क्या बॉस आपको डराते-धमकाते हैं?

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क्या आपके बॉस आपको डरा-धमकाकर रखते हैं? क्या वो हर मौक़े पर अपने मातहतों को ग़लत साबित करने में जुटे रहते हैं?

क्या आपके बॉस हर मीटिंग के बाद अपने मैनेजरों को कहते हैं कि जूनियर कर्मचारियों के काम की रेटिंग करें?

आपने तमाम ऐसे क़िस्से सुने होंगे, जिसमें ऐसे बॉस ने अपने मातहतों को डरा-धमकाकर, अपमानित करके तरक़्क़ी की सीढ़ियां चढ़ी हों.

ऐसे बॉस बुरे सपने जैसे होते हैं. वो डर का माहौल बनाकर रखते हैं, ताकि बेहतर नतीजे हासिल कर सकें, तेज़ी से तरक़्क़ी कर सकें.

लंदन की मनोविशेषज्ञ जोआन किंग्सले कहती हैं कि डर, इंसान का बुनियादी जज़्बा है. अक्सर लोग बिना नतीजे की परवाह किए, डर का माहौल बनाकर रखते हैं.

ऐसे बॉस जो लोगों को डरा-धमकाकर रखते हैं, उनकी नज़र असल में जल्द से जल्द टारगेट पूरा करने और बेहतर नतीजे हासिल करने पर होती है. उन्हें अपनी तरक़्क़ी का यही सही नुस्खा लगता है.

मगर, जानकार यह भी कहते हैं कि हर बार डर दिखाकर काम कराने का तरीक़ा भारी भी पड़ सकता है.

बहुत कम लोग होते हैं जो ऐसे 'निरंकुश शासन' में काम कर सकते हैं. जल्द ही उनमें तनाव घर कर जाता है. फिर नौकरी छोड़कर भागने लगते हैं लोग. फिर भी आख़िर ऐसा क्या है कि लोग भय का माहौल बनाकर काम कराने में कामयाब रहते हैं?

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ऑफ़िस में अक्सर डर इससे लगता है कि आपको किस तरह ग़लत समझा जा रहा है. ऐसे माहौल में लोग अक्सर तिकड़म के आदी हो जाते हैं. नौकरी बचाने और आगे बढ़ने के लिए वो अपमान और नाइंसाफ़ी बर्दाश्त करने लगते हैं.

इंसान की बुनियादी समझ यह होती है कि वह अच्छा दिखे और ख़राब दिखाए जाने से बचे.

अमेरिकी कम्युनिकेशन एक्सपर्ट डेविड कनिंघम कहते हैं, "असल में बिना डर वाले, हँसी-ख़ुशी से काम करने के माहौल में लोग ज़्यादा अच्छे से काम करते हैं. जहां धमकी का डर न हो, वहां लोग सवाल उठाने से डरते नहीं, अपने भविष्य को लेकर फ़िक्रमंद नहीं रहते."

उनका कहना है कि इससे काम पर उनका फ़ोकस बढ़ता है. इसके उलट, डर भरे माहौल में लोगों का अच्छा ख़ासा टाइम नौकरी बचाने की तिकड़म भिड़ाने में निकल जाता है. इसका असर काम पर पड़ना तय होता है.

जब डराने-धमकाने के इतने नुक़सान हैं, तो भी बॉस ऐसा माहौल क्यों बनाते हैं आख़िर?

असल में ऐसा माहौल बनाने वाले बॉस वो लोग होते हैं, जिनसे बात करना मुश्किल होता है. उनके फ़ैसलों पर सवाल खड़ा करना और भी मुसीबत भरा. इससे मातहतों को लेकर उनके मन में ग़लत धारणा घर कर जाती है.

जानकार कहते हैं कि ऐसे माहौल में थोड़े समय के लिए तो टीम अच्छा काम करती है, पर आगे चलकर इससे दुश्वारियां ही ज़्यादा खड़ी होती हैं.

इसकी वजह शायद यह है कि ऐसे बॉस ख़ुद अंदर से डरे होते हैं. उन्हें ख़ुद अपनी क़ाबिलियत पर भरोसा नहीं होता. इसलिए सवालों का सामना करने से बचने के लिए वो अपने इर्द-गिर्द डर की दीवार खड़ी कर लेते हैं.

