दफ्तर से बिना संकोच छुट्टी लीजिए !

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बहुत से लोग दफ़्तर से छुट्टी लेने में संकोच करते हैं. वो बिना वजह छुट्टी नहीं लेना चाहते. उन्हें लगता है कि छुट्टी लेंगे तो उनके बारे में दफ़्तर मं ग़लत राय बनेगी.

मगर, हम आज आपको सलाह दे रहे हैं कि आप बिंदास छुट्टी लीजिए. ख़ुद को सुकून देने के लिए...दिमाग़ को आराम देने के लिए...ख़ुद को तरो-ताज़ा करने के लिए.

वैसे बहुत से लोग ऐसे भी होते हैं, जो बीमारी का बहाना करके छुट्टी लेते हैं. आपको ऐसा करने की ज़रूरत नहीं.

आपका दिल सुकून महसूस करने का हो रहा है, तो छुट्टी लेने में हिचकिएं नहीं. हां, ये ज़रूरी नहीं कि आप छुट्टी लेने की असल वजह अपने बॉस को बताएं.

न्यूयॉर्क की मार्केटिंग एक्ज़ीक्यूटिव, एमी वेल को ही लीजिए. वो कोई बार अपनी दिमाग़ी सेहत के लिए 'मेंटल हेल्थ डे' मनाती हैं. मतलब ये कि वो एक दिन के लिए दफ़्तर से छुट्टी ले लेती हैं. हां, छुट्टी की असल वजह वो नहीं बतातीं. वरना सौ सवाल होंगे. आख़िर ये 'मेंटल हेल्थ डे' क्या बला है?

लोगों को यक़ीन ही नहीं होगा कि सुकून महसूस करने के लिए भी कोई छुट्टी लेता है. ख़ुद वेल को कई बार लगा कि लोग उनके छुट्टी लेने की वजह का मज़ाक़ उड़ाते हैं.

वैसे तो कई कंपनियां, अपने मुलाज़िमों को निजी और प्रोफ़ेशनल लाइफ़ में बैलेंस बनाने में मदद के दावे करती हैं. फिर भी माहौल ऐसा होता है कि लोग छुट्टी मांगने में घबराते हैं. उन्हें ज़रूरत महसूस होती है तो झूठ बोलना पड़ता है.

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कभी बीमारी का झूठा बहाना तो कभी रिश्तेदारों की मुसीबत का हवाला देना पड़ता है. छुट्टी मांगने को लेकर, ऐसा माहौल कमोबेश हर कंपनी में देखा जाता है. कई बार तो लोगों को मजबूर किया जाता है कि वो छुट्टी लेने की सही वजह लिखकर दें.

ऐसे में हम सब ये बताने में संकोच करते हैं कि हमें सुकून के दो पल बिताने के लिए छुट्टी चाहिए.

तमाम जानकार अब कंपनियों को सलाह दे रहे हैं कि वो छुट्टी को लेकर अपने यहां का माहौल सुधारें. ऐसा करें कि सिर्फ़ सुकून महसूस करने के लिए कोई छुट्टी मांगने में हिचके नहीं. इससे कर्मचारियों का तनाव कम होगा और वो बेहतर काम कर पाएंगे. अक्सर छुट्टियों में लोग कहीं घूमने जाने का प्लान बनाते हैं. या परिवार-रिश्तेदारों के पास जाते हैं.

मगर एक दो दिन, अकेले में अपने-आप से बातें करते हुए बिताने का हमारी दिमाग़ी सेहत पर अलग ही असर होता है. ये 'मी टाइम' हमारी क्रिएटिविटी को बेहतर करता है.

ऐसे बिताया गया एक दिन, हमें दो हफ़्ते तक बेहतर काम करने की एनर्जी देता है. लगातार काम करते हुए हम थकान महसूस करते हैं. काम करने का हमारा हौसला ख़त्म सा मालूम होता है.

ऐसी छुट्टी लेने वाली न्यूयॉर्क की एमी वेल ये 'मी टाइम' या 'मेंटल हेल्थ डे' समंदर के किनारे टहलते-घूमते बिताती हैं. वो इंटरनेट, मोबाइल और पढ़ाई-लिखाई से दूरी बना लेती हैं. ताकि ख़ुद के बारे में सोचें-समझें.

