दुनिया में तेज़ी से बढ़ रहा है बर्फ़ का कारोबार !

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आज बर्फ़ का इस्तेमाल हमारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में बेहद आम हो गया है.

आइस टी बनाना हो, शर्बत ठंडा करना हो, कॉकटेल बनाना हो, या चोट सेंकना हो, बर्फ़ हमारी ज़िंदगी में बेहद अहम हो गई है.

तो इन सबके लिए आप बर्फ़ कहां से जुटाते हैं? फ्रिज में जमाया और इस्तेमाल किया. यही जवाब होगा न आपका. घर में रोज़मर्रा के इस्तेमाल के लिए शायद ही कोई बर्फ़ ख़रीदता होगा.

मगर, आपको हैरानी होगी कि आज दुनिया में बर्फ़ का कारोबार तेज़ी से फैल रहा है. दुनिया यूं तो आगे बढ़ रही है, मगर, बर्फ़ के मामले में मानों हम पुराने दौर की तरफ़ लौट रहे हैं.

पुराना जमाना इसलिए क्योंकि तब घर-घर में बर्फ़ नहीं जमायी जाती थी. इसका बाक़ायदा कारोबार होता था. लोग इस्तेमाल के लिए बर्फ़ ख़रीदते थे. आज फिर वही दौर लौट आया है.

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ब्रिटेन का यॉर्कशायर शहर बर्फ़ के कारोबार का केंद्र बन गया है. यहां किर्कबी इलाक़े में ''द आइस कंपनी'' नाम की बर्फ़ का कारोबार करने वाली कंपनी की फैक्ट्री है.

फैक्टरी के अंदर जाएंगे तो आपको लगेगा कि आप इंगलैंड में नहीं साइबेरिया में हैं. सिर से पांव तक जैकेट में बंद, हेलमेट लगाए लोग, बर्फ़ के बक्सों के इर्द-गिर्द मंडराते दिखेंगे.

फैक्टरी के अंदर का तापमान सामान्य से 21 डिग्री सेल्सियस नीचे (-20 डिग्री) है. जबकि बाहर मौसम खिला हुआ है. तापमान दस डिग्री सेल्सियस है. इस माहौल में चल रही है यूरोप की सबसे बड़ी आइस फैक्ट्री.

इस फैक्टरी में रोज़ पांच सौ टन बर्फ़ तैयार की जाती है. इतनी बर्फ़ से इंसानों के चार हज़ार बुत बनाए जा सकते हैं. या फिर इटली के वेनिस शहर के पूरे दिन का बर्फ़ का ख़र्च पूरा हो सकता है.

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द आइस कंपनी, बर्फ़ बेचने की यूरोप की सबसे बड़ी कंपनी है. ये कंपनी फ्रांस, डेनमार्क, स्वीडन और यहां तक कि हांगकांग और ऑस्ट्रेलिया तक को बर्फ़ बेचती है.

आज जब हम अपने घरेलू फ्रिज से बर्फ़ निकालकर इस्तेमाल करने के आदी हो गए हैं. ये जानकर हैरानी होती है कि बर्फ़ बेचने का कारोबार इतना बड़ा हो सकता है.

वैसे आज से कुछ दशक पहले भी ऐसा ही होता था. घरों में बर्फ़ जमाने का चलन नहीं था. आज फिर से बर्फ़ ख़रीदना रईसाना आदत बन रहा है.

मध्य युग में यूरोप में सबसे पहले बर्फ़ जमाने का चलन स्पेन, फ्रांस और इटली में शुरू हुआ था.

यूरोपीय पैकेज्ड आइस एसोसिएशन की मेरीज़ प्रायर कहती हैं कि तब, लोग काला सागर जाकर, वहां से बर्फ़ नावों में लादकर लाते थे. फिर उसे पानी में रखा जाता था या फिर ज़मीन में गाड़कर लंबे वक़्त तक इस्तेमाल के लिए रखा जाता था.

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यॉर्कशायर की द आइस कंपनी की मूल कंपनी 'जे मार्र ग्रुप' ने भी इसी तरह से बर्फ़ का कारोबार शुरू किया था. कंपनी की निदेशक पॉली मार्र के पुरखे जोसेफ़ मार्र ने मछलियां बेचने का धंधा शुरू किया था, 1860 में.

चुनौती ये थी कि ताज़ा पकड़ी गई मछलियों को ताज़ा कैसे रखा जाए? इस परेशानी का हल ये निकाला गया कि नॉर्डिक देशों की तरफ़ जाकर वहां से नाव में बर्फ़ लादकर लाई जाए. फिर उसमें मछलियों को रखा जाए ताकि वो लंबे वक़्त तक ताज़ा रह सकें.

