलनी चाहिए.

लेकिन सेनेगल के राजदूत फोडे सेक और अन्य ने जोर देकर कहा कि सुरक्षा परिषद को ये बात भी सुनिश्चित करने चाहिए कि चंद लोगों के किए की सजा सब लोगों को न मिले.

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