लंदन के गुजराती गांव में दहाड़ा शेर

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लंदन के चिड़ियाघर में अब एशियाई शेरों की दहाड़ सुनाई देगी. लंदन ज़ू में "शेरों की भूमि" आम जनता के लिए खोली जा रही है.

यहां चार एशियाई शेर हैं और उनके साथ एक परिसर बनाया गया है, जो गुजरात में गीर के जंगल के एक गांव से मेल खाता है.

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इसका उद्घाटन ब्रिटेन की महारानी ने किया. उद्घाटन कार्यक्रम में तालियों और संगीत के साथ शेरों की दहाड़ भी सुनाई पड़ रही थी.

लंदन के गुजराती समुदाय के सहयोग से बने इस परिसर को गुजरात के गांव सासन जैसा बनाया गया है.

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परिसर में रहने की भी व्यवस्था है. एक दंपत्ति को यहां एक रात रुकने के लिए 35 हज़ार रुपए खर्चने होंगे.

हालांकि चिड़ियाघर ज़ोर देकर कहता है कि यह पैसा कमाने का ज़रिया नहीं है.

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ज़ूलॉजिकल सोसायटी ऑफ़ लंडन के निदेशक डेविड फ़ील्ड कहते हैं, "इस प्रदर्शनी के ज़रिए हम अपने डॉक्टरों, रखवालों, पशुओं की देखभाल करने वालों, संरक्षणकर्ताओं सभी के लिए पैसा जुटा सकते हैं जो सभी गुजरात जाकर हमारे सहयोगी भारतीय वन्यजीव संस्थान और गुजरात वन विभाग के साथ काम कर सकते हैं ताकि वहां शेरों के सरंक्षण में मदद हो सके."

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गीर वन्यजीव अभ्यारण्य दुनिया में एशियाई शेरों का सबसे बड़ा ठिकाना है. पिछली गणना में यहां 543 शेर पाए गए थे.

शेरों को यह अहसास दिलाने के लिए कि वो गीर के अपने घर में हैं, इस परिसर में छोटी दुकानें, ऑटो रिक्शा, बंदर और एक अस्थायी बाज़ार भी रखे गए हैं.

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एक पशु संरक्षण समूह ने इस चिड़ियाघर की आलोचना की है. केप्टिव एनिमल्स प्रोटेक्शन सोसायटी का कहना है कि जानवरों को पिंजरों में क़ैद करना अच्छी बात नहीं है.

लेकिन चिड़ियाघर में कार्यक्रम प्रबंधक डॉ गीतांजलि भट्टाचार्य का मानना है कि ऐसे प्रोग्राम जानवरों के बारे में समझ बढ़ाते हैं.

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उन्होंने बीबीसी को बताया, "10 लाख से ज़्यादा लोग हमारे चिड़ियाघर का दौरा करने आते हैं. हम इस क्षेत्र में लोगों की जागरूकता बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं."

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