वैसे तो मार्र परिवार ने 1927 में ही बर्फ़ बनाने की फैक्ट्री लगा ली थी. मगर, इसका कारोबार 1960 के दशक में शुरू किया. जब पॉली मार्र के दादा अमेरिका गए तो वहां उन्होंने बाज़ार में पैकेट में बंद बर्फ़ बिकती देखी. इसी से उन्हें इंग्लैंड में भी ये कारोबार करने की सूझी.

आज की तारीख़ में द आइस कंपनी, यूरोप में बर्फ़ बेचने के धंधे की बड़ी खिलाड़ी बन चुकी है.

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2006 में मार्र परिवार ने अपने दूसरे सारे धंधे बंद करके सिर्फ़ बर्फ़ बेचने पर फ़ोकस कर दिया है. उन्होंने आस-पास की कई छोटी-बड़ी बर्फ़ बनाने वाली कंपनियां ख़रीदकर एक नए ब्रांड के नाम से ये कारोबार चालू किया.

साल 2012 के लंदन ओलंपिक के लिए उन्होंने बर्फ़ की सप्लाई की. जो सिर्फ़ खाने पीने के इस्तेमाल के लिए नहीं थी. उन्होंने खिलाड़ियों को चोट लगने की सूरत में सिंकाई के लिए भी बर्फ़ बेची. सुपरमार्केट कंपनी टेस्को, उन्हीं से बर्फ़ ख़रीदती है. फिर भी कंपनी के उत्पादन का दस फ़ीसद, दूसरे देशों में बेचा जा रहा है. ये कारोबार 2010 से 2015 के बीच क़रीब आठ गुना बढ़ चुका है.

पूरे यूरोप में बर्फ़ की मांग बढ़ रही है. पहले हर ड्रिंक में बर्फ़ डालना अमेरिकी ख़ब्त माना जाता था. अब हर कोई अपनी बीयर या शराब में बर्फ़ डालकर पीना पसंद करता है.

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मैरीज़ प्रायर कहती हैं कि फ्रांस में आपको हर जगह बर्फ़ बिकती दिखेगी. पेट्रोल स्टेशन हों या सुपरमार्केट. यही हाल ब्रिटेन में भी है. लंदन के सबसे पुराने पब्स में से एक मेफ्लॉवर में भी अब बर्फ़ के पैकेट बिकते हैं.

स्पेन, बेल्जियम, आयरलैंड जैसे देश मिलकर आज ब्रिटेन से 2013 के मुक़ाबले 88 फ़ीसद ज़्यादा बर्फ़ ख़रीदते हैं. इसी तरह चीन में भी बर्फ़ का आयात तीन गुना तक बढ़ गया है पिछले दो से तीन सालों में.

हालांकि द आइस कंपनी के अपने सर्वे में पता चला है कि आज भी बहुत कम लोग ही बर्फ़ ख़रीद रहे हैं. लेकिन ये तादाद पिछले पांच सालों में दोगुनी हो गई है.

और ख़रीदार हासिल करने के लिए बर्फ़ बेचने वाली कंपनियां साफ़-सफ़ाई पर ख़ास ज़ोर दे रही हैं. किर्कबी में द आइस कंपनी की फैक्ट्री में बर्फ़ को आप छू तक नहीं सकते. सिर से पांव तक आपको जैकेट, ग्लोव्स, और ख़ास जूते पहनने होंगे. सब काम मशीनों से होता है. यहां तक कि पैकेट में बंद होने के बाद भी फैक्ट्री के कर्मचारी उसे नहीं छूते.

वैसे साफ़-सफ़ाई के अलावा भी दूसरी वजहें हैं बर्फ़ ख़रीदने की. जैसे द आइस कंपनी की सुपरक्यूब जो आम बर्फ़ के टुकड़ों से पांच गुना ज़्यादा वक़्त लेती है पिघलने में.

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इसी तरह आइस एंड स्लाइस. जिसमें बर्फ़ के टुकड़ों के साथ फलों के टुकड़े जमाकर बेचे जाते हैं. या फिर जमे हुए कॉकटेल्स. जिन्हें फ्रिज से निकालकर हल्का हल्का पिघलते हुए पीने में लुत्फ़ आता है.

(अंग्रेज़ी में मूल लेख यहां पढ़ें, जो बीबीसी कैपिटल पर उपलब्ध है.)

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