'कई लाशें हवा में उछल रही थीं'

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"जब विस्फोट हुआ तो पेड़ों से भी ऊंची आग की लपटें उठ रही थीं, और कई लोगों की लाशें हवा में उछल रही थीं."

लाहौर के एक पार्क में रविवार को एक आत्मघाती हमले के चश्मदीद 30 साल के स्थानीय निवासी हसन इमरान ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया.

इस हमले में अब तक 22 बच्चों सहित 70 लोगों की मौत हो चुकी है. जब ये हमला हुआ तो वहां ईस्टर मनाया जा रहा था.

पाकिस्तानी तालिबान से अलग हुए गुट जमात-उल-अहरार ने हमले की ज़िम्मेदारी ली है और कहा है कि 'उन्होंने जान-बूझकर ईसाई समुदाय को निशाना बनाया है.'

एक और चश्मदीद दानिश बताते हैं कि जब वे ईस्टर मनाने पार्क पहुंचे तो वहां इतनी भीड़ थी कि वे गेट के भीतर नहीं जा पा रहे थे.

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उन्होंने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया. "हम कुछ खाने के लिए कैंटीन की ओर निकले ही थें कि तभी काफी तेज विस्फोट की आवाज सुनाई दी."

"सभी घबरा गए, और इधर-उधर भागने लगे. उनमें से कई गेट पर रोक दिए गए. हर तरफ लाशें ही लाशें दिखाई दे रही थीं."

अपना नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर एक व्यक्ति ने समाचार एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस को बताया कि उन्होंने घटनास्थल से 20 बच्चों को अस्पताल पहुंचाया.

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वे कहते हैं, "उस समय माहौल इतना दर्दनाक था कि मैं बयां नहीं कर सकता."

पाकिस्तान के जियो टीवी से बातचीत में एक और व्यक्ति ने बताया कि जब वे अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ फेयरग्राउंड राइड के लिए जा रहे था तभी जोरदार धमाका हुआ और वे चारों जमीन पर गिर पड़ें.

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पुलिस अफसर हैदर अशरफ ने बताया कि चरमपंथियों के लिए पार्क हमेशा से आसान निशाना रहा है.

उनका कहना है कि जहां पाकिस्तान में युद्ध जैसी परिस्थिति है और इसके बावजूद पार्क पर किसी तरह के ख़तरे की कोई खास चेतावनी जारी नहीं की गई थी.

पंजाब के मुख्यमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने ट्वीट करते हुए कहा, "कायरों ने जिस तरह से हमारे बच्चों का ख़ून बहाया है उस ग़ुस्से और दर्द को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता."

लाहौर हमले को देखते हुए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ ने अपना ब्रिटेन दौरा स्थगित कर दिया है. साथ ही, देश में तीन दिन के शोक की घोषणा की गई है.

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