कई बार ये बॉस जान ही नहीं पाते कि उनके बर्ताव से उनके बारे में ग़लत राय बन रही है. वो सोचते हैं कि वो जो कर रहे हैं वही सही है. अक्सर डर तब आता है जब आपके मन में ख़ुद कन्फ़्यूज़न हो, सही बात पता न हो.

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जब आप दूसरे आदमी को अच्छी तरह जानते-समझते नहीं. वो क्या कर सकते हैं, इसका अंदाज़ा नहीं होता, तो बॉस डर का माहौल बनाते हैं. वैसे अक्सर लोग जान-बूझकर डराने-धमकाने वाली रणनीति पर अमल नहीं करते. वो असल में अपने भीतर के डर से निपटने के लिए ऐसा करते हैं. क्योंकि उन्हें सामने वाले की क़ाबिलियत पर यक़ीन नहीं होता.

अब सवाल ये उठता है कि आख़िर ऐसे माहौल से निपटें कैसे?

जानकार इसके लिए कई तरीक़े बताते हैं. पहला तो ये है कि आप हर उस छोटी-बड़ी बात का हिसाब रखें, जब आपके बॉस ने आपको बेवजह फ़टकार लगाई हो, अपमानित किया हो. इसकी वजह, तारीख़, जगह सब नोट करके रखें. उन लोगों के नाम भी लिखें जिनकी मौजूदगी में ऐसा हुआ. ये सब काम हिसाब घर में करें तो ज़्यादा अच्छा होगा.

इलेक्ट्रॉनिक नोटबुक की जगह इसके लिए काग़ज़ वाली नोटबुक का इस्तेमाल करें. आगे चलकर आपको उस ख़ास दिन की बातें याद करने में सहूलियत होगी. इनकी मदद से ज़रूरत पड़ने पर अपनी एचआर टीम के सामने आप अपनी बात सही ढंग से रख सकेंगे.

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यूरोप में ऐसी ही भयानक महिला बॉस के ख़िलाफ़ शिकायत करने वाली एक महिला को किसी का साथ नहीं मिला. क्योंकि एचआर के लोग भी बॉस के पक्ष में ही खड़े हो गए. ऐसे में शिकायतकर्ता उस सख़्त मिज़ाज बॉस के साथ काम करने को मजबूर हो गई.

वैसे कई बार ऐसे माहौल से निपटने का सबसे अच्छा तरीक़ा, नौकरी बदलना होता है. अगर आपको लगता है कि कंपनी के अंदर आपकी शिकायतें सुनने वाला, उनका निपटारा करने वाला कोई नहीं. तो, बेहतर होगा कि आप वहां से निकल लें. क्योंकि कई लोग, ऐसे माहौल में काम करने का तनाव नहीं झेल पाते. उनका नर्वस ब्रेकडाउन हो जाता है.

एक और तरीक़ा जो ऐसे बॉस से निपटने का है वो है बॉस की हँसी उड़ाने का. आप उनकी धमकियों को, डराने वाले हाव-भाव को मज़ाक में उड़ा दें.

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फ्रांस में एक हवाई कंपनी की कर्मचारी ने ऐसा ही किया. उसका बॉस हमेशा डरा-धमकाकर काम करता था. उसका ये तरीक़ा, उसके बॉस को भी पसंद था क्योंकि वह लगातार अपने टारगेट पूरे कर रहा था.

मगर, जब इस बॉस ने महिला कर्मचारी को धमकाने की कोशिश की, तो उसने अपने तजुर्बे से काम लिया. अपने बॉस को घूरकर देखा, जैसे कहना चाह रही हो, ‘बहुत देखे हैं तुम्हारे जैसे. मुझे धमकाने की कोशिश न करो. मैं डरने वाली नहीं.’

अपने बॉस के धमकाने वाले अंदाज़ की अनदेखी करके, आप आसानी से कई मुश्किलों से पार पा सकते हैं.

(अंग्रेज़ी में मूल लेख यहां पढ़ें, जो बीबीसी कैपिटल पर उपलब्ध है.)

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