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ऐसे 'मेंटल हेल्थ डे' को पहले से प्लान करके लेना चाहिए. ताकि एक दिन की इस छुट्टी का आप भरपूर फ़ायदा ले सकें. अचानक से छुट्टी लेने पर, आपके दिमाग़ में वो दिन बिताने का एजेंडा नहीं होगा और इसका मक़सद भी पूरा नहीं होगा. इससे आपको छुट्टी मिलने में भी आसानी होगी. तो आप अपने सीनियर्स और साथियों से बात करके ऐसी छुट्टी ले सकते हैं, बेहतर प्लानिंग करके.

जानकार ये भी कहते हैं कि अगर आपको सिर्फ़ सुकून के लिए छुट्टी चाहिए, तो सच बोलकर छुट्टी मांगना बेहतर होगा. हालांकि ये आसान नहीं, ख़ास तौर से बड़ी कंपनियों में. मगर छोटी कंपनियों में, जहां कम लोग होते हैं, वहां सच बोलकर भी छुट्टी मिल जाएगी.

आपको अपने बॉस को समझाना होगा कि एक दिन का ये सुकून आपके लिए कितना ज़रूरी है. इससे आपकी टीम को क्या फ़ायदा होगा. आप उन्हें बताइए कि इससे आप तरो-ताज़ा महसूस करेंगे, बेहतर ढंग से काम कर सकेंगे. तो पूरे हक़ के साथ ये छुट्टी मांगिए.

आज टीम लीडर्सको भी मालूम है कि अगर पूरी तरह से थकी-निराश टीम के साथ काम करेंगे तो बेहतर नतीजे नहीं आएंगे. ऐसे में कई जगह ख़ुद बॉस, अपने मातहतों को एक दिन की 'मेंटल हेल्थ डे' की छुट्टी लेने को कहते हैं.

तो, आप पहले तैयारी कर लीजिए, कि आपको सोते हुए वक़्त गुज़ारना है. शॉपिंग करनी है. अकेले लेटे हुए संगीत सुनते हुए वक़्त गुज़ारना है. या फिर, समंदर किनारे टहलने के लिए निकलना है. फ़िल्म देखनी है, या नाटक देखने जाना है.

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आप किसी दिन अपने मन का खाना पकाकर लोगों को खिलाने की योजना भी बना सकते हैं. जो भी तय हो, वो आपकी रूटीन ज़िंदगी से अलग होना चाहिए. जब आपका इरादा पक्का हो जाए, तो छुट्टी की बात कीजिए. बिना किसी प्लान के ऐसी छुट्टी लेना बेमतलब होगा.

छुट्टी के दौरान, ऑफ़िस से दूर, काम की फ़िक्र के बग़ैर 24 घंटे बिताना बहुत बड़ी चुनौती है. इस दौरान, आपको ऑफ़िस का कोई काम नहीं करना चाहिए. ई-मेल भी नहीं चेक करने चाहिए, भले ही आपकी आदत हो. मेल चेक करना कितना भी ज़रूरी क्यों न हो.

क्योंकि अगर आप ऐसा करेंगे, तो आपका शरीर भले छुट्टी पर होगा, आपका ध्यान तो दफ़्तर में ही होगा. ऐसी छुट्टी का कोई मतलब नहीं. फ़ोन से पूरी तरह दूरी बनाना भी ठीक नहीं. फ़ोन साथ रखकर भी आप उसमें मेल न देखें, ये बड़ी बात होगी.

एक दिन की ऐसी छुट्टियां, कर्मचारियों को अच्छा महसूस कराती हैं. वो ज़्यादा उत्साह से काम करने को राज़ी होते हैं. इससे टीम का काम ही बेहतर होता है.

हर दो तीन महीने में सुकून के एक दिन की छुट्टी लेना, आपकी सेहत के लिए भी बेहतर होगा. आपका तनाव कम होगा.

तो, जब भी आप दफ़्तर से बोरियत महसूस करें. बेवजह थकान लगे, तो बिंदास छुट्टी लीजिए और मनाइए 'मेंटल हेल्थ डे'.

(अंग्रेज़ी में मूल लेख यहां पढ़ें, जो बीबीसी कैपिटल पर उपलब्ध है.)

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