'तासीर के क़ातिल ने वो किया जो कौम न कर सकी'

स्कॉटलैंड की सबसे बड़ी मस्जिद के इमाम ने पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के गवर्नर सलमान तासीर के क़ातिल मुमताज़ क़ादरी की तारीफ़ की है.

ग्लासगो की जामा मस्जिद के इमाम मौलाना हबीबुर रहमान ने वॉट्सऐप पर क़ादरी के लिए समर्थन जताया.

बाद में एक बयान जारी कर इमाम ने कहा कि उनके संदेश को गलत मायने में लिया गया है और वह मौत की सज़ा के ख़िलाफ़ बोल रहे थे.

बीबीसी ने व्हाट्सऐप पर जो संदेश देखा है, उसमें मौलाना कह रहे हैं कि वह क़ादरी की मारे जाने से 'दुखी' और 'परेशान' हैं.

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इसके बाद उन्होंने 'रहमतुल्लाहि अलाइ' लिखा है जो आमतौर पर धर्मपरायण मुसलमानों के लिए की जाने वाली दुआ है.

एक अन्य संदेश में उन्होंने लिखा, "मैं आज अपने दर्द को छिपा नहीं पा रहा हूँ. एक सच्चे मुसलमान को उस बात की सज़ा मिली है, जिसे पूरे देश की सामूहिक चेतना लागू करने में नाकाम रही थी."

मौलाना हबीबुररहमान की गिनती ग्लासगो मस्जिद के सबसे वरिष्ठ इमामों में है. मस्जिद में उनका प्रमुख काम मुस्लिम समाज को धार्मिक शिक्षा और मार्गदर्शन देना है.

बीबीसी ने उस व्हाट्सऐप ग्रुप के सदस्यों से मौलाना के संदेश की तस्दीक की है. सदस्यों ने संदेश को प्रमाणित करते हुए कहा कि यह संदेश इमाम की ओर से ही भेजा गया है.

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पाकिस्तान में पंजाब प्रांत के गवर्नर सलमान तासीर के क़ातिल मुमताज़ क़ादरी की फांसी के बाद उनके नमाज़े जनाज़ा में रावलपिंडी में एक लाख लोग से ज़्यादा लोग इकट्ठे थे.

गवर्नर सलमान तासीर ईशनिंदा क़ानून के ख़िलाफ़ थे और उनके सुरक्षा गार्ड मुमताज़ क़ादरी ने उनकी 2011 में हत्या कर दी थी.

तब तासीर के हत्यारे क़ादरी को कई कट्टरपंथी इस्लामी लोगों ने 'हीरो' माना था. उनकी सज़ा का विरोध भी किया गया था.

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पाकिस्तान में ईशनिंदा क़ानून बहुत सख़्त है और इसके तहत अगर कोई इस्लाम का अपमान करता है तो उसे मौत की सज़ा हो सकती है.

मानवाधिकार संगठनों का आरोप है कि पाकिस्तान के विवादास्पद ईशनिंदा क़ानून को निजी रंजिश निकालने के लिए इस्तेमाल किया जाता है.

तासीर ने राष्ट्रपति से ईशनिंदा क़ानून के तहत मौत की सज़ा पाने वाली एक ईसाई महिला को माफ़ी देने की अपील की थी.

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