ऑस्ट्रेलिया: अडानी को खदान के ठेकों का कड़ा विरोध

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ऑस्ट्रेलिया में भारतीय कारोबारी समूह अडानी को कोयला खनन के तीन ठेके दिए जाने के बाद वहाँ समूह की विशालकाय कोयला खान चलाने का पुरज़ोर विरोध शुरू हो गया है.

क्वींसलैंड की प्रांतीय सरकार ने भारतीय कारोबारी समूह अडानी को विशालकाय कोयला खान चलाने की इजाज़त दी है. इस प्रोजेक्ट की कीमत 16.6 अरब डॉलर है. उद्योगपति अडानी भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करीबी बताए जाते हैं.

पर्यावरणविदों ने कारमाइकल खनन क्षेत्र से जुड़े इस फ़ैसले का विरोध ये कहते हुआ किया है कि इससे क्वींसलैंड के समुद्रतटीय इलाके में स्थित ग्रेट बैरियर रीफ़ को ख़तर पैदा हो जाएगा.

ऑस्ट्रेलिया दुनिया का सबसे बड़ा कोयला उत्पादक देश है.

ये माना जा रहा है कि अडानी की इस परियोजना को पर्यावरणविदों और परंपरागत तौर पर इस इलाके में काम करने वाले कोयला खनन मालिकों के क़ानूनी विरोध का सामना करना पड़ेगा.

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ऑस्ट्रेलियाई संरक्षण फाउंडेशन (एसीएफ) ने इस अनुमति के ख़िलाफ़ फ़ेडरल कोर्ट में याचिका दायर की है, जिस पर मई में सुनवाई होगी.

एसीएफ के मुख्य कार्यकारी केली ओशानासी ने अपने बयान में कहा, “कारमाइकल खनन क्षेत्र में अनुमति देना क्वींसलैंड सरकार का गैर ज़िम्मेदारी भरा फ़ैसला था. इससे आने वाले समय में लाखों टन प्रदूषण बढ़ेगा. इससे ग्रेट बैरियर रीफ़ को काफी नुकसान होगा.”

लेकिन क्वींसलैंड के प्रधानमंत्री अनास्टासिया पलास्ज़ेकज़ुक ने कहा कि इस इलाके में पर्यावरण संरक्षण के लिए 200 कड़ी पाबंदी लगाई जाएँगी और इस परियोजना से स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी.

पलास्ज़ेकज़ुक ने कहा, “कार्न्स ग्रेट बैरियर रीफ़ में काफ़ी नौकरिया हैं. लेकिन वहां से निकलने पर बड़ी परियोजनाओं से ही नौकरियां आएंगी और दोनों साथ में चल सकते हैं.”

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अडानी ने इस परियोजना पर 2017 से काम शुरू करने की बात कही है. हालांकि ये आशंका भी जताई जा रही है कि आर्थिक मंदी के दौर में इस परियोजना को काफी वित्तीय चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा.

कंपनी के प्रवक्ता ने अपने एक बयान में कहा है, “दूसरे स्तर की मंज़ूरी मिलने के बाद कंपनी का ध्यान राजनीति से प्रेरित क़ानूनी चुनौतियों पर है. इसके बाद ही निवेश संबंधी अंतिम फ़ैसला लिया जाएगा.”

ऑस्ट्रेलिया के कॉमनवेल्थ बैंक ने बीते साल घोषणा की थी कि वह कोयला खनन क्षेत्र में निवेश को मदद नहीं देगा. इसके अलावा सिटी ग्रुप, ड्यूशे बैंक और मोर्गन स्टेनली ने भी इस प्रोजेक्ट में दिलचस्पी नहीं दिखाई है